श्रीलंका: ग्रीन खेती पर भ्रम बढ़ा, राष्ट्रपति ने दोहराया- सिर्फ ऑर्गेनिक खाद की ही इजाजत
राष्ट्रपति ने कृषि संबंधी एक बैठक में कहा कि अब सरकार सिर्फ ऑर्गेनिक खाद वितरित करेगी और सिर्फ ऑर्गेनिक खेती के लिए सब्सिडी देगी। इसके लिए किसानों को शिक्षित किया जाएगा। राजपक्षे ने कहा कि इस नीति को लागू करते समय इस बात को स्वीकार करना जरूरी है कि देश में एक केमिकल फर्टिलाइजर माफिया है, जो सरकार की नीति को नाकाम करने की कोशिश कर रहा है...
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श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे ने इन खबरों का खंडन किया है कि देश को पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती की तरफ ले जाने की नीति उनकी सरकार ने छोड़ दी है। उन्होंने कहा है कि श्रीलंका की कृषि नीति में अब सिर्फ ग्रीन खेती के लिए ही जगह है, जिसके तहत सिर्फ ऑर्गेनिक खाद का ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने कृषि संबंधी एक बैठक में कहा कि अब सरकार सिर्फ ऑर्गेनिक खाद वितरित करेगी और सिर्फ ऑर्गेनिक खेती के लिए सब्सिडी देगी। इसके लिए किसानों को शिक्षित किया जाएगा। राजपक्षे ने कहा कि इस नीति को लागू करते समय इस बात को स्वीकार करना जरूरी है कि देश में एक केमिकल फर्टिलाइजर माफिया है, जो सरकार की नीति को नाकाम करने की कोशिश कर रहा है।
बिना तैयारी लागू की ग्रीन खेती की नीति
श्रीलंका में राजपक्षे सरकार की नई कृषि नीति के कारण लोगों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। ऑर्गेनिक खाद के वितरण में देर होने के कारण सीजन शुरू होने के बावजूद कई जगहों पर फसलों बुवाई शुरू नहीं हो पाई है। पिछले दिनों देश में खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से चढ़ी थीं। कई जगहों पर जरूरी अनाज की कमी देखने को भी मिली है। आलोचकों ने इसके लिए सरकार को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि राजपक्षे सरकार बिना पूरी तैयारी के ग्रीन खेती की नीति लागू कर दी।
अब सरकार ने दावा किया है कि देश में कुल कृषि योग्य भूमि के 70 फीसदी हिस्से में जताई और बुवाई का काम शुरू हो गया है। श्रीलंका दुनिया में ऐसा पहला देश बना है, जिसने पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती को अपनाने का फैसला किया। लेकिन रविवार को ये खबर आई थी कि सरकार ने इस नीति को छोड़ने का फैसला किया है। इस खबर में कहा गया कि सरकार ने केमिकल कीटनाशक और खेती में काम वाली दूसरी चीजों के आयात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया गया है।
उर्वरक के आयात से हटाया प्रतिबंध
पिछले महीने श्रीलंका सरकार ने चाय की खेती में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक के आयात पर से प्रतिबंध हटा लिया था। चाय श्रीलंका का प्रमुख निर्यात है, जिससे उसे सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। राजपक्षे सरकार की ग्रीन खेती की नीति से जो क्षेत्र प्रभावित हुए, उनमें चाय बगान भी थे। रविवार को श्रीलंका के टीवी चैनल न्यूज फर्स्ट ने कृषि मंत्रालय के हवाले से कहा कि अब उन सभी उर्वरकों के आयात की इजाजत दी जाएगी, जिनकी देश में तुरंत जरूरत है। चैनल से मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा- ‘खाद्य सुरक्षा की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिया गया है।’
लेकिन उसके एक दिन बाद राष्ट्रपति राजपक्षे ने अलग बातें कहीं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे देश में भ्रामक स्थिति बन गई है। इससे श्रीलंका आर्थिक संकट और गहरा सकता है, जिसकी वजह से लोग पहले से ही परेशान हैं। श्रीलंका सरकार ने पूर्णतया ऑर्गेनिक खेती की नीति लागू करने का एलान इस साल मई में किया था।
पिछले हफ्ते चावल, सब्जियों, और अन्य खाद्य पदार्थों की महंगाई और बढ़ गई। सुपर मार्केट्स में चावल की बिक्री की सीमा तय कर दी गई। इसके तहत एक खरीदार को सिर्फ पांच किलो चावल बेचने की नीति लागू की गई। बीते शुक्रवार को किसान संगठनों ने इस सरकारी नीति के विरोध में संसद तक मार्च करने का एलान किया था। इसके बाद कृषि मंत्रालय का बयान आया। लेकिन राष्ट्रपति ने उसका खंडन कर दिया है।