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ताइवान का एलान: चीन ने छेड़ी जंग तो आखिरी दिन तक लड़ेंगे और अपनी रक्षा करेंगे

Wed, 07 Apr 2021 06:05 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 07 Apr 2021 06:05 PM IST
सार

ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने बुधवार को कहा कि अगर चीन ने हमला किया तो द्वीप 'अंतिम दिन] तक अपनी रक्षा करेगा। जोसेफ वू ने कहा कि सैन्य धमकी के साथ सुलह के चीन के प्रयासों से द्वीप के निवासियों को 'मिश्रित संकेत' मिल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चीन दावा करता है कि ताइवान उसका भूभाग है।

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Taiwan vows to fight till last day if China attacks
ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू - फोटो : twitter.com/MOFA_Taiwan

विस्तार

वू ने कहा कि सोमवार को ताइवान के हवाई क्षेत्र में चीन के 10 युद्धक विमानों ने उड़ान भरी थी। उन्होंने कहा, 'हम बिना किसी सवाल के, अपना बचाव करने के लिए तैयार हैं। अगर हमें युद्ध लड़ने की जरूरत हुई तो हम युद्ध लड़ेंगे, और अगर हमें आखिरी दिन तक अपना बचाव करना पड़ा तो हम अपना बचाव करेंगे।'

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विदेश मंत्री ने यह भी कहा था कि उसने अभ्यास के लिए ताइवान के पास एक विमान वाहक समूह भी तैनात किया है। बता दें कि चीन ताइवान की लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को मान्यता नहीं देता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि दोनों के 'एकीकरण' को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता।
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'मिले-जुले संकेत भेज रहा है चीन'
वू ने मंत्रालय की एक ब्रीफिंग में कहा, 'वे एक ओर संवेदनाएं भेजकर ताइवान के लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं, लेकिन वहीं वे हमारे पास अपने सैन्य विमान और सैन्य पोतों को भी भेज रहे हैं ताकि ताइवान के लोगों को भयभीत किया जा सके।' वू ने कहा, 'चीन ताइवानी लोगों के लिए मिश्रित संकेत भेज रहा है...।'
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अमेरिका के लिए बढ़ गई हैं चिंताएं
यहां ध्यान देने वाली बात है कि चीन की सैन्य क्षमताओं में भारी सुधार और ताइवान के आसपास उसकी बढ़ती गतिविधियों के चलते अमेरिका की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिकी कानूनी रूप से इस बात का आश्वासन देने के लिए बाध्य है कि ताइवान खुद का बचाव करने में पूरी तरह सक्षम है।


1949 में अलग हुए थे चीन-ताइवान
बता दें कि ताइवान और चीन साल 1949 में गृह युद्ध के बीच अलग हो गए थे। ताइवान के अधिकतर लोग मुख्य भूमि के साथ मजबूत आर्थिक आदान-प्रदान जारी रखते हुए वास्तविक स्वतंत्रता की मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के पक्ष में हैं। लेकिन, चीन इसके पक्ष में नहीं है और ताइवान पर अपना दावा जताता है।

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