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Sri Lanka: श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट ने दिसानायके सरकार को भेजा नोटिस, डिजिटल आईडी परियोजना से जुड़ा है मामला
Wed, 27 Aug 2025 05:49 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 27 Aug 2025 05:49 PM IST
सार
श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और उनकी कैबिनेट को श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट से नोटिस मिला है। बता दें कि ये नोटिस भारत की मदद से चल रही श्रीलंका यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी (एसएल-यूडीआई) परियोजना को लेकर दाखिल एक याचिका पर जारी किया गया है।
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श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट ने दिसानायके सरकार को भेजा नोटिस
- फोटो : ANI / Freepik
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विस्तार
श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और पूरे मंत्रिमंडल को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भारत की मदद से चल रही श्रीलंका यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी (एसएल-यूडीआई) परियोजना को लेकर दाखिल एक याचिका पर जारी किया गया है। यह याचिका पूर्व मंत्री विमल वीरेवांसा ने दाखिल की थी। उनका कहना है कि सरकार का यह फैसला लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। साथ ही, इस परियोजना पर न तो संसद को और न ही आम जनता को ठीक से जानकारी दी गई।
यह भी पढ़ें - Denmark: डेनमार्क ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलब, गोपनीय तरीके से दखलंदाजी की रिपोर्ट के बाद उठाया कदम
अप्रैल महीने में एमओयू पर किया गया था हस्ताक्षर
बता दें कि इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलंबो यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत भारत के बड़े डिजिटल समाधान श्रीलंका को उपलब्ध कराए जाने हैं, ताकि देश में डिजिटल बदलाव की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
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क्या है एसएल-यूडीआई परियोजना का उद्देश्य?
इस परियोजना का उद्देश्य हर नागरिक को एक सुरक्षित डिजिटल पहचान पत्र देना है, जो भारत के आधार कार्ड की तरह होगा। इसे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और श्रीलंका के डिजिटल इकोनॉमी मंत्रालय के सहयोग से लागू किया जा रहा है। यह पूरी तरह से भारत की तरफ से दिए गए अनुदान से वित्तपोषित है।
याचिकाकर्ता का दावा- कैबिनेट ने फैसलों में किया बदलाव
लेकिन याचिकाकर्ता विमल वीरेवांसा का आरोप है कि 2022 में भारत के साथ हुआ मूल समझौता श्रीलंका की कैबिनेट ने इस साल जनवरी और जून में किए फैसलों के बाद बदल दिया। इन बदलावों के चलते भारत को परियोजना की मुख्य तकनीकी संरचना पर नियंत्रण मिल गया है। इसमें मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर (एमएसआई) और बायोमेट्रिक डाटाबेस सॉफ्टवेयर (एमओएसआईपी) जैसे अहम हिस्से शामिल हैं।
यह भी पढ़ें - Israel-Syria Conflict: सीरिया की राजधानी दमिश्क में इस्राइली ड्रोन से भीषण हमला; छह सीरियाई सैनिकों की मौत
परियोजना को श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरा
उनका कहना है कि यह परियोजना श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, क्योंकि नागरिकों का बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत डाटा विदेशी कंपनियों या एजेंसियों के पास जा सकता है। और इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को तय की है।
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अप्रैल महीने में एमओयू पर किया गया था हस्ताक्षर
बता दें कि इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलंबो यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत भारत के बड़े डिजिटल समाधान श्रीलंका को उपलब्ध कराए जाने हैं, ताकि देश में डिजिटल बदलाव की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
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क्या है एसएल-यूडीआई परियोजना का उद्देश्य?
इस परियोजना का उद्देश्य हर नागरिक को एक सुरक्षित डिजिटल पहचान पत्र देना है, जो भारत के आधार कार्ड की तरह होगा। इसे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और श्रीलंका के डिजिटल इकोनॉमी मंत्रालय के सहयोग से लागू किया जा रहा है। यह पूरी तरह से भारत की तरफ से दिए गए अनुदान से वित्तपोषित है।
याचिकाकर्ता का दावा- कैबिनेट ने फैसलों में किया बदलाव
लेकिन याचिकाकर्ता विमल वीरेवांसा का आरोप है कि 2022 में भारत के साथ हुआ मूल समझौता श्रीलंका की कैबिनेट ने इस साल जनवरी और जून में किए फैसलों के बाद बदल दिया। इन बदलावों के चलते भारत को परियोजना की मुख्य तकनीकी संरचना पर नियंत्रण मिल गया है। इसमें मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर (एमएसआई) और बायोमेट्रिक डाटाबेस सॉफ्टवेयर (एमओएसआईपी) जैसे अहम हिस्से शामिल हैं।
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परियोजना को श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरा
उनका कहना है कि यह परियोजना श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, क्योंकि नागरिकों का बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत डाटा विदेशी कंपनियों या एजेंसियों के पास जा सकता है। और इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को तय की है।