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Pakistan: सोशल मीडिया पर सियासी दलों की तीखी जंग, इमरान खान की PTI 84 लाख फॉलोवर के साथ आगे, PPP सबसे पीछे
Sun, 12 Mar 2023 07:59 PM IST
उदित दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sun, 12 Mar 2023 07:59 PM IST
सार
पाकिस्तान में सोशल मीडिया के राजनीतिक इस्तेमाल में बढ़ोतरी पिछले साल मार्च-अप्रैल में हुई, जब तत्कालीन इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। सरकार गिरने के बाद से इमरान खान और उनकी पार्टी ने मौजूदा सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया का युद्ध स्तर पर इस्तेमाल किया है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पाकिस्तान में तीखे हो रहे सियासी टकराव के साथ सोशल मीडिया राजनीतिक दलों का रण क्षेत्र बन गया है। इस माध्यम पर रोजमर्रा के स्तर पर होने वाली जंग में संवाद की शिष्टता और भाषा की मर्यादा बुरी तरह टूट चुकी है। समझा जाता है कि पाकिस्तानी समाज में तेज होते राजनीतिक ध्रुवीकरण में सोशल मीडिया ने खास भूमिका निभाई है।
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पर्यवेक्षकों के मुताबिक अभी कुछ समय पहले तक पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए टेलीविजन और प्रिंट मीडिया जैसे पंरपरागत माध्यमों पर निर्भर थीं, लेकिन देश में सोशल मीडिया का प्रसार होने के साथ कई दलों ने भी इसे अपना हथियार बना लिया है। इसके जरिए वे अपने नैरेटिव को आक्रामक और जोरदार ढंग से अपने समर्थकों तक पहुंचाने की होड़ में लगे हुए हैं। उधर इन दलों के समर्थकों के बीच भी सोशल मीडिया पर दिन भर जंग छिड़ी रहती है।
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विश्लेषकों के मुताबिक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की खास पहल पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने की और इस होड़ में अभी भी सबसे आगे दिखती है। बताया जाता है कि विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी बड़ी संख्या में पीटीआई के समर्थक हो गए हैं। वे अपनी जगहों पर रहते हुए पीटीआई के सोशल मीडिया अभियानों में अपनी ताकत लगाए रखते हैं।
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सोशल मीडिया के राजनीतिक इस्तेमाल में खास बढ़ोतरी पिछले साल मार्च-अप्रैल में हुई, जब तत्कालीन इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। उसी प्रस्ताव के कारण पिछले साल अप्रैल में खान की सरकार गिर गई थी। उसके बाद से इमरान खान और उनकी पार्टी लगातार मौजूदा सरकार के खिलाफ आंदोलन के मूड में रही है। अपनी इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का युद्ध स्तर पर इस्तेमाल किया है।
पिछले साल प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद इमरान खान ने ट्विटर स्पेस पर एक चर्चा की थी। इस चर्चा में लगभग पौने दो लाख लोग शामिल हुए। इस चर्चा को पाकिस्तान में सोशल मीडिया के राजनीतिक इस्तेमाल के नजरिए एक मील का पत्थर जैसी घटना माना गया। उसके बाद दूसरी पार्टियों ने भी सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दीं।
अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल ट्विटर पर पीटीआई के 84 लाख फॉलोवर हैं, जबकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के 24 लाख और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के दस लाख फॉलोवर हैं।
इस वर्ष जनवरी में पीएमएल (नवाज) की वरिष्ठ उपाध्यक्ष मरियम नवाज ने पार्टी की एक बैठक बुलाई, जिसमें लोगों तक अपनी बात पहुंचाने में पार्टी की नाकामी पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर पार्टी की अपेक्षाकृत कमजोर उपस्थिति को इसका एक कारण माना गया। मरियम ने अब पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय होने को कहा है। जनवरी के बाद से सोशल मीडिया पर पीएमएल (नवाज) अधिक सक्रिय और आक्रामक दिख रही है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पीपीपी की मौजूदगी अभी कमजोर है। जबकि जमायत-ए-इस्लामी जैसी मजहबी पार्टियों ने अपनी सक्रियता तेज कर रखी है। हाल में सिंध प्रांत में हुए स्थानीय चुनावों में जमायत ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसका एक कारण सोशल मीडिया के जरिए उसके मजबूत प्रचार अभियान को भी माना गया है।