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Sri Lanka: 2011 के मामले में गोटबाया होंगे अदालत में पेश! श्रीलंकाई शीर्ष कोर्ट ने समन जारी करने का दिया आदेश
Wed, 19 Oct 2022 05:48 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 19 Oct 2022 05:48 PM IST
सार
मामले में जब इससे पहले जब 2018 में राजपक्षे को अदालत में पेश होने के लिए बुलाया गया था तब उन्होंने अपील दाखिल कर कहा था कि अगर अदालत में पेश होने के लिए उन्हें जाफना जाना पड़ा तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया गया था। तब वे संवैधानिक छूट के नाते बच गए थे।
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श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे। (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब 2011 के मानवाधिकार उल्लंघन मामले में श्रीलंका की सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व राष्ट्रपति को समन जारी करने का आदेश दिया है। श्रीलंका की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को अधिकारियों को इस बाबत निर्देशित किया। अदालत ने कहा है कि उन्हें इस मामले में अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया जाए। बता दें कि अब उन्हें संवैधानिक छूट से वंचित कर दिया गया है।
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अदालत के निर्देशों के बाद अब 73 वर्षीय राजपक्षे को जाफना के उत्तरी जिले में दो मानवाधिकार कार्यकर्ता ललित वीरराज और कुगन मुरुगनाथन के लापता होने पर दर्ज मामले में सबूत पेश करना होगा।
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ये मामला करीबन 12 साल पहले का है, जब, द्वीप राष्ट्र में लंबे समय से चले गृह युद्ध की समाप्ति के बाद गोटबाया राजपक्षे रक्षा मंत्रालय के रसूखदार अधिकारी थे। तब उनके खिलाफ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अपहरण में संलिप्त होने का आरोप लगा था। आरोप थे कि वे अपहरण करने वाले गैंग की देख-रेख कर रहे हैं और उन्हें सह दे रहे हैं। हालांकि गोटबाया राजपक्षे इसे लेकर खुद को निरपराध बताते रहे हैं।
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इस मामले में जब इससे पहले जब 2018 में राजपक्षे को अदालत में पेश होने के लिए बुलाया गया था तब उन्होंने अपील दाखिल कर कहा था कि अगर अदालत में पेश होने के लिए उन्हें जाफना जाना पड़ा तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया गया था। तब वे संवैधानिक छूट के नाते बच गए थे। तब उनकी अपील पर अदालत ने फैसला सुनाया कि राजपक्षे को अदालत में नहीं बुलाया जा सकता क्योंकि वह तब तक राष्ट्रपति चुन लिए गए थे।
लेकिन, अब जबकि वह राष्ट्रपति पद पर आसीन नहीं हैं और उन्हें कोई भी कानूनी छूट नहीं मिल रही है, ऐसे में श्रीलंका की सर्वोच्च अदालत ने उन्हें 15 दिसंबर को पेश होने के लिए समन जारी करने का फैसला किया है।