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SL: लिट्टे से संघर्ष में जबरन गायब किए गए लोगों को लेकर सवाल पर भड़का श्रीलंका, UN की रिपोर्ट पर जताई नाराजगी

Sun, 19 May 2024 02:09 PM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: काव्या मिश्रा Updated Sun, 19 May 2024 02:09 PM IST
सार

ओएचसीएचआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका सरकार को उन हजारों लोगों के बारे में खुलासा करने के लिए सार्थक कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्हें दशकों से जबरन गायब किया गया है।

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Sri Lanka questions United Nations rights report on enforced disappearances
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (ओएचसीएचआर) - फोटो : एक्स

विस्तार

श्रीलंका ने इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (ओएचसीएचआर) के कार्यालय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के समय और अधिदेश पर सवाल उठाया है। दरअसल, रिपोर्ट में देश की सरकार से लिट्टे के साथ सशस्त्र संघर्ष के दौरान जबरन गायब किए गए लोगों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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यूएन की रिपोर्ट में क्या?
शुक्रवार को जारी ओएचसीएचआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका सरकार को उन हजारों लोगों के बारे में खुलासा करने के लिए सार्थक कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्हें दशकों से जबरन गायब किया गया है। साथ ही इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाने को भी कहा है। 
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श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, मंत्रालय आधिकारिक तौर पर ओएचसीएचआर को रिपोर्ट जारी करने की एकतरफा कार्रवाई और विशेष रूप से इसके समय को लेकर सवाल उठाएगा। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त को एक पत्र लिखा जाएगा। 
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श्रीलंका समय को लेकर नाराज
तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 18 मई, 2009 को 26 साल के युद्ध की समाप्ति की घोषणा की थी, जिसमें 100,000 से अधिक लोग मारे गए थे और लाखों श्रीलंकाई, मुख्य रूप से अल्पसंख्यक तमिल, देश और विदेश में शरणार्थी के रूप में विस्थापित हुए थे। श्रीलंका इसलिए समय को लेकर नाराज है क्योंकि लड़ाई के दौरान मारे गए लोगों की श्रद्धांजलि देने की योजना से एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र ने कार्रवाई करने को कहा।  

शनिवार को हुए कार्यक्रम
18 मई यानी शनिवार को श्रीलंका के तमिल बहुल उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में प्रतिबंधित लिट्टे की अंतिम लड़ाई की 15वीं वर्षगांठ मनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस आंशका के बावजूद कि सरकारी सेना लिट्टे को आतंकवादी संगठन घोषित करने का हवाला देते हुए उन पर कार्रवाई करेगी।


1983 में शुरू हुआ था गृहयुद्ध
तमिल समूहों ने दावा किया कि अंतिम लड़ाई के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए थे। यह गृहयुद्ध 1983 में शुरू हुआ और करीब तीन दशकों के बाद सेना द्वारा 2009 में लिट्टे के प्रमुख नेताओं को मारे जाने के साथ खत्म हुआ। बाद में 18 मई 2009 को लिब्रेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण के बारे में श्रीलंकाई सेना ने 2009 में एक आर्मी ऑपरेशन के दौरान मारे जाने की बात कही गई थी। 

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