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क्या चीन के आगे झुक गया अमेरिका: शी जिनपिंग को मनाने के लिए क्यों मजबूर हुए जो बाइडन?

Fri, 10 Sep 2021 05:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 10 Sep 2021 05:04 PM IST
सार

चीन के बयान के मुताबिक बाइडन ने दो टूक कहा कि अमेरिका ने ‘वन चाइना पॉलिसी’ से हटने पर कभी विचार नहीं किया है। जबकि हाल में अमेरिकी नीति में जिस तरह ताइवान को अहमियत दी गई है, उससे चीन में यह शक गहराता गया है कि अमेरिका ताइवान को अलग और स्वतंत्र देश जैसी हैसियत दे रहा है...

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statement issued by China after the talks on Friday, says that these talks took place on the initiative of Biden
जो बाइडन और शी जिनपिंग - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की शुक्रवार सुबह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बातचीत ने नए कयासों को जन्म दिया है। राष्ट्रपति बनने के बाद बाइडन की नीति चीन से दूरी बनाए रखने की रही है। राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद उन्होंने शी से फोन पर लंबी बात की थी। लेकिन उसके सात महीने तक दोनों में कोई संवाद नहीं हुआ। शुक्रवार को हुई वार्ता के बाद चीन ने जो बयान जारी किया, उसमें इस बात का प्रमुखता से जिक्र किया गया कि ये बातचीत बाइडन की पहल पर हुई।

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बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों नेताओं ने ‘विस्तृत, रणनीतिक विचार-विमर्श’ किया। व्हाइट हाउस के मुताबिक बातचीत के दौरान बाइडन ने कहा कि ‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और दुनिया की शांति, स्थिरता और समृद्धि’ में अमेरिका का स्थायी हित है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को यह सुनिश्चित करना है कि उनके बीच जारी प्रतिस्पर्धा टकराव में ना बदल जाए।
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दूसरी तरफ चीन के बयान के मुताबिक बाइडन ने दो टूक कहा कि अमेरिका ने ‘वन चाइना पॉलिसी’ से हटने पर कभी विचार नहीं किया है। जबकि हाल में अमेरिकी नीति में जिस तरह ताइवान को अहमियत दी गई है, उससे चीन में यह शक गहराता गया है कि अमेरिका ताइवान को अलग और स्वतंत्र देश जैसी हैसियत दे रहा है। चीन के मुताबिक शी ने बाइडन के सामने कहा कि दोनों देशों में टकराव की स्थिति अमेरिका के रुख से पैदा हुई है।

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पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये बातें साफ करती हैं कि दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत में ज्यादा समय शिकवा-शिकायतें जताने और उन पर सफाई देने ही गुजरा। ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक बाइडन ने शी से मुलाकात का आग्रह एक खास वजह से किया। उनके मुताबिक व्हाइट हाउस के अधिकारी इस निष्कर्ष पर थे कि हाल में जिन चीनी अधिकारियों का अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क हुआ, वे कोई ‘गंभीर या ठोस’ बातचीत करने को लेकर अनिच्छुक थे। बताया जाता है कि बाइडन ने इस गतिरोध को तोड़ने की कोशिश में शी को फोन करने का फैसला किया।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार रह चुके और अब अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में एशियाई मामलों के विशेषज्ञ प्रोफसर इवान मेडियरोस ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि इस फोन वार्ता से दोनों राष्ट्रपति की निजी मुलाकात का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने कहा- ‘ऐसे आपसी होड़ वाले संबंध के बीच शिखर स्तर की कूटनीति एक जरूरी पहल है, ताकि प्रतिस्पर्धा को ठीक ढंग से संभाला जा सके। बाइडन और शी के बीच बातचीत हुए सात महीने गुजर चुके थे और ये सात महीने बेहद कठिन रहे हैं। अब समय आ गया जब दोनों नेता स्थितियों को अपने नियंत्रण में लें।’

लेकिन ये कई सवाल पूछा जा रहा है कि ये समय अब आया है, ऐसी समझ व्हाइट हाउस में क्यों बनी? विश्लेषकों ने संभावना जताई है कि अफगानिस्तान में बने प्रतिकूल हालात की वजह अमेरिका-चीन के साथ शिखर स्तर पर संपर्क बनाने को प्रेरित हुआ हो सकता है। अब ये साफ हो गया है कि तालिबान चीन की चिंताओं को दूर करते हुए अफगानिस्तान में उसे बड़ी भूमिका देने पर राजी हो गया है। उसने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़ने की इच्छा भी खुलेआम जता दी है। ऐसे में मुमकिन है वहां की घटनाओं को प्रभावित करने में बाइडन प्रशासन को चीन की उपयोगिता महसूस हुई हो।

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