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Starship: उड़ते ही विस्फोट फिर भी मस्क क्यों बता रहे स्टारशिप मिशन को सफल, स्पेसएक्स को क्या मिला, आगे क्या?
Fri, 21 Apr 2023 06:27 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 21 Apr 2023 06:27 PM IST
सार
स्पेसएक्स के स्टारशिप रॉकेट ने गुरुवार को अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरी। लॉन्चिंग के कुछ पल बाद ही इसमें विस्फोट हो गया। पूरे घटनाक्रम के बाद कंपनी के संस्थापक एलन मस्क ने कहा कि हमने बहुत कुछ सीखा है। इससे हमें आगे सफलता मिलेगी।
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स्टारशिप
- फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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स्पेसएक्स के बहुप्रतीक्षित मिशन स्टारशिप रॉकेट ने गुरुवार को अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरी। हालांकि, लॉन्चिंग के बाद ही इसमें विस्फोट हो गया। इससे पहले 17 अप्रैल को भी इसे लॉन्च करने की कोशिश की गई थी। इसके बाद प्रेशर वाल्व के फ्रीज होने की वजह से इसे रोकना पड़ा था। इस बीच, कंपनी के मालिक एलन मस्क ने कहा कि कुछ महीनों में अगले टेस्ट लॉन्च के लिए बहुत कुछ सीखा।
स्पेस एक्स का स्टारशिप मिशन कैसे टूटा? क्या थी योजना जिससे चूक गया मिशन? पहले कब होनी थी स्टारशिप सिस्टम की लॉन्चिंग? मिशन से हासिल क्या हुआ? आगे क्या होगा?
स्पेस एक्स का स्टारशिप मिशन कैसे टूटा? क्या थी योजना जिससे चूक गया मिशन? पहले कब होनी थी स्टारशिप सिस्टम की लॉन्चिंग? मिशन से हासिल क्या हुआ? आगे क्या होगा?
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स्टारशिप
- फोटो : SOCIAL MEDIA
स्पेसएक्स का स्टारशिप मिशन कैसे टूटा?
स्पेसएक्स के स्टारशिप रॉकेट ने गुरुवार को अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरी। लॉन्चिंग के कुछ पल बाद ही इसमें विस्फोट हो गया। दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ने शाम करीब सात बजे स्पेसएक्स के समुद्र तटीय स्टारबेस केंद्र से दक्षिण टेक्सास के खाड़ी तट पर बोका चिका बीच में से उड़ान भरी थी।
उड़ान भरने के लगभग तीन मिनट बाद 50 मीटर लंबे स्टारशिप को सुपर हेवी से अलग होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दोनों चरण जुड़े रहे और धुंआ उठना शुरू हो गया, अंततः सिस्टम में विस्फोट हो गया। स्पेसएक्स के लॉन्च वेबकास्ट के आंकड़ों के मुताबिक विशाल यान 39 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया था।
स्पेसएक्स के स्टारशिप रॉकेट ने गुरुवार को अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरी। लॉन्चिंग के कुछ पल बाद ही इसमें विस्फोट हो गया। दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ने शाम करीब सात बजे स्पेसएक्स के समुद्र तटीय स्टारबेस केंद्र से दक्षिण टेक्सास के खाड़ी तट पर बोका चिका बीच में से उड़ान भरी थी।
उड़ान भरने के लगभग तीन मिनट बाद 50 मीटर लंबे स्टारशिप को सुपर हेवी से अलग होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दोनों चरण जुड़े रहे और धुंआ उठना शुरू हो गया, अंततः सिस्टम में विस्फोट हो गया। स्पेसएक्स के लॉन्च वेबकास्ट के आंकड़ों के मुताबिक विशाल यान 39 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया था।
स्टारशिप
- फोटो : AMAR UJALA
क्या थी योजना जिससे चूक गया मिशन?
यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता है, तो सुपर हेवी बूस्टर लॉन्च के लगभग तीन मिनट बाद स्टारशिप से अलग हो जाता और मैक्सिको की खाड़ी में गिर जाता। वहीं, छह इंजनों वाले स्टारशिप को लगभग 150 मील की ऊंचाई तक उड़ना था। इसे प्रक्षेपण के लगभग 90 मिनट बाद पृथ्वी के निकट परिक्रमा को पूरा करना था।
यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता है, तो सुपर हेवी बूस्टर लॉन्च के लगभग तीन मिनट बाद स्टारशिप से अलग हो जाता और मैक्सिको की खाड़ी में गिर जाता। वहीं, छह इंजनों वाले स्टारशिप को लगभग 150 मील की ऊंचाई तक उड़ना था। इसे प्रक्षेपण के लगभग 90 मिनट बाद पृथ्वी के निकट परिक्रमा को पूरा करना था।
पहले कब होनी थी स्टारशिप सिस्टम की लॉन्चिंग?
विशालकाय रॉकेट को टेक्सास के बोका चिका में स्पेसएक्स स्पेसपोर्ट से 17 अप्रैल सुबह 8:00 बजे लांच करने के लिए निर्धारित किया गया था। 17 अप्रैल को इसे लॉन्च करने की कोशिश की गई थी। इसके बाद प्रेशर वाल्व के फ्रीज होने की वजह से इसे रोकना पड़ा था। जब ऐन वक्त पर इसे टाला गया तो रिजर्व समय यानी 20 अप्रैल के दिन इसकी लॉन्चिंग तय की गई।
विशालकाय रॉकेट को टेक्सास के बोका चिका में स्पेसएक्स स्पेसपोर्ट से 17 अप्रैल सुबह 8:00 बजे लांच करने के लिए निर्धारित किया गया था। 17 अप्रैल को इसे लॉन्च करने की कोशिश की गई थी। इसके बाद प्रेशर वाल्व के फ्रीज होने की वजह से इसे रोकना पड़ा था। जब ऐन वक्त पर इसे टाला गया तो रिजर्व समय यानी 20 अप्रैल के दिन इसकी लॉन्चिंग तय की गई।
एलन मस्क
- फोटो : ANI
तो मिशन से हासिल क्या हुआ?
सिस्टम में विस्फोट होने के बाद भी स्पेसएक्स कंपनी इसे अलग नजरिए से देख रही है। पूरे घटनाक्रम के बाद कंपनी के संस्थापक एलन मस्क ने कहा कि हमने बहुत कुछ सीखा है। इससे हमें आगे सफलता मिलेगी। आज का टेस्ट हमें स्टारशिप की विश्वसनीयता में सुधार करने में मदद करेगा। कंपनी के मालिक एलन मस्क ने टीम को बधाई भी दी।
मिशन की परीक्षण उड़ान के बाद नासा ने स्पेसएक्स को बधाई दी। नासा प्रशासक बिल नेल्सन ने एक ट्वीट में कहा, 'इतिहास भर में हर महान उपलब्धि ने कुछ स्तर के पहले से सोचे हुए जोखिम देखें हैं, क्योंकि बड़े जोखिम के साथ बड़ा इनाम मिलता है। अगली उड़ान परीक्षण के लिए और भविष्य के लिए स्पेसएक्स जो कुछ भी सीखा है, उसकी प्रतीक्षा में हूं।'
सिस्टम में विस्फोट होने के बाद भी स्पेसएक्स कंपनी इसे अलग नजरिए से देख रही है। पूरे घटनाक्रम के बाद कंपनी के संस्थापक एलन मस्क ने कहा कि हमने बहुत कुछ सीखा है। इससे हमें आगे सफलता मिलेगी। आज का टेस्ट हमें स्टारशिप की विश्वसनीयता में सुधार करने में मदद करेगा। कंपनी के मालिक एलन मस्क ने टीम को बधाई भी दी।
मिशन की परीक्षण उड़ान के बाद नासा ने स्पेसएक्स को बधाई दी। नासा प्रशासक बिल नेल्सन ने एक ट्वीट में कहा, 'इतिहास भर में हर महान उपलब्धि ने कुछ स्तर के पहले से सोचे हुए जोखिम देखें हैं, क्योंकि बड़े जोखिम के साथ बड़ा इनाम मिलता है। अगली उड़ान परीक्षण के लिए और भविष्य के लिए स्पेसएक्स जो कुछ भी सीखा है, उसकी प्रतीक्षा में हूं।'
स्टारशिप
- फोटो : SOCIAL MEDIA
आगे क्या होगा?
