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WHO: दुनिया में कोरोना से होने वाली मौतों पर विश्व स्वास्थ्य एजेंसी की चेतावनी, सड़क हादसों पर भी दी गाइडलाइन

Sun, 11 Sep 2022 10:24 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 11 Sep 2022 10:24 PM IST
सार

विशेषज्ञों ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि पाकिस्तान में आत्महत्या की दर आठ प्रतिशत को पार कर गई है और यह चिंताजनक है। इस बीच, हाल ही मं गिलगित-बाल्टिस्तान में युवाओं में आत्महत्या के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

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Suicide rate crosses 8 pc in Pakistan rings alarm of concern WHO
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विस्तार

पाकिस्तान में आत्महत्या की दर आठ प्रतिशत को पार कर गई है। इससे देश के मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। 
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रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में शनिवार को मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया।  इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और अवसाद के उपचार और आत्महत्या के लिए जिम्मेदार अन्य मानसिक विकारों पर गहन चर्चा की गई। 
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रिपोर्ट नहीं की जातीं कई कई आत्महत्या की घटनाएं
इस आयोजन के दौरान कई विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में आत्महत्या की दर में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आत्महत्या को एक अपराध के रूप में देखना एक त्रासदी है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आत्महत्या की कई घटनाएं रिपोर्ट नहीं की जाती हैं। 
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विशेषज्ञों ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि पाकिस्तान में आत्महत्या की दर आठ प्रतिशत को पार कर गई है और यह चिंताजनक है। इस बीच, हाल ही मं गिलगित-बाल्टिस्तान में युवाओं में आत्महत्या के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

छह महीनों में आत्महत्या के 15 मामले सामने आए
पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 के पहले छह महीनों के दौरान आत्महत्या के 15 मामले सामने आए, जबकि पिछले पांच वर्षों में 222 से ज्यादा लोगों ने खुदकुशी की। हालांकि अब तक आत्महत्या के इन मामलों के पीछे की सही वजह का पता नहीं चल पाया है। 

कुछ शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि आत्महत्या के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण सामाजिक बदलाव और मानसिक विकारों की अनियंत्रित गति है। विशेषज्ञों ने कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान में कई आत्महत्या के मामले दर्ज नहीं होते हैं क्योंकि आत्महत्या की कई घटनाओं को हत्या या दुर्घटना मान लिया जाता है।  

कोविड से मौत को लेकर डब्ल्यूएचओ ने दी चेतावनी
डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर हर 44 सेकंड में अब भी एक व्यक्ति की मौत कोविड-19 के कारण हो रही है। 

हालांकि डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस एडनॉम घ्रेबेयसस ने अपनी ताजा टिप्पमी में कहा कि रिपोर्ट किए गए मामलों और मौतों में वैश्विक गिरावट जारी है। यह बहुत उत्साहजनक है। लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि यह परिणाम कब तक बने रहेंगे। 

एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा, फरवरी के बाद हर सप्ताह रिपोर्ट की गई मौतों की संख्या में अस्सी फीसदी से ज्यादा की गिरावट हुई है लेकिन पिछले सप्ताह कोविड-19 से हर 44 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हुई है। 

सड़क हादसों से हो रही मौतों पर जताई चिंता, दिशा-निर्देश जारी किए
स्वास्थ्य निकाय ने दुनियाभर में सड़क हादसों से होने वाली मौते परक भी गहरी चिंता जताई है। डब्ल्यूएचओ ने सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर वैश्विक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों में सुरक्षित हेलमेट के अनिवार्य प्रयोगके साथ ही जान बचाई जा सकती है। पथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बेहतर उपाय किया गया है। 

डब्ल्यूएचओ के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पूरी दुनिया में हर साल सड़क हादसों में तेरह लाख लोगों मारे जाते हैं। इस आधार पर दुनिया में हर एक मिनट में दो से अधिक मौतें होती हैं। इसमें भी सबसे चिंताजनक बात यह है कि हर दस में से नौ मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। सबसे अधिक 5 साल के बच्चों से लेकर 29 साल के युवा मारे जाते हैं। 

डब्ल्यूएचओ डॉ. हान ट्रान ने कहा, इस नई नियमावली से नीति निर्माताओ को सुरक्षित प्रणाली बनाने में मदद मिलेगी। ताकि वर्ष 2030 तक सड़क हादसों से होने वाली मौतों की रोकथाम की जा सके। उन्होंने कहा कि खराब बुनियादी ढांचा, खासकर विकासशील देश में पैदल चलने वालों की मौत का मुख्य कारण बनता है। वह सड़कों पर सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं।


इसी तरह तेज स्पीड और जीवनरक्षक हेलमेट न पहनने के कारण साइकिल, स्कूटर और ई-बाइक चलाने वालों की मौतें होती हैं। विकासशील देशों में दोपहिया और तिपहिया वाहनों में लोगों के हेलमेट नहीं पहनने से सड़क हादसे जानलेवा बन जाते हैं। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।  
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