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श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने अपने पद से दिया इस्तीफा
Fri, 14 Dec 2018 05:13 PM IST
Avdhesh Kumar
भाषा, कोलंबो
भाषा, कोलंबो
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 14 Dec 2018 05:13 PM IST
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Mahinda Rajapaksa
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श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जबकि रानिल विक्रमसिंघे के पीएम बनने का रास्ता अभी भी साफ नहीं दिख रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि वह उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे। बता दें कि विक्रामसिंघे के संसद में बहुत साबित कर देने के बाद उनका पद छोड़ना तय माना जा रहा था।
बता दें कि इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा कि सोमवार तक वह नए प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल का चयन कर लेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वह रानिल विक्रमसिंघे को कभी भी पुन: नियुक्त नहीं करेंगे। गौरतलब है कि विक्रमसिंघे को पद से हटाने के बाद देश में अभूतपूर्व राजनीतिक संकट पैदा हो गया था।
बृहस्पतिवार को श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि सिरिसेना का संसद को भंग करना ‘‘गैरकानूनी’’ था। इस फैसले के बाद, कल रात राष्ट्रपति कार्यालय में सिरिसेना की अध्यक्षता में यूनाइटेड पीपल्स फ्रंट अलायंस की विशेष बैठक हुई।
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कोलंबो पेज के मुताबिक महिंदा राजपक्षे भी बैठक में शामिल हुए। विक्रमसिंघे को हटाने के बाद सिरिसेना ने राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाया था। सिरिसेना ने बैठक में कहा कि संसद भंग करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को वह स्वीकार करेंगे लेकिन विक्रमसिंघे के साथ कभी शासन नहीं करेंगे।
सिरिसेना ने 26 अक्टूबर को विक्रमसिंघे को हटाकर राजपक्षे को प्रधानमंत्री बना दिया था लेकिन इससे देश में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था। बाद में उन्होंने 225 सदस्यीय संसद को भंग कर दिया था और पांच जनवरी को चुनाव कराने की बात कही थी।
बुधवार को विक्रमसिंघे ने संसद में बहुमत साबित कर दिया था जबकि राजपक्षे अब तक ऐसा करने में विफल रहे हैं। संसद भंग करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 13 याचिकाएं डाली गई थीं।
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बता दें कि इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा कि सोमवार तक वह नए प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल का चयन कर लेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वह रानिल विक्रमसिंघे को कभी भी पुन: नियुक्त नहीं करेंगे। गौरतलब है कि विक्रमसिंघे को पद से हटाने के बाद देश में अभूतपूर्व राजनीतिक संकट पैदा हो गया था।
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बृहस्पतिवार को श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि सिरिसेना का संसद को भंग करना ‘‘गैरकानूनी’’ था। इस फैसले के बाद, कल रात राष्ट्रपति कार्यालय में सिरिसेना की अध्यक्षता में यूनाइटेड पीपल्स फ्रंट अलायंस की विशेष बैठक हुई।
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कोलंबो पेज के मुताबिक महिंदा राजपक्षे भी बैठक में शामिल हुए। विक्रमसिंघे को हटाने के बाद सिरिसेना ने राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाया था। सिरिसेना ने बैठक में कहा कि संसद भंग करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को वह स्वीकार करेंगे लेकिन विक्रमसिंघे के साथ कभी शासन नहीं करेंगे।
सिरिसेना ने 26 अक्टूबर को विक्रमसिंघे को हटाकर राजपक्षे को प्रधानमंत्री बना दिया था लेकिन इससे देश में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था। बाद में उन्होंने 225 सदस्यीय संसद को भंग कर दिया था और पांच जनवरी को चुनाव कराने की बात कही थी।
बुधवार को विक्रमसिंघे ने संसद में बहुमत साबित कर दिया था जबकि राजपक्षे अब तक ऐसा करने में विफल रहे हैं। संसद भंग करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 13 याचिकाएं डाली गई थीं।