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तालिबान और पाकिस्तान की रुचि शांति समझौते में कम, अंतरराष्ट्रीय बलों की वापसी में ज्यादा
Wed, 30 Sep 2020 04:42 AM IST
Rajeev Rai
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Rajeev Rai
Updated Wed, 30 Sep 2020 04:42 AM IST
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अमेरिका-तालिबान के नेता (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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पाकिस्तान और तालिबान की रुचि शांति समझौते से ज्यादा अफगानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय बलों की वापसी में है। पाकिस्तान के एक पूर्व राजनयिक ने यह बताने के साथ ही साथ चेतावनी दी कि दोहा में चल रही मौजूदा शांति वार्ता विफलता की तरफ बढ़ रही है।
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अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने सोमवार को कहा कि मैं बातचीत के नतीजों को लेकर बहुत आशावादी नहीं हूं। अमेरिका ने सारी प्रमुख रियायतें सामने रख दी हैं। तालिबान को ये पता है कि अफगानिस्तान से अमेरिका निकलना चाहता है। वो इसे देख सकते हैं इसलिये विदेशी बलों की वापसी और उसके बाद यथास्थिति को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जब वे अफगानिस्तान पर उसके इस्लामी अमीर के तौर पर शासन करेंगे।
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ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स की अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं रक्षा समिति के सामने डिजिटल रूप से बयान देते हुए हक्कानी ने कहा कि यह अफगानिस्तान के अन्य लोगों को मंजूर नहीं होगा। उन्होंने तालिबान के साथ अमेरिका की बातचीत की तुलना वियतनाम युद्ध के बाद पेरिस शांति वार्ता से करते हुए कहा कि हेनरी किसिंगर ने कहा था कि वह अमेरिकी सैनिकों की वापसी और दक्षिण वियतनाम में अमेरिका के समर्थन वाली सरकार को गिराए जाने के बीच उचित विराम चाहते हैं।
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