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Sri Lanka Crisis: 123 दिनों बाद खत्म हुआ सरकार विरोधी आंदोलन, प्रदर्शन स्थल को खाली किया
Thu, 11 Aug 2022 02:50 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 11 Aug 2022 02:50 AM IST
सार
प्रदर्शनकारी समूह के प्रवक्ता मनोज नानायकारा ने कहा, "हमने आज सामूहिक रूप से गाले फेस विरोध स्थल को छोड़ने का फैसला किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा संघर्ष समाप्त हो गया है।"
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Sri Lanka Crisis
- फोटो : ANI
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विस्तार
श्रीलंका में तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे के खिलाफ शुरु हुआ आंदोलन 123 दिन बाद मंगलवार को समाप्त हो गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिस्टम में बदलाव आने तक उनका अभियान जारी रहेगा। बता दें कि श्रीलंका इस समय देश के इतिहास में अभूतपूर्व आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ 9 अप्रैल को प्रदर्शन स्थल गाले फेस पर प्रदर्शन शुरु किया था और 'गोटा गो होम' नारे के साथ इस अभियान को ब्रांड किया था।
प्रदर्शनकारी समूह के प्रवक्ता मनोज नानायकारा ने कहा, "हमने आज सामूहिक रूप से गाले फेस विरोध स्थल को छोड़ने का फैसला किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा संघर्ष समाप्त हो गया है।" एक अन्य कार्यकर्ता विदर्षण कन्नंगारा ने कहा, "हमने विरोध स्थल पर अभियान समाप्त कर दिया है लेकिन सिस्टम में बदलाव आने तक हमारा अभियान जारी रहेगा।"
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2014 तक राजपक्षे के कार्यकाल को पूरा करने के लिए संसद द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को चुने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों पर विरोध स्थल छोड़ने का दबाव आया। राष्ट्रपति बनने के बाद विक्रमसिंघे की ओर से सेना और पुलिस को प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया। फिर सेना और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाकर राष्ट्रपति भवन और राजभवन की इमारतों से खाली कराया था।
22 जुलाई को सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति सचिवालय से हटाया। प्रदर्शनकारियों ने 9 अप्रैल के बाद से गेट और राष्ट्रपति सचिवालय पर कब्जा किया हुआ था।
वहीं सरकार ने गिरफ्तारियों का बचाव करते हुए कहा था कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे अदालत के आदेशों की अवहेलना करने वाले थे या जबरन राज्य भवनों में घुसने वाले थे।
पुलिस ने पिछले हफ्ते प्रदर्शनकारियों को 5 अगस्त तक काले फेस को खाली करने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने आदेश की अवहेलना की और विरोध करने के अपने अधिकार का दावा करते हुए न्यायालय में रिट आवेदन दायर किए।हालांकि जब प्रदर्शनकारियों ने गाले फेस छोड़ने की घोषणा कि तो कहा कि उन्होंने अपने रिट आवेदन वापस ले लिए हैं।
पिछले महीने गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर मालदीव और फिर सिंगापुर भाग गए थे। इसके बाद 14 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर धावा बोला था और फिर कई प्रमुख सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया था। इससे पहले उनके भाई महिंदा राजपक्षे ने मई में प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दिया ता और परिवार के चार अन्य सदस्यों ने भी मंत्री पद छोड़ दिया था।
प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे परिवार पर कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के जरिए देश को संकट में डालने का आरोप लगाया। 9 अप्रैल को प्रमुख शहरों में छोटे-छोटे आंदोलन हुए जो बाद में एक जन आंदोलन में बदल गए।
पूर्व श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे अस्थायी रूप से थाइलैंड में रहेंगे: प्रधानमंत्री प्रयुत
थाइलैंड ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के देश में अस्थायी रूप से रहने पर सहमति जता दी है और इस दौरान राजपक्षे किसी तीसरे देश में स्थायी शरण मिलने की संभावनाएं तलाशेंगे। थाइलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओ-चा ने बुधवार को यह बात कही।
जुलाई में श्रीलंका में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच देश छोड़ने के बाद सिंगापुर में रह रहे राजपक्षे थाइलैंड में शरण चाह रहे हैं क्योंकि उनका सिंगापुर का वीजा बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहा है। वह 13 जुलाई को मालदीव पहुंचे थे और उसके बाद सिंगापुर गये जहां उन्होंने देश के आर्थिक संकट को लेकर प्रदर्शनों के बीच अपने इस्तीफे की घोषणा की।
थाइलैंड के प्रधानमंत्री ने मानवीयता के आधार पर 73 वर्षीय राजपक्षे को थाइलैंड यात्रा की अनुमति दी है और कहा कि उन्होंने किसी अन्य देश में स्थायी शरण की अपनी तलाश के दौरान इस देश में राजनीतिक गतिविधियां नहीं चलाने का वादा किया है।