यह परीक्षण उड़ान एक बड़े मिशन का एक छोटा सा कदम थी। इससे पहले कि स्टारशिप अपना पहला मिशन या अंतरिक्ष यात्रियों को चन्द्रमा में भेज सके, स्पेसएक्स के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी प्रश्न हैं। नासा ने स्पेसएक्स के स्टारशिप को चंद्र लैंडर के रूप में काम करने का समर्थन किया है।
आर्टेमिस III अंतरिक्ष यात्रियों को एक दूसरे अंतरिक्ष यान से नीचे चंद्र सतह पर ले जाने के लिए मिशन हैं जो 2025 में भेजा जाएगा। इससे पहले, स्पेसएक्स के सामने स्टारशिप को चंद्रमा तक भेजकर अपनी क्षमता साबित करने का मौका होगा।
इस बीच, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जल्द ही फिर से स्टारशिप उड़ान भरेगा। कंपनी के पास स्टारबेस केंद्र में बनाने के लिए कई स्टारशिप यान हैं, और जैसे ही वे तैयार हो जाते हैं, कंपनी की योजना उनके उड़ान परीक्षण की है। यह मस्क की नीति को ध्यान में रखते हुए है, जो असफल होने वाले उड़ान परीक्षणों से मिले डेटा को भी प्राथमिकता देते हैं।
यह परीक्षण उड़ान एक बड़े मिशन का एक छोटा सा कदम थी। इससे पहले कि स्टारशिप अपना पहला मिशन या अंतरिक्ष यात्रियों को चन्द्रमा में भेज सके, स्पेसएक्स के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी प्रश्न हैं। नासा ने स्पेसएक्स के स्टारशिप को चंद्र लैंडर के रूप में काम करने का समर्थन किया है।
आर्टेमिस III अंतरिक्ष यात्रियों को एक दूसरे अंतरिक्ष यान से नीचे चंद्र सतह पर ले जाने के लिए मिशन हैं जो 2025 में भेजा जाएगा। इससे पहले, स्पेसएक्स के सामने स्टारशिप को चंद्रमा तक भेजकर अपनी क्षमता साबित करने का मौका होगा।
इस बीच, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जल्द ही फिर से स्टारशिप उड़ान भरेगा। कंपनी के पास स्टारबेस केंद्र में बनाने के लिए कई स्टारशिप यान हैं, और जैसे ही वे तैयार हो जाते हैं, कंपनी की योजना उनके उड़ान परीक्षण की है। यह मस्क की नीति को ध्यान में रखते हुए है, जो असफल होने वाले उड़ान परीक्षणों से मिले डेटा को भी प्राथमिकता देते हैं।
स्टारशिप
- फोटो : SOCIAL MEDIA
क्या है स्टारशिप रॉकेट?
स्पेसएक्स के स्टारशिप अंतरिक्ष यान और सुपर हेवी रॉकेट को सामूहिक रूप से स्टारशिप का नाम दिया गया है। स्टारशिप दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला अंतरिक्ष यान है जो क्रू और कार्गो दोनों को पृथ्वी की कक्षा, चंद्रमा, मंगल और उससे आगे ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह दुनिया का अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्च वाहन होगा। रॉकेट की ऊंचाई 120 मीटर और व्यास 9 मीटर है, जबकि इसकी पेलोड क्षमता 100 से 150 टन है।
स्पेसएक्स के स्टारशिप अंतरिक्ष यान और सुपर हेवी रॉकेट को सामूहिक रूप से स्टारशिप का नाम दिया गया है। स्टारशिप दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला अंतरिक्ष यान है जो क्रू और कार्गो दोनों को पृथ्वी की कक्षा, चंद्रमा, मंगल और उससे आगे ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह दुनिया का अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्च वाहन होगा। रॉकेट की ऊंचाई 120 मीटर और व्यास 9 मीटर है, जबकि इसकी पेलोड क्षमता 100 से 150 टन है।
स्टारशिप
- फोटो : SOCIAL MEDIA
इसके कितने चरण हैं?
