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Sri Lanka: विक्रमसिंघे ने किया पूर्वी प्रांत को बहुआयामी केंद्र में बदलने का वादा, भारत की मदद पर कही यह बात

Fri, 25 Aug 2023 07:38 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 25 Aug 2023 07:38 PM IST
सार

Sri Lanka: श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने तमिल बहुत पूर्वी प्रांत (विशेष रूप से त्रिंकोमाली जिला) को एक बहुआयामी केंद्र में बदलने का वादा किया है। इसके लिए उन्होंने भारत की ओर से दी जा रही मदद का भी जिक्र किया है।

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Sri Lanka planning massive development in Eastern Province with Indian aid: President Wickremesinghe
रानिल विक्रमसिंघे - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने तमिल बहुत पूर्वी प्रांत (विशेष रूप से त्रिंकोमाली जिला) को एक बहुआयामी केंद्र में बदलने का वादा किया है। इसके लिए उन्होंने भारत की ओर से दी जा रही मदद का भी जिक्र किया है। प्रांत के भीतर विकासात्मक पहलों पर गुरुवार को एक विशेष समिति की बैठक आयोजित की गई।

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बैठक को संबोधित करते हुए विक्रमसिंघे ने पूर्वी विकास परियोजना में तेजी लाने पर जोर दिया और द्वीप राष्ट्र की नकदी की कमी वाली अर्थव्यवस्था के लिए एक अनुकूल माहौल को बढ़ावा देने को कहा। यहां राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने इस परियोजना में भारत की मदद लेने की जरूरत पर जोर दिया और  इसके रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।

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उन्होंने त्रिंकोमाली के ऊर्जा, परिवहन, समुद्री वाणिज्य, नौसेना संचालन, विमानन, उद्योग और पर्यटन को शामिल करते हुए एक बहुआयामी केंद्रके लिए व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित किया। वित्त मंत्री विक्रमसिंघे ने इसमें भारत की सहयोगी भूमिका पर जोर दिया।

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राष्ट्रपति ने कहा, 'वर्तमान में गुरबाना जुरोंग (सिंगापुर की प्रमुख बुनियादी ढांचा परामर्श कंपनी) द्वारा तैयार की गई एक व्यापक योजना त्रिंकोमाली जिले के विकास से संबंधित है, जिसे श्रीलंका और भारत के बीच एक स्थापित समझौते का समर्थन प्राप्त है।' उन्होंने कहा,'यह जरूरी है कि इस समझौते को लागू किया जाए।'
 

विकास कार्यनीति में एक सावधानीपूर्वक तैयार किया गया कार्यक्रम शामिल है, जिसका उद्देश्य वेरुगलारू से पनामा तक फैले कुमाना तटीय क्षेत्र का विस्तार करना है। इस विस्तार को पर्यटन क्षेत्र की उन्नति के लिए उपयोग किए जाने की कल्पना की गई है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र के भीतर आधुनिक कृषि स्थापित करने के लिए एक खाका तैयार किया गया है, और इस मॉडल को पूर्वी प्रांत के भीतर अन्य क्षेत्रों में विस्तारित करने का इरादा है। मछली पकड़ने, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों में विकास के साथ ही इस रणनीतिक शहर त्रिंकोमाली को एक प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र में उन्नत करना है।
 

विक्रमसिंघे का यह बयान तब सामने आया है जब कुछ दिन पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अक्षय उर्जा और त्रिंकोमाली हब सहित क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। द्विपक्षीय संबंधों पर भारत-श्रीलंका संसदीय मैत्री संघ के सदस्यों को एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपडेट करते हुए जयशंकर ने द्वीप राष्ट्र की बहु-जातीय, बहु-भाषी और बहु-धार्मिक पहचान के संरक्षण के लिए नई दिल्ली के समर्थन को दोहराया था।
 

भारतीय उच्चायोग के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जयशंकर ने दोनों देशों के बीच भौगोलिक निकटता और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर श्रीलंका के विकास, स्थिरता और समृद्धि में भारत के सकारात्मक योगदान पर भी प्रकाश डाला।

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