ओमिक्रॉन वैरिएंट का कहर: क्या कोरोना महामारी की ये आखिरी लहर है?
वैज्ञानिकों के इस कथन ने लोगों में आशा जगा दी है कि ये कोरोना वायरस महामारी की आखिरी लहर है। कहा गया है कि दो साल से जारी महामारी के बीच कोरोना वायरस का नया वैरिएंट अपेक्षाकृत कमजोर है। इसलिए इसके बाद आने वाले वैरिएंट और कमजोर होंगे...
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कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट यूरोप से लेकर अमेरिका और एशिया तक में कहर ढा रहा है। ये इतना अधिक संक्रामक है कि उसके संपर्क में आने से बचना किसी के लिए भी मुश्किल बना हुआ है। लेकिन इस बीच कुछ वैज्ञानिकों के इस कथन ने लोगों में आशा जगा दी है कि ये कोरोना वायरस महामारी की आखिरी लहर है। कहा गया है कि दो साल से जारी महामारी के बीच कोरोना वायरस का नया वैरिएंट अपेक्षाकृत कमजोर है। इसलिए इसके बाद आने वाले वैरिएंट और कमजोर होंगे। लेकिन वैज्ञानिकों का एक दूसरा समूह इस दावे से सहमत नहीं है। उन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अधिक खतरनाक नए वैरिएंट्स का भविष्य सामने आना संभव है।
गंभीर नहीं है संक्रमण
जो वैज्ञानिक मौजूदा लहर को आखिरी मान रहे हैं, उनकी दलील यह है कि ओमिक्रॉन लहर के दौरान उससे बहुत कम लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है, जितना पहले आई लहरों के दौरान हुआ था। टीकाकरण और पहले के संक्रमणों से बनी एंटीबॉडीज से भी इस बार बहुत से लोगों का इस रूप में बचाव हुआ है कि संक्रमण ने मारक या गंभीर रूप नहीं लिया।
डेनमार्क में यूनिवर्सिटी ऑफ कॉपेनहेगेन में ग्लोबल एनवायरमेंटल हेल्थ के प्रोफेसर फ्लेमिंग कोनरादसेन ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा- ‘लंबी मुसीबत के बाद अब डेनमार्क में यह स्थिति है कि लगभग 90 फीसदी लोग संक्रमित या इम्युनाइज्ड हो चुके हैं। इससे बीमारी बिल्कुल अलग रूप ले लेगी।’ उन्होंने कहा कि लोग अभी भी बीमार पड़ेंगे, लेकिन बीमारी के गंभीर रूप लेने का खतरा कम रहेगा।
ओमिक्रॉन वैरिएंट सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में सामने आया था। वहां इसके कारण आई लहर जल्द ही ठहर गई। उसके आधार पर वैज्ञानिकों के एक समूह की राय बनी है कि कोरोना वायरस धीरे-धीरे वह रूप ले रहा है, जिसमें वह व्यापक रूप से माहौल में फैला रहेगा, लेकिन जिससे लोगों के लिए कम खतरे पैदा होंगे। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसी धारणा के खिलाफ चेतावनी दी है। उससे जुड़ी संक्रामक रोग विशेषज्ञ मारिया वान केरखोव ने पिछले महीने कहा था- व्यापक रूप से फैलने का यह मतलब नहीं होगा कि वायरस कम खतरनाक हो जाएगा।
टीकाकरण और सावधानियों दोनों की जरूरत
लंदन स्थित स्कूल ऑफ हायजेनिक एंड ट्रॉपिकल मेडिसीन में प्रोफेसर मार्टिन मैकी ने कहा है कि अभी लंबे समय तक लोगों को मास्क पहनने की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस से संघर्ष में टीकाकरण और सावधानियों दोनों की जरूरत बनी रहेगी। उन्होंने ऐसी राय बनने को खतरनाक बताया है कि अब कोरोना वायरस कम खतरनाक हो जाएगा।
इस संस्था में संक्रामक रोग और महामारी विषय के प्रोफेसर डेविड हिमैन ने चेतावनी दी है कि किसी अधिक खतरनाक वैरिएंट के सामने आने का खतरा लगातार बना रहेगा। उन्होंने सलाह दी है कि लोगों को खुद अपने लिए मौजूद खतरे का जायजा लेना चाहिए। उन्हें ऐसी जगहों या लोगों के पास जाने से बचना चाहिए, जहां संक्रमण लग सकता हो। तभी लॉकडाउन से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा- ‘उस समय तक की बात है, जब ये बीमारी किसी दूसरी बीमारी की तरह हो जाएगी। तब तक हम सबको वो उपाय अपनाने होंगे, जिनसे इसे फैलने से रोका जा सके।’