सुपर हेवी: सुपर हेवी स्टारशिप लॉन्च सिस्टम का पहला चरण या बूस्टर है। सब-कूल्ड लिक्विड मीथेन (CH4) और लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) का उपयोग कर 33 रैप्टर इंजन द्वारा संचालित, सुपर हैवी पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल होने वाला रॉकेट है। यह पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करके लॉन्च साइट पर वापस उतर सकेगा। इसकी ऊंचाई 69 मीटर, व्यास 9 मीटर और प्रणोदक क्षमता 3,400 टन प्रति 7.5 एमएलबी है।
स्टारशिप: स्टारशिप अंतरिक्ष यान और स्टारशिप सिस्टम का दूसरा चरण है। यान में एकीकृत पेलोड सेक्शन है और चालक दल और कार्गो को पृथ्वी की कक्षा, चंद्रमा, मंगल और उससे आगे ले जाने में सक्षम है। स्टारशिप पृथ्वी पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में भी सक्षम है। इसके द्वारा एक घंटे या उससे भी कम समय में दुनिया में कहीं भी जाया जा सकता है।
स्टारशिप यान की ऊंचाई 50 मीटर, व्यास 9 मीटर और प्रणोदक क्षमता 1,200 टन प्रति 2.6 एमएलबी और पेलोड क्षमता 100 से 150 टन है।
रैप्टर इंजन: रैप्टर इंजन भी दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला मीथेन-ऑक्सीजन चरणबद्ध-दहन इंजन है। यह स्टारशिप सिस्टम को शक्ति प्रदान करता है और इसकी थ्रस्ट क्षमता फाल्कन 9 मर्लिन इंजन की दोगुना है। स्टारशिप छह इंजनों, तीन रैप्टर इंजनों और तीन रैप्टर वैक्यूम (RVac) इंजनों द्वारा संचालित होगा, जिन्हें अंतरिक्ष के निर्वात में उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। सुपर हेवी को 33 रैप्टर इंजन द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसमें 13 केंद्र में और बाकी 20 बूस्टर के पिछले छोर की परिधि के आसपास होंगे। इसका व्यास 1.3 मीटर है जबकि ऊंचाई 3.1 मीटर है।
सुपर हेवी: सुपर हेवी स्टारशिप लॉन्च सिस्टम का पहला चरण या बूस्टर है। सब-कूल्ड लिक्विड मीथेन (CH4) और लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) का उपयोग कर 33 रैप्टर इंजन द्वारा संचालित, सुपर हैवी पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल होने वाला रॉकेट है। यह पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करके लॉन्च साइट पर वापस उतर सकेगा। इसकी ऊंचाई 69 मीटर, व्यास 9 मीटर और प्रणोदक क्षमता 3,400 टन प्रति 7.5 एमएलबी है।
स्टारशिप: स्टारशिप अंतरिक्ष यान और स्टारशिप सिस्टम का दूसरा चरण है। यान में एकीकृत पेलोड सेक्शन है और चालक दल और कार्गो को पृथ्वी की कक्षा, चंद्रमा, मंगल और उससे आगे ले जाने में सक्षम है। स्टारशिप पृथ्वी पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में भी सक्षम है। इसके द्वारा एक घंटे या उससे भी कम समय में दुनिया में कहीं भी जाया जा सकता है।
स्टारशिप यान की ऊंचाई 50 मीटर, व्यास 9 मीटर और प्रणोदक क्षमता 1,200 टन प्रति 2.6 एमएलबी और पेलोड क्षमता 100 से 150 टन है।
रैप्टर इंजन: रैप्टर इंजन भी दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला मीथेन-ऑक्सीजन चरणबद्ध-दहन इंजन है। यह स्टारशिप सिस्टम को शक्ति प्रदान करता है और इसकी थ्रस्ट क्षमता फाल्कन 9 मर्लिन इंजन की दोगुना है। स्टारशिप छह इंजनों, तीन रैप्टर इंजनों और तीन रैप्टर वैक्यूम (RVac) इंजनों द्वारा संचालित होगा, जिन्हें अंतरिक्ष के निर्वात में उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। सुपर हेवी को 33 रैप्टर इंजन द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसमें 13 केंद्र में और बाकी 20 बूस्टर के पिछले छोर की परिधि के आसपास होंगे। इसका व्यास 1.3 मीटर है जबकि ऊंचाई 3.1 मीटर है।