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Sri Lanka Crisis: तमिल समुदाय से अचानक क्यों जग गया रानिल विक्रमसिंघे के मन में प्यार? क्या है पूरा मामला
Sun, 13 Nov 2022 11:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 13 Nov 2022 11:10 PM IST
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विक्रमसिंघे
विस्तार
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने अचानक तमिल समुदाय को लुभाने की पहल की है। बताया जाता है कि इस मुद्दे पर बढ़ते विदेशी दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया है। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि ऐसा करके वे श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में विदेशी हस्तक्षेप से बचना चाहते हैँ। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद ने श्रीलंका में तमिलों के अधिकारों के हनन को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया था।
अब विक्रमसिंघे ने सभी तमिल समुदाय की समस्याओं के बारे में बातचीत करने के लिए तमिल राजनीतिक पार्टियों को आमंत्रित किया है। संभवतः ये बातचीत अगले हफ्ते किसी रोज होगी। गुरुवार को विक्रमसिंघे ने कहा कि तमिल समुदाय के सामने जो मुद्दे हैं, उन्हें सद्भावपूर्ण ढंग से हल करने के लिए ये बातचीत होगी, ताकि श्रीलंका अपनी स्वतंत्रता की 75वीं सालगिरह बिना किसी विदेशी हस्तक्षेप के मना सके। श्रीलंका अपनी आजादी की 75वीं सालगिरह अगले साल मनाएगा।
राष्ट्रपति के निकट सूत्रों ने मीडियाकर्मियों से कहा है कि विक्रमसिंघे श्रीलंका में मेलमिलाप को प्राथमिकता देना चाहते हैं। बीते छह नवंबर को श्रीलंका के अंग्रेजी अखबार द संडे टाइम्स ने खबर दी थी कि विक्रमसिंघे ने मंत्रियों का एक दल बनाया है, जिसे मेलमिलाप का एजेंडा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। द संडे टाइम्स ने कहा था कि इसी एजेंडे को लेकर सरकार सभी पक्षों से बातचीत करेगी। इस दल का नेतृत्व प्रधानमंत्री दिनेश गुनावर्धने करेंगे। साथ ही इसमें विदेश मंत्री अली साबरी, मछली पालन मंत्री डगलस दयानंद और न्याय मंत्री विजेदासा राजपक्षे शामिल हैँ। अखबार ने बताया कि मंत्रियों का यह दल हर सोमवार को अपनी बैठक करेगा।
आलोचकों का कहना है कि विभिन्न अल्पसंख्यक समुदाय जिन कारणों से परेशान हैं, उन्हें दूर करने की कोई पहल अब तक सरकार ने नहीं की है। अल्पसंख्यक समुदाय प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म ऐक्ट (पीटीए) से परेशान रहे हैं। विक्रमसिंघे सरकार ने इस कानून को वापस लेने या इसके प्रावधानों को नरम बनाने की कोई पहल नहीं की है।
संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद ने श्रीलंका के खिलाफ जो प्रस्ताव पारित किया था, उसमें इस कानून का खास जिक्र किया गया था। तब श्रीलंका का पक्ष रखने जिनेवा गए विदेश मंत्री अली साबरी ने वहां वादा किया था कि श्रीलंका में मेलमिलाप की ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय संतुष्ट हो सके। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस संबंध में एक रिपोर्ट तैयार की गई है। इसे राष्ट्रपति कार्यालय को सौंप दिया गया है।
विक्रमसिंघे गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार अगले साल सत्य एवं मेलमिलाप आयोग के गठन के बारे में एक प्रस्ताव संसद में पेश करेगी। साथ ही आतंकवाद के बारे में नया बिल लाया जाएगा। भ्रष्टाचार हटाने के लिए नए कानून का विधेयक भी अगले साल पेश होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि तमिल समुदाय के साथ उनकी समस्याओं पर बातचीत चल रही है। कई बंदियों को रिहा किया गया है और कुछ लोगों को जल्द ही रिहा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सारी समस्याओं को अगले फरवरी तक हल कर लेने के लिए कृत संकल्प है।