श्रीलंका: राष्ट्रपति विक्रमसिंघे का तमिलों से समर्थन का आह्वान, भारत ने समर्पित किया जाफना सांस्कृतिक केंद्र
जाफना में राज्य के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने उम्मीद जताई कि भारत, त्रिंकोमाली के पूर्वी बंदरगाह के विकास में योगदान देगा।
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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने शनिवार को कहा कि वह श्रीलंका के जातीय मुद्दे के समाधान के रूप में एकात्मक राज्य के भीतर सत्ता के हस्तांतरण के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने संघर्ष प्रभावित उत्तरी क्षेत्र के विकास में तमिल प्रवासियों की भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया।
जाफना में राज्य के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने उम्मीद जताई कि भारत, त्रिंकोमाली के पूर्वी बंदरगाह के विकास में योगदान देगा। विक्रमसिंघे ने कहा, हमें आर्थिक विकास कार्यक्रमों के साथ-साथ उत्तर के लिए प्रमुख विकास कार्यक्रम शुरू करने होंगे। युद्ध ने उत्तरी अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि युद्ध समाप्त होने के 14 साल बाद, जो विकास हुआ है वह पर्याप्त नहीं है। श्रीलंका ने 1983 से 2009 तक गृह युद्ध का सामना किया है।
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के नेतृत्व में द्वीप राष्ट्र के उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में एक अलग तमिल मातृभूमि स्थापित करने के लिए अभियान चला था। लेकिन 18 मई 2009 को इसके सुप्रीमो वेलुपिल्लई की हत्या के बाद यह समाप्त हो गया। तमिलों का आरोप है कि युद्ध के अंतिम चरण के दौरान हजारों लोगों का नरसंहार किया गया था। हालांकि श्रीलंकाई सेना ने इस आरोप से इनकार किया है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, गृह युद्ध के अंतिम महीनों में कम से कम 40,000 तमिल नागरिक मारे गए होंगे।
विक्रमसिंघे ने कहा कि वह उत्तरी क्षेत्र के विकास में तमिल प्रवासियों के जुड़ाव को लेकर आशान्वित हैं। उन्होंने कहा कि वह एकात्मक राज्य अवधारणा के तहत उत्तरी क्षेत्र को ज्यादा से ज्यादा शक्ति हस्तांतरित करने के लिए तैयार हैं। राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने देश में अल्पसंख्यक तमिलों को राजनीतिक स्वायत्तता प्रदान करने के लिए संविधान में भारत प्रायोजित 13वें संशोधन को पूरी तरह से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत 13A को लागू करने के लिए श्रीलंका पर दबाव बनाता रहा है जिसे 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद लाया गया था। सिंहली, ज्यादातर बौद्ध, श्रीलंका की 75 मिलियन आबादी का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा हैं, जबकि तमिल 15 प्रतिशत हैं।
विक्रमसिंघे की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब संविधान के 13वें संशोधन को पूरी तरह लागू करने के खिलाफ शक्तिशाली बौद्ध भिक्षुओं ने इस सप्ताह विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। उन्होंने इस कदम को उत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में एक तमिल देश की ओर ले जाने और देश को अलग करने की दिशा में पहला कदम बताया।
बुधवार को संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा कि देश का कोई विभाजन नहीं होगा, जो बौद्ध पादरियों के कुछ वर्गों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं के विपरीत है। 1948 में देश ने ब्रिटेन से अपनी आजादी हासिल की थी। तबसे बहुसंख्यक कट्टरपंथी बौद्ध पादरी अल्पसंख्यकों के साथ सुलह के प्रयासों को विफल कर रहे हैं।
भारत ने श्रीलंका को समर्पित किया जाफना सांस्कृतिक केंद्र
दूसरी ओर, भारत ने आज श्रीलंका के लोगों को अत्याधुनिक जाफना सांस्कृतिक केंद्र समर्पित किया। जाफना सांस्कृतिक केंद्र को भारत की मदद से बनाया गया है। यह द्विपक्षीय विकास साझेदारी का एक शानदार उदाहरण है। इस केंद्र की आधारशिला मार्च 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। शनिवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद इसे द्वीप राष्ट्र के लोगों को समर्पित कर दिया गया। इसमें श्रीलंकाई संस्कृति की विविधता और समृद्धि को पेश किया गया है।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन इस कार्यक्रम में मौजूद थे। मुरुगन चार दिवसीय श्रीलंका दौरे पर हैं। भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट किया, ''प्रतिष्ठित जाफना सांस्कृतिक केंद्र आज राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, मंत्री एल. मुरुगन, उच्चायुक्त, मंत्री विदुर विक्रमनायके, डगलस देवानंद, कादर मस्थान समेत कई सांसदों और सभी क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी मौजूदगी में लोगों को समर्पित किया गया।