श्रीलंका संकट: राष्ट्रपति गोटबाया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 17 मई को संसद में चर्चा, विपक्ष महाभियोग चलाने को तैयार
सांसद एमए सुमनथिरन ने जोर देकर कहा कि देश को आगे बढ़ने के लिए एक स्थिर सरकार जरूरी है। सुमनथिरन ने कहा कि राष्ट्रपति के इस्तीफे के लिए निर्धारित समय अवधि नहीं दी गई है, लेकिन प्रधानमंत्री की नियुक्ति के संबंध में जल्द ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद से राजनैतिक संकट और गहरा गया है। प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इस बीच, श्रीलंका की संसद में 17 मई को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी, जिसकी पुष्टि स्पीकर कार्यालय ने गुरुवार को की है। आज(गुरुवार) को पार्टी नेताओं की बैठक में यह फैसला लिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद से विशेष मंजूरी मिलने के बाद इस प्रस्ताव को बहस के लिए लाया जाएगा।
राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद परिसर में पार्टी नेताओं की हुई बैठक के बाद स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने ने कहा कि नेताओं द्वारा प्रस्ताव तैयार करने के बाद राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि एक स्थिर सरकार के गठन और संसद सदस्यों की सुरक्षा का प्रस्ताव भी राष्ट्रपति राजपक्षे को सौंपा जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मौके पर सांसद एमए सुमनथिरन ने जोर देकर कहा कि देश को आगे बढ़ने के लिए एक स्थिर सरकार जरूरी है। सुमनथिरन ने कहा कि राष्ट्रपति के इस्तीफे के लिए निर्धारित समय अवधि नहीं दी गई है, लेकिन प्रधानमंत्री की नियुक्ति के संबंध में जल्द ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं, सांसद मनो गणेशन ने कहा कि राष्ट्रपति को लोगों द्वारा उनके इस्तीफे के लिए बार-बार की जा रही मांग का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी अचानक हस्तक्षेप करते हुए प्रधान मंत्री का पद नहीं लेना चाहिए।
गौरतलब है कि श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी एसजेबी ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह राष्ट्रपति राजपक्षे की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। इस दौरान पार्टी ने यह भी कहा कि वह नेता पर महाभियोग चलाने के लिए तैयार है। .
देश भर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने भी कार्यकारी अध्यक्ष पद को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्ता को कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच विभाजित किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति और पूरे राजपक्षे परिवार के इस्तीफे की भी मांग की थी। एसजेबी के नेता ने संसद से कहा कि सरकार को राजपक्षे के पद छोड़ने की जनता की मांग पर ध्यान देना चाहिए, नहीं तो हम अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे।
1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से श्रीलंका इस समय अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। सरकार के समर्थकों द्वारा कोलंबो और अन्य जगहों पर शांतिपूर्ण सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया गया था, जिसके बाद वहां हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में सोमवार को आठ लोगों की मौत और 200 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी। सरकार विरोदी प्रदर्शनकारी लगातार राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।