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कौन है तहव्वुर राणा: प्रत्यर्पण से बचने को कितनी अदालतों में लगाई याचिका, कैसी-कैसी दलीलें दीं और अब आगे क्या?

Fri, 07 Mar 2025 02:41 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 07 Mar 2025 02:41 PM IST
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सार
तहव्वुर राणा कौन है? अमेरिका में वह किस मामले में सजा काट रहा था? उसके प्रत्यर्पण से जुड़े मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है? भारत में उस पर चलने वाला मामला कितना अलग होगा? इसमें आगे क्या-क्या हो सकता है? आइये जानते हैं...
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Tahawwur Rana Extradition looming as Court battles end coming fore Trump Biden Admin 2008 Mumbai Terror Attack
तहव्वुर राणा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

2008 मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में मोस्ट वॉन्टेड आतंकी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तहव्वुर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने भारत प्रत्यर्पण के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। उसने दलील दी थी कि अगर उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाता है तो वहां उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा सकता है। 


गौरतलब है कि 26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को लेकर भारत में पहली चार्जशीट 2011 में दायर हुई थी। वहीं अमेरिका में उसके खिलाफ मामला 2009 में दर्ज हुआ था। अमेरिकी कोर्ट ने 2013 में उसे 14 साल जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि, अमेरिकी कोर्ट की तरफ से दी गई सजा पूरी होने से ठीक पहले ही अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। इसी के साथ भारत में आतंकी हमले के 16 साल पुराने मामले में अब आरोपी राणा की सीधे तौर पर पेशी का रास्ता भी साफ हो गया।  


ऐसे में यह जानना अहम है कि तहव्वुर राणा कौन है? अमेरिका में वह किस मामले में सजा काट रहा था? उसके प्रत्यर्पण से जुड़े मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है? भारत में उस पर चलने वाला मामला कितना अलग होगा? इसमें आगे क्या-क्या हो सकता है? आइये जानते हैं...

पहले जानें- कौन है तहव्वुर राणा?
तहव्वुर हुसैन राणा (63 वर्षीय) पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है। उसका जन्म 1961 में पाकिस्तान की तरफ पंजाब में स्थित चिचावतनी में हुआ था। राणा ने पाकिस्तान के अटोक जिले के हसन अब्दल में कैडट कॉलेज से पढ़ाई की। यहीं उसकी दोस्ती डेविड हेडली के साथ हुई थी, जो कि 2008 के मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है। बताया जाता है कि हेडली ने यहां पांच साल तक पढ़ाई की थी।

2008 के मुंबई आतंकी हमलों में नाम क्यों आया?
दावा है कि तहव्वुर राणा ने अपनी कंसल्टेंसी फर्म्स में डेविड हेडली को भी नौकरी दी। इसी फर्म की मुंबई शाखा के काम के लिए डेविड हेडली मुंबई आया था और यहां लश्कर-ए-तयैबा के आतंकी हमलों की तैयारी के लिए मुंबई में ताज महल होटल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जैसी प्रमुख जगहों की रेकी की थी। 

जांचकर्ताओं का मानना है कि तहव्वुर राणा ने कंसल्टेंसी फर्म की आड़ में ही डेविड हेडली से रेकी का पूरा काम कराया। साल 2008 में मुंबई में पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने घुसकर शहरभर में हमले किए थे। इन बर्बर हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों और कुछ यहूदियों समेत 166 लोग मारे गए थे। 

अमेरिका में पूछताछ के दौरान हेडली ने अभियोजकों को मुंबई हमले की साजिश की पूरी जानकारी दी। इसके मुताबिक...



बताया जाता है कि 2009 में गिरफ्तारी से पहले हेडली-राणा ने मुंबई आतंकी हमले में शामिल पाकिस्तानी आतंकियों को पाकिस्तान का सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार निशान-ए-हैदर दिए जाने पर सहमति जताई थी। 
 

अमेरिका में जिस मामले में दोषी पाया गया राणा, वह भारत के केस से कितना अलग?
अमेरिका में हेडली-राणा दोनों पर दर्ज मामलों में सुनवाई हुई। यहां हेडली ने कोर्ट में कई खुलासे किए। हेडली ने बताया कि डेनमार्क में डेनिश अखबार पर हमले के लिए तहव्वुर राणा ने ही उसके दौरे को मंजूरी दी थी। वह डेनमार्क में राणा की फर्म से ही आव्रजन कानून केंद्र का प्रतिनिधि बन कर गया था। इसके लिए राणा ने हेडली के बिजनेस कार्ड छपवाए थे। हालांकि,  अल-कायदा की तरफ से 'मिक्की माउस प्रोजेक्ट' कोडनेम वाले जिलेंड्स-पोस्टेन अखबार पर हमले को अंजाम नहीं दिया जा सका। हेडली-राणा पर अखबार के कर्मचारियों पर हमले और पास ही एक यहूदी पूजास्थल को निशाना बनाने के लिए साजिश रचने के आरोप लगे थे। 

चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका में साल 2011 में राणा पर अमेरिका में दोनों मामलों में मुकदमा चलाया गया और उसे डेनिश अखबार पर हमला करने की साजिश में पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को मदद पहुंचाने का दोषी ठहराया गया। हालांकि, कई सबूत होने के बावजूद अमेरिकी जिला अदालत की जूरी ने उसे मुंबई हमलों में शामिल होने के आरोप से बरी कर दिया। जनवरी 2013 में राणा को संघीय जेल में 14 साल की सजा सुनाई गई, इसके बाद उसे पांच साल तक निगरानी में रखने का निर्देश दिया गया। 

यह तब हुआ, जब डेविड हेडली ने दोनों मामलों में अभियोजकों को खुलकर तहव्वुर राणा के खिलाफ सबूत दिए थे। हालांकि, राणा के वकीलों का कहना था कि डेविड हेडली झूठ बोलकर बच निकलने में माहिर रहा है। उसने कई पुराने दोस्तों को आपराधिक मामलों में फंसाया और खुद कम सजा के साथ बच निकला। 

राणा के प्रत्यर्पण को लेकर कार्रवाई में क्या हुआ?

निचली अदालतों में
  • मई 2023 में कैलिफोर्निया के एक जिला न्यायालय ने राणा को भारत प्रत्यर्पित किए जाने का फैसला दिया। अमेरिकी सरकार ने भी राणा के भारत प्रत्यर्पण को दोनों देशों के बीच की संधि के तहत वैध माना। 
  • अगस्त 2024 में कैलिफोर्निया में स्थित संघीय अदालत ने भी प्रत्यर्पण के खिलाफ दी गई राणा की अपील को ठुकरा दिया।
  • सितंबर 2024 में राणा की अपील को सैन फ्रैंसिस्को नॉर्थ सर्किट की अपीलीय अदालत ने भी खारिज कर दिया और उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। 
इसी के साथ तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को अमेरिका की सभी निचली अदालतों में मंजूरी मिली। इस पूरे मामले में गौर करने वाली बात यह रही कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत का साथ दिया। राणा ने जब अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली, तब भी बाइडन प्रशासन ने जल्द से जल्द उसकी याचिका खारिज करने की मांग की। 

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
  • 21 जनवरी 2025 को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने भी तहव्वुर राणा को झटका दिया और उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। 
  • 27 फरवरी को राणा ने एक समीक्षा याचिका दायर कर कहा कि भारत में उसे पाकिस्तानी मुस्लिम होने की वजह से प्रताड़ित किया जाएगा। 
  • 6 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया और प्रत्यर्पण का रास्ता साफ कर दिया। 

अब आगे की राह क्या?
तहव्वुर राणा ने सुप्रीम कोर्ट में आपात समीक्षा याचिका खारिज होने के बाद अब एक बार फिर अमेरिका के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स को आवेदन भेजा है। इसमें राणा ने उनसे अपने प्रत्यर्पण को रोकने की अपील की है। फिलहाल लॉस एंजेलिस के मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद राणा ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में खुद के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग की थी। उसने कहा था कि उसे कई बार हार्ट अटैक आ चुका है। इसके अलावा वह पार्किन्सन से भी ग्रसित है। उसके ब्लैडर पर मांस के बढ़ने की रिपोर्ट्स हैं, जो कि ब्लैडर कैंसर हो सकता है। इसके अलावा उसे किडनी की बीमारी है। इसके अलावा उसे कई बार कोरोनावायरस संक्रमण हो चुका है और दमे की शिकायत भी है। 

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में उसने कहा कि वह पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम है, इसलिए भारत में उसे टॉर्चर किया जा सकता है, जो कि बेहद कम समय में उसकी जान ले सकता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 26/11 हमले के आरोपी के प्रत्यर्पण पर मुहर लगा चुके हैं। ऐसे में तहव्वुर राणा को सरकारी मदद मिलने की संभावना कम है। भारत ने भी उसके प्रत्यर्पण की संभावना को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। 

भारत में तहव्वुर राणा को लेकर क्या-क्या तैयारियां?
  • राणा को भारत ला कर एनआईए की अदालत में पेश किया जाएगा। एनआईए पूछताछ के लिए अदालत से उसकी हिरासत मांगेगी। इसके साथ ही भारत में राणा के खिलाफ मुंबई आतंकी हमला मामले में न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत होगी।
  • महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फरवरी में संकेत दिए थे कि तहव्वुर राणा को उसी जेल में रखा जाएगा, जहां 26/11 हमले को अंजाम देने वाले आतंकी अजमल कसाब को रखा गया था। 
  • दूसरी तरफ दिल्ली के तिहाड़ जेल प्रशासन ने भी तहव्वुर राणा के लिए उच्च सुरक्षा वाला जेल वार्ड बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, राणा को कहां रखा जाएगा इस पर अंतिम फैसला गृह मंत्रालय लेगा। 
  • अमेरिकी अदालत में अपने बचे हुए मौकों को खत्म करने के बाद राणा को ट्रंप सरकार की तरफ से प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा। जानकारी मिलते ही एनआईए की एक टीम उसे लेने के लिए रवाना हो जाएगी। इसमें आईजी-डीआईजी और दो जूनियर अधिकारी शामिल होंगे।

 
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