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कूटनीति में नया अध्याय?: चीन के विरोध के बावजूद ताइवान राष्ट्रपति का एस्वातिनी दौरा, दोस्ती और ताकत का संदेश

Sat, 02 May 2026 11:48 PM IST
Shivam Garg वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपेई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपेई Published by: Shivam Garg Updated Sat, 02 May 2026 11:48 PM IST
सार

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने एस्वातिनी में पहुंच कर ताइवान और अफ्रीकी राष्ट्र के बीच दोस्ती को मजबूत किया। चीन के दबाव के बावजूद उनकी यात्रा, कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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Taiwan President Lai Ching-te Lands in Eswatini Despite China Pressure
ताइवन के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते - फोटो : ANI

विस्तार

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते शनिवार को अफ्रीका के छोटे राष्ट्र एस्वातिनी में पहुंचे। यह यात्रा मूल रूप से 22 अप्रैल को तय थी, लेकिन कई देशों ने चीन के दबाव में उड़ान की अनुमति वापस ले ली थी।

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लाई ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उनका यह दौरा ताइवान और एस्वातिनी के लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ताइवान, जो कि एक स्वतंत्र लोकतंत्र है और जिसे चीन अपना हिस्सा मानता है, बाहरी दबाव से कभी भी नहीं हारेगा।
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उड़ान अनुमति रद्द, चीन का दबाव
ताइवान के अधिकारियों ने बताया कि उनकी उड़ान की अनुमति सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर द्वारा रद्द कर दी गई थी। अधिकारियों ने इसे चीन के कड़े आर्थिक और कूटनीतिक दबाव” का परिणाम बताया। लाई ने फेसबुक पर लिखा कि उनकी यात्रा कूटनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा टीमों की सावधानीपूर्ण योजना के बाद ही संभव हो सकी। उनका मानना है कि यह दौरा आर्थिक, कृषि, सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग को और बढ़ाएगा।
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चीन ने जताई नाखुशी
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने लाई की यात्रा को हास्यास्पद प्रदर्शन बताते हुए कहा कि इसे ताइवान से छुपकर किया गया। प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह दौरा ताइवान की चीन का हिस्सा होने की वास्तविकता को नहीं बदल सकता। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति का दौरा अंतर्राष्ट्रीय कानून, मानदंड और कूटनीतिक प्रथाओं के अनुरूप था। मंत्रालय ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के सुरक्षित आगमन की घोषणा यात्रा के बाद की गई, जो कई अंतर्राष्ट्रीय उदाहरणों में देखा गया है।


अफ्रीका में ताइवान की स्थिति
एस्वातिनी अफ्रीका में ताइवान का एकमात्र कूटनीतिक सहयोगी है। पिछले साल, पूर्व राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन भी इसी देश का दौरा कर चुकी हैं। चीन ने एस्वातिनी को अपने बाजार में टैरिफ-फ्री पहुंच से भी बाहर रखा था, क्योंकि इस देश के ताइवान से कूटनीतिक संबंध हैं। चीन ने कभी भी ताइवान पर बल प्रयोग करने की संभावना को खारिज नहीं किया है और अन्य देशों को भी ताइवान के साथ औपचारिक संबंध बनाने से रोकने का प्रयास किया है।

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