Sudan Conflict: सूडान में संकट गहराया, गृहयुद्ध और तेज होने की आशंका; दारफुर में आरएसएफ ने बनाई समानांतर सरकार
सूडान के दारफुर में आरएसएफ और उसके सहयोगियों ने कब्जे वाले इलाकों में समानांतर सरकार बनाई है। जनरल दागलो को संप्रभु परिषद का प्रमुख बनाया गया है। सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच यह कदम देश को दो हिस्सों में बांट सकता है। साथ ही गृहयुद्ध को और भी खतरनाक बना सकता है।
सूडान के दारफुर में आरएसएफ और उसके सहयोगियों ने कब्जे वाले इलाकों में समानांतर सरकार बनाई है। जनरल दागलो को संप्रभु परिषद का प्रमुख बनाया गया है। सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच यह कदम देश को दो हिस्सों में बांट सकता है। साथ ही गृहयुद्ध को और भी खतरनाक बना सकता है।
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सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच एक अलग और बड़े बदलाव होने की संभावना तेज हो गई है। कारण है कि कुख्यात अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (आरएसएफ) और इसके सहयोगियों ने देश के पश्चिमी हिस्से दारफुर में अपने कब्जे वाले इलाकों में एक समानांतर सरकार बनाने का एलान किया है। यह कदम देश में पहले से चल रहे गृहयुद्ध को और बढ़ा सकता है। एएसएफ की अगुवाई में बनी तासीस अलायंस ने अपने कमांडर जनरल मोहम्मद हमदान दागलो को इस नई सरकार के संप्रभु परिषद का प्रमुख घोषित किया है। यह परिषद 15 सदस्यों की है और इसे राज्य का प्रमुख माना जा रहा है।
बता दें कि आरएसएफ वही संगठन है जो पहले जांजावीद मिलिशिया के नाम से कुख्यात था। यह मिलिशिया 20 साल पहले पूर्व राष्ट्रपति उमर अल-बशीर ने दारफुर की जातीय आबादी के खिलाफ खड़ी की थी। उस समय जंजावीद पर बड़े पैमाने पर हत्या, बलात्कार और अत्याचार के आरोप लगे थे। ऐसे में अब फिर से चल रहे संघर्ष में आरएसएफ पर भी अत्याचारों और नरसंहार के आरोप लगे हैं। अमेरिका ने जनरल दागलो पर प्रतिबंध भी लगाए हैं और उन्हें नरसंहार का दोषी बताया है, हालांकि आरएसएफ ने इन आरोपों से इनकार किया है।
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नई सरकार में कुछ अन्य प्रमुख नियुक्तियां भी
अब बात अगर नई सरकार के अंतरगत होने वाली नियुक्तियों की करें तो इसके तहत प्रधानमंत्री के तौर पर मोहम्मद हसन अल-तायशी (पूर्व में 2019 के बाद की संयुक्त सैन्य-नागरिक सरकार में सदस्य) और उप-प्रमुख अब्दुलअजीज अल-हिलू (एपसीएलएम-एन विद्रोही गुट के नेता) को नियुक्त किया गया है। यह एलान दारफुर के शहर न्याला से वीडियो संदेश के जरिए किया गया, ये शहर अब पूरी तरह से आरएसएफ के कब्जे में है।
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सूडानी सरकार ने बताया फर्जी सरकार
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सूडानी सरकार ने इस नई आरएसएफ सरकार को फर्जी सरकार बताया है। साथ ही दुनियाभर के सामने ये आग्रह किया है कि वे इसके साथ कोई संपर्क न रखें। हालांकि मामले में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सूडान को लीबिया जैसी स्थिति की ओर ले जा सकता है, जहां दो समानांतर सरकारें बनी हुई हैं और वर्षों से संघर्ष जारी है। विपक्षी नेता यासिर अरमान ने भी चेतावनी दी है कि इससे देश में बंटवारा और हिंसा और बढ़ सकती है।