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Sri Lanka: श्रीलंका में सियासी उथल-पुथल बढ़ने के संकेत, विपक्ष ने चुनाव के लिए दबाव बढ़ाया

Wed, 14 Dec 2022 03:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 14 Dec 2022 03:48 PM IST
सार

Sri Lanka: एसजेबी ने देश में तुरंत चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। पार्टी के नेता सजित प्रेमदासा ने एसजेबी के सालाना सम्मेलन में विश्वास जताया कि उनकी पार्टी चुनाव की परीक्षा का सामना करने के लिए तैयार है...

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Sri Lanka opposition party Samagi Jana Balawegaya demand for immediate new elections
Sri Lanka: Ranil Wickremesinghe and Sajith Premadasa - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी समगी जना बेलावेगया (एसजेबी) ने देश में तुरंत नए चुनाव की अपनी मांग के पक्ष में मुहिम तेज कर दी है। पार्टी ने स्थानीय चुनाव स्थगति रखने के सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका देने का इरादा भी जताया है।

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उधर अरगलया (इस वर्ष हुए सरकार विरोधी जन आंदोलन) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। अरागलया के कारण ही पूर्व राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी थी। यह आंदोलन देश में पैदा हुए अभूतपूर्व आर्थिक संकट के कारण खड़ा हुआ था। बीते जुलाई में राष्ट्रपति बनने के बाद विक्रमसिंघे अरागलया को खत्म कराने में सफल हो गए थे। इसके लिए उन्होंने दमन का सहारा भी लिया था। लेकिन अब अरागलया से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ‘अरागलया एक्स-कोर’ नाम की नई मुहिम शुरू कर दी है।

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सोमवार को ‘अरागलया एक्स-कोर’ की शुरुआत एक डिस्कशन ग्रुप के रूप में की गई। इसके तहत युवा और नए नेताओं को उभारने का लक्ष्य भी रखा गया है, जिन्हें इस समूह की तरफ से अगले आम चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाएगा। ‘अरागलया एक्स-कोर’ के संयोजक निपुण थराका ने कहा- ‘हमारा संगठन कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह एक आंदोलन है, जो भावी उम्मीदवारों को तैयार करेगा। हमें उम्मीद है कि अगले आम चुनाव तक हमारे प्रतिनिधि तैयार हो जाएंगे।’

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नए समूह से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजनीतिक दल भ्रष्टाचार का पर्याय बन गए हैं। इसलिए उनका मकसद ऐसी कार्य योजना तैयार करना है, जिससे देश की समस्याओं का हल निकाला जा सके। पर्यवेक्षकों के मुताबिक देश को आर्थिक संकट से मुक्ति दिलाने में रानिल विक्रमसिंघे सरकार के नाकाम रहने के कारण अरागलया कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय होने का मौका मिला है।

इस बीच एसजेबी ने देश में तुरंत चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। पार्टी के नेता सजित प्रेमदासा ने एसजेबी के सालाना सम्मेलन में विश्वास जताया कि उनकी पार्टी चुनाव की परीक्षा का सामना करने के लिए तैयार है। इसी पार्टी के सांसद एरान विक्रमारत्ने कहा कि स्थानीय चुनावों के मुद्दे पर एसजेबी ने कोर्ट जाने की पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने सोमवार को कहा- हाल में सत्ताधारी राजनेता चुनावों को टालने के बहाने बनाते रहे हैं, इसलिए एसजेबी को अदालत जाना पड़ रहा है।

वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका में विपक्षी दल और राजनीतिक कार्यकर्ता स्थानीय और संसदीय चुनाव एक साथ कराने के लिए विक्रमसिंघे सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैँ। उनकी मांग है कि ये दोनों चुनाव 2023 की पहली तिमाही में कराए जाएं। स्थानीय चुनाव इस वर्ष फरवरी में ही होने थे, लेकिन तत्कालीन गोटाबया राजपक्षे सरकार ने इन्हें स्थगित कर दिया था। विक्रमसिंघे सरकार ने भी इन चुनावों को टाले रखा है।

संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक राष्ट्रपति के पास संसद को किसी भी वक्त भंग करने का अधिकार है। लेकिन सरकार चुनाव को यथासंभव टालने की नीति पर चल रही है। सरकार ने कहा है कि देश की आर्थिक हालत ऐसी नहीं है, जिसमें तुरंत चुनाव कराए जा सकें।

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