मुश्किल: स्वेज नहर में फंसा चीन से जा रहा विशालकाय कंटेनर शिप, समुद्र में लगा भीषण ट्रैफिक जाम
- जहाज फंसने से दुनिया के सबसे व्यस्त ट्रेड रूट स्वेज नहर पर जाम
- रास्ता खुलने तक एशिया और यूरोप के बीच ट्रेड रहेगा लगभग ठप
- हर घंटे हो रहा 2800 करोड़ रुपये अधिक का नुकसान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दुनिया के सबसे व्यस्त कारोबारी मार्ग स्वेज नहर में चीन से माल लेकर एक विशाल मालवाहक जहाज एवरग्रीन के फंस जाने से जाम लग गया है। पिछले 24 घंटे में अब तक सौ से ज्यादा जहाज जाम में फंसे हुए हैं। इससे हर घंटे 2800 करोड़ रुपये का नुक्सान हो रहा है। जाम खोलने में 5 से 7 दिन का समय लगने का अनुमान है। तब तक एशिया और यूरोप के बीच ज्यादातर ट्रेड लगभग ठप रहेगा।
बताया जा रहा है कि इस विशाल मालवाहक जहाज एवरग्रीन पर पनामा का झंडा लगा हुआ है। 193.3 किलोमीटर लंबी स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। मंगलवार सुबह स्वेज पोर्ट के उत्तर में नहर को पार करने के दौरान कंट्रोल खोने से यह जहाज स्वेज नहर में फंस गया। इसे निकालने के लिए बड़े पैमाने पर टग बोट्स (जहाजों को धक्का देने वाली ताकतवर बोट) को तैनात किया गया है। फिर भी आशंका जताई जा रही है कि इस कंटेनर शिप को यहां से निकालने में कई दिनों का समय लग सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एवरग्रीन जहाज के चालक दल ने बताया कि स्वेज नहर को पार करते समय आए हवा के एक तेज बवंडर के कारण उनका शिप घूम गया। बाद में जब उसे सीधा करने का प्रयास किया, तो जहाज ने नहर की चौड़ाई में घूमकर पूरे ट्रैफिक को ही बंद कर दिया। इस जहाज के पीछे एक और मालवाहक जहाज द मेर्सक डेनवर फंसा हुआ है। हालांकि, जहाज में सवार चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं।
लंबाई में एफिल टॉवर से भी बड़ा है फंसने वाला जहाज
स्वेज नहर में फंसा एवरग्रीन नामक जहाज 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा है। अगर इसको सीधा खड़ा कर दिया जाए, तो इसकी ऊंचाई एफिल टॉवर और एंपायर एस्टेट बिल्डिंग से भी ज्यादा होगी। शिप की मालिक जापान की सोई किसेन नामक कंपनी है, लेकिन इसे ताईवान के एवरग्रीन ग्रुप ने लीज पर लिया हुआ और वह ही इसे ऑपरेट कर रहा है। यह शिप चीन से नीदरलैंड्स के रोटरडम पोर्ट जा रहा था। बताया जा रहा है कि तेज हवा की वजह से एवरग्रीन नहर में फंस गया है।
समुद्र में लगा लंबा जाम, सप्लाई चेन पर पड़ रहा असर
इस शिप के फंसने से लाल सागर और भूमध्य सागर के किनारों पर बड़ी संख्या में जहाजों का जाम लगा हुआ है। इसी नहर के रास्ते हर दिन हजारों की संख्या में छोटे बड़े शिप यूरोप से एशिया और एशिया से यूरोप का सफर करते हैं। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो समुद्री जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाते हुए यूरोप तक जाना पड़ेगा। इस रास्ते में कम से कम दो हफ्ते का समय लगता है। समय के साथ-साथ इसमें खर्च भी अधिक आएगा। इसके साथ ही दुनिया भर की सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ेगा।
हर घंटे लग रही है 40 करोड़ डॉलर की चपत
जहाज के नहर में फंसने के चलते हर घंटे करीब 40 करोड़ डॉलर (लगभग 2800 करोड़ रुपये) की चपत लग रही है। बता दें कि दुनिया में जितना व्यापार होता है, उसका 12 प्रतिशत इसी नहर के जरिये किया जाता है। वर्ष 1869 में बनी यह नहर 193 किलोमीटर लंबी है और कुछ जगहों पर सिर्फ 205 मीटर तक चौड़ी है। ऐसे में इस विशालकाय शिप के फंसने के बाद बाकी जहाजों का आवागमन लगभग नामुमकिन हो गया है।