प्रयुत के हवाले से बैंकॉक पोस्ट अखबार ने लिखा, ‘‘यह मानवीयता का मुद्दा है। हमने कहा है कि यह अस्थायी प्रवास है। कोई (राजनीतिक) गतिविधि की अनुमति नहीं है और इससे उन्हें शरण लेने के लिए किसी देश की खोज में मदद मिलेगी।’’
खबर के अनुसार विदेश मंत्री डी प्रमुद्विनाई ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे थाइलैंड में 90 दिन तक रह सकते हैं क्योंकि वह अब भी राजनयिक पासपोर्ट धारक हैं।
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प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ 9 अप्रैल को प्रदर्शन स्थल गाले फेस पर प्रदर्शन शुरु किया था और 'गोटा गो होम' नारे के साथ इस अभियान को ब्रांड किया था।
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प्रदर्शनकारी समूह के प्रवक्ता मनोज नानायकारा ने कहा, "हमने आज सामूहिक रूप से गाले फेस विरोध स्थल को छोड़ने का फैसला किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा संघर्ष समाप्त हो गया है।" एक अन्य कार्यकर्ता विदर्षण कन्नंगारा ने कहा, "हमने विरोध स्थल पर अभियान समाप्त कर दिया है लेकिन सिस्टम में बदलाव आने तक हमारा अभियान जारी रहेगा।"
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2014 तक राजपक्षे के कार्यकाल को पूरा करने के लिए संसद द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को चुने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों पर विरोध स्थल छोड़ने का दबाव आया। राष्ट्रपति बनने के बाद विक्रमसिंघे की ओर से सेना और पुलिस को प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया। फिर सेना और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाकर राष्ट्रपति भवन और राजभवन की इमारतों से खाली कराया था।
22 जुलाई को सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति सचिवालय से हटाया। प्रदर्शनकारियों ने 9 अप्रैल के बाद से गेट और राष्ट्रपति सचिवालय पर कब्जा किया हुआ था।
वहीं सरकार ने गिरफ्तारियों का बचाव करते हुए कहा था कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे अदालत के आदेशों की अवहेलना करने वाले थे या जबरन राज्य भवनों में घुसने वाले थे।
पुलिस ने पिछले हफ्ते प्रदर्शनकारियों को 5 अगस्त तक काले फेस को खाली करने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने आदेश की अवहेलना की और विरोध करने के अपने अधिकार का दावा करते हुए न्यायालय में रिट आवेदन दायर किए।हालांकि जब प्रदर्शनकारियों ने गाले फेस छोड़ने की घोषणा कि तो कहा कि उन्होंने अपने रिट आवेदन वापस ले लिए हैं।
पिछले महीने गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर मालदीव और फिर सिंगापुर भाग गए थे। इसके बाद 14 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर धावा बोला था और फिर कई प्रमुख सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया था। इससे पहले उनके भाई महिंदा राजपक्षे ने मई में प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दिया ता और परिवार के चार अन्य सदस्यों ने भी मंत्री पद छोड़ दिया था।
प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे परिवार पर कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के जरिए देश को संकट में डालने का आरोप लगाया। 9 अप्रैल को प्रमुख शहरों में छोटे-छोटे आंदोलन हुए जो बाद में एक जन आंदोलन में बदल गए।
पूर्व श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे अस्थायी रूप से थाइलैंड में रहेंगे: प्रधानमंत्री प्रयुत
थाइलैंड ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के देश में अस्थायी रूप से रहने पर सहमति जता दी है और इस दौरान राजपक्षे किसी तीसरे देश में स्थायी शरण मिलने की संभावनाएं तलाशेंगे। थाइलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओ-चा ने बुधवार को यह बात कही।
जुलाई में श्रीलंका में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच देश छोड़ने के बाद सिंगापुर में रह रहे राजपक्षे थाइलैंड में शरण चाह रहे हैं क्योंकि उनका सिंगापुर का वीजा बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहा है। वह 13 जुलाई को मालदीव पहुंचे थे और उसके बाद सिंगापुर गये जहां उन्होंने देश के आर्थिक संकट को लेकर प्रदर्शनों के बीच अपने इस्तीफे की घोषणा की।
थाइलैंड के प्रधानमंत्री ने मानवीयता के आधार पर 73 वर्षीय राजपक्षे को थाइलैंड यात्रा की अनुमति दी है और कहा कि उन्होंने किसी अन्य देश में स्थायी शरण की अपनी तलाश के दौरान इस देश में राजनीतिक गतिविधियां नहीं चलाने का वादा किया है।
प्रयुत के हवाले से बैंकॉक पोस्ट अखबार ने लिखा, ‘‘यह मानवीयता का मुद्दा है। हमने कहा है कि यह अस्थायी प्रवास है। कोई (राजनीतिक) गतिविधि की अनुमति नहीं है और इससे उन्हें शरण लेने के लिए किसी देश की खोज में मदद मिलेगी।’’
खबर के अनुसार विदेश मंत्री डी प्रमुद्विनाई ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे थाइलैंड में 90 दिन तक रह सकते हैं क्योंकि वह अब भी राजनयिक पासपोर्ट धारक हैं।