Sri Lanka Crisis: राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने किया संसद सत्र के समापन का एलान, जानें अब आगे क्या होगा?
Sri Lanka: सत्रावसान का मतलब है कि सदन के समक्ष सभी मौजूदा कार्य निलंबित हैं और उस समय लंबित सभी कार्यवाही महाभियोग को छोड़कर रद्द कर दी गई है। संसद के सत्रावसान के दौरान विशेष प्रयोजन के लिए समितियां काम करना बंद कर देती हैं
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श्रीलंका (Sri Lanka) के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे (Ranil Wickremesinghe) ने गुरुवार को आधी रात से संसद सत्र के समापन (सत्रावसान) की घोषणा की है। गुरुवार शाम जारी सरकारी गजट के अनुसार, अगला सत्र तीन अगस्त, 2022 को सुबह 10:30 बजे शुरू होगा। सत्रावसान का मतलब है कि सदन के समक्ष सभी मौजूदा कार्य निलंबित हैं और उस समय लंबित सभी कार्यवाही महाभियोग को छोड़कर रद्द कर दी गई है।
संसद के सत्रावसान के दौरान विशेष प्रयोजन के लिए समितियां काम करना बंद कर देती हैं और संसद के उच्च पदों, क्षेत्रीय निरीक्षण समितियों और चयन समितियों की समिति को छोड़कर संसद के प्रत्येक सत्र के प्रारंभ में उन सभी का पुनर्गठन किया जाना है।
सत्रावसान के दौरान अध्यक्ष कार्य करना जारी रखता है और सांसद अपनी सदस्यता बरकरार रखते हैं, भले ही वे संसद की बैठकों में शामिल नहीं होते हैं। विक्रमसिंघे को 20 जुलाई को सांसदों द्वारा राष्ट्रपति चुना गया था,1978 के बाद ऐसा पहला अवसर है।
श्रीलंका को संकट से निकाल कर फिर पटरी पर लाना चुनौती
73 वर्षीय विक्रमसिंघे को श्रीलंका के प्रधान न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई थी। श्रीलंका भयावह आर्थिक संकट से जूझ रहा है। विक्रमसिंघे के सामने सबसे बड़ी चुनौती और अग्नि परीक्षा देश को इस संकट से निकाल कर फिर पटरी पर लाना है।
गोतबाया राजपक्षे के देश छोड़कर भागने और फिर इस्तीफा देने के बाद विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। देश के संविधान के अनुसार संसद द्वारा चुने जाने वाले वे पहले श्रीलंकाई राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले स्वर्गीय डी बी विजेतुंगा मई 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदासा के निधन के बाद निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।
ऐतिहासिक संकट से जूझ रहा श्रीलंका
गलत आर्थिक नीतियों और कमजोर नेतृत्व के कारण श्रीलंका इन दिनों ऐतिहासिक संकट से जूझ रहा है। यहां महंगाई चरम सीमा को भी पार कर चुकी है। जनता दाने-दाने को मोहताज है। देश को जीविका चलाने के लिए दूसरे देशों को मुंह देखना पड़ रहा है। इसके बावजूद सिंगापुर भागे श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने देश के खराब हालात के लिए कोरोना और लॉकडाउन को जिम्मेदार ठहराया है।