सात साल की उम्र में पहचाना जा सकता है बच्चों में अवसाद का लक्षण
- बॉस्टन स्थित नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन
- सात साल की उम्र से पहले हो जाती है दिमाग में अवसाद की शुरुआत
- चार साल में और बढ़ी है पांच में से एक बच्चे में अवसाद की समस्या
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बच्चों के मस्तिष्क में अवसाद की शुरुआत सात साल की उम्र से पहले ही हो जाती है जिसके लक्षणों को आसानी से पहचाना जा सकता है। बहुत से बच्चों में अवसाद के लक्षण जैसे चिंता और निराशा किशोरावस्था की उम्र से पहले नहीं दिखते हैं।
अमेरिका के बॉस्टन स्थित नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 100 बच्चों पर अवसाद को लेकर अध्ययन किया जो हाल ही जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जामा) के साइक्रेटरी में प्रकाशित हुआ है।
इसमें पता चला है कि पांच में से एक बच्चे में अवसाद की समस्या चार साल के भीतर और बढ़ी है। इस उम्र में समय रहते लक्षणों को पहचान लिया जाए तो भविष्य में बच्चे को होने वाली भावनात्मक परेशानियों से बचाया जा सकता है।
100 बच्चों के मस्तिष्क की हुई स्कैनिंग
वैज्ञानिकों ने शोध में शामिल 100 बच्चों के मस्तिष्क की एमआरआई जांच की। इसमें पता चला है कि कौन सा बच्चे को ग्यारह साल की उम्र में अवसाद की समस्या होगी। 94 बच्चों की एमआरआई जांच में पता चला कि मस्तिष्क के दो हिस्सों का आपस में कोई खास संबंध नहीं था जिसका काम निर्णय लेना और मूड नियंत्रण करना होता है।
रक्त संचार की प्रक्रिया है अहम
मस्तिष्क के दो हिस्से जिनका काम निर्णय लेना और खुश मिजाजी के लिए होता है। इन दोनों के बीच रक्त संचार तेज रहता है तो ऐसे बच्चों का स्वभाव अच्छा होता है और वे अपने भावनात्मक विचारों पर अच्छा नियंत्रण रखते हैं। जिन बच्चों में रक्त संचार धीमा होता है उनमें अवसाद के लक्षण अधिक दिखते हैं और आने वाले चार साल में स्थिति और खराब होती है।
बच्चों का अलग-अलग स्वभाव
अध्ययन में वैज्ञानिकों को हर बच्चे में अलग-अलग स्वभाव दिखा। इसमें मुख्य तौर पर बच्चों का परिवार और दोस्तों से दूरी बनाकर रखना, परेशान रहना, चिंतित रहना और शारीरिक रूप से बहुत थका हुआ महसूस करना पाया गया।
इन लक्षणों को जल्द पहचान लें
- बच्चों का अलग रहना, बात न करना
- किसी भी चीज में उनका मन न लगना
- स्कूल और पढ़ाई में मन न लगना
- निराश रहना, बिना कारणा रोते रहना
- फैसला लेने या अपनी बात न कह पाना
भारत में अवसाद ग्रस्त बच्चे
- 4 में से एक बच्चा 13 से 15 की उम्र में अवसाद ग्रस्त है
- 7 फीसदी बच्चे अपनों से तंग होने केचलते अवसाद में चले जाते हैं
- 25 फीसदी किशोर उम्र के युवा अवसाद और निराशा में डूबे रहते हैं
- 11 फीसदी बच्चे तनाव और अवसाद के चलते पढ़ नहीं पाते हैं
- 8 फीसदी बच्चे चिंता में रहने के चलते सो नहीं पाते हैं
- 10 फीसदी बच्चों का कोई अच्छा दोस्त नहीं होता है
(स्रोत: डब्ल्यूएचओ)