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Sri Lanka Crisis: प्रतिरोध स्थल से हटने के लिए आखिर क्यों तैयार हो गए आंदोलनकारी?

Thu, 11 Aug 2022 05:00 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 11 Aug 2022 05:00 PM IST
सार

Sri Lanka Crisis: विश्लेषकों के मुताबिक मंगलवार को प्रदर्शनों में कम संख्या में लोगों के आने की कई वजहें हैं। लोगों में विरोध जताने को लेकर एक तरह की थकान आ गई है। साथ ही वे राष्ट्रपति विक्रमसिंघे को एक मौका देना चाहते हैं...

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Sri Lanka Crisis: Why Protesters ready to withdraw from the resistance site gotta go gama
Sri lanka Crisis: गोटा गो गामा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

श्रीलंका में अरागयलया (पिछले चार महीनों से चल रहा सरकार विरोधी आंदोलन) के नेता यहां मुख्य प्रतिरोध स्थल- गॉल फेस से हटने को तैयार हो गए हैं। ये जगह ‘गोटा गो गामा’ के नाम से बहुचर्चित हो गया है। ये नाम तब दिया गया, जब आंदोलनकारियों का मकसद तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे को उनके पद से हटाना था। बाद में राजपक्षे देश छोड़ कर भाग गए। उनकी जगह संसद ने रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुना। विक्रमसिंघे ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से आंदोलनकारियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। इसीलिए सिलसिले में अरागलया कार्यकर्ताओं को गॉल फेस से हटने को कहा गया था।

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पुलिस के इस नोटिस के खिलाफ अरागलया कार्यकर्ताओं ने कोर्ट में चार याचिकाएं दायर की थीं। लेकिन बुधवार शाम उन्होंने इन याचिकाओं को वापस ले लिया। पहले पुलिस ने पांच अगस्त तक गॉल फेस खाली करने को कहा था। लेकिन बाद में सरकार की तरफ कोर्ट में वादा किया गया था कि 10 अगस्त तक वहां लगाए गए टेंट को नहीं हटाया जाएगा। याचिकाओं को वापस लेने के बाद अरागलया कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे अपने साथ टेंट और वहां रखे गए दूसरे सामान वापस ले जाएंगे। लेकिन कुछ निर्माण को वहीं छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह इस दौर की भीषणता के स्मारक के रूप में मौजूद रहे।

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बुधवार को अरागलया का 124वां दिन था। उसके पहले मंगलवार को अरालगया के तहत जन प्रदर्शन किए गए थे। उसके पूर्व विपक्षी दल समागी जना बलावेगया (एसजेबी) के नेता फील्ड मार्शल सरत फोन्सेका ने संसद में कहा था- ‘लोगों को भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ अंतिम लड़ाई के लिए एकजुट हो जाना चाहिए।’ समझा जाता है कि फील्ड मार्शल फोन्सेका के समर्थन से आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ा था। लेकिन इस बीच सरकार की सख्त कार्रवाइयों का भी असर हुआ है। मंगलवार को जन प्रदर्शनों के दौरान अपेक्षाकृत कम लोग शामिल हुए।

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एक प्रदर्शनकारी ने उस रोज गोटा गो गामा स्थल पर वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से कहा- ‘पहले लोग हमारे साथ थे। लेकिन जब से सरकार ने गैस बांटना शुरू किया और क्यूआर कोड सिस्टम को लागू किया है, लोग भ्रष्टाचार और जमीन एवं धन की हुई चोरी को भूल गए हैं।’

विश्लेषकों के मुताबिक मंगलवार को प्रदर्शनों में कम संख्या में लोगों के आने की कई वजहें हैं। लोगों में विरोध जताने को लेकर एक तरह की थकान आ गई है। साथ ही वे राष्ट्रपति विक्रमसिंघे को एक मौका देना चाहते हैं। रसोई गैस के वितरण की योजना लागू होने से कतारों में पहले की तरह खड़े रहने की अब जरूरत नहीं रही है। इसके अलावा लोगों में सरकारी दमन से भय भी समा गया है।

अरागलया से जुड़े वकील लसांता मनोज ने वेबसाइट इकॉनमी नेक्स्ट से कहा- ‘प्रदर्शनकारी घर लौट रहे हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि अरागलया खत्म हो गया है। प्रतिरोध स्थल को खाली करने का मतलब संघर्ष का खत्म हो जाना नहीं है।’ एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा- ‘थोड़े समय के लिए हम खामोश हो रहे हैं, क्योंकि हमारी जान को खतरा है। कई लोगों ने हमसे कहा है कि गोटाबया राजपक्षे को राष्ट्रपति पद से हटाने को हम अपनी जीत मान लें और अब आगे की सोचें।’

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