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SNAP Data Controversy: ट्रंप प्रशासन पर 20 अमेरिकी राज्यों ने ठोका मुकदमा, निजी जानकारी मांगने का लगा आरोप

Tue, 29 Jul 2025 07:31 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 29 Jul 2025 07:31 AM IST
सार

अमेरिका के 20 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसमें एक योजना के लाभार्थियों की निजी जानकारी मांगने का विरोध किया गया है। राज्यों को आशंका है कि यह डेटा निर्वासन जैसी प्रवासी विरोधी कार्रवाई में इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, यूएसडीए ने डेटा न देने पर फंड रोकने की चेतावनी दी है। 

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SNAP Data Controversy many US states sued Trump administration accusing demanding personal information
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका के 20 राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा कानूनी कदम उठाया है। इन राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स ने सोमवार को एक संयुक्त मुकदमा दायर किया, जिसमें एसएनएपी (सप्लीमेंटल न्यूट्रिशियन असिस्टेंस प्रोग्राम) के लाभार्थियों की निजी जानकारी देने की मांग का विरोध किया गया है। राज्यों को आशंका है कि यह डेटा निर्वासन जैसी प्रवासी विरोधी कार्रवाई में इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, यूएसडीए ने डेटा न देने पर फंड रोकने की चेतावनी दी है। निजता और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कदम को खतरनाक बताया है।
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ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) के माध्यम से सभी राज्यों से मांग की थी कि वे एसएनएपी योजना से लाभ ले रहे नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा जैसे जन्मतिथि, पता और नागरिकता की स्थिति साझा करें। इस जानकारी के लिए यूएसडीए ने तर्क दिया है कि इससे धोखाधड़ी और दुरुपयोग को रोका जा सकेगा, लेकिन कई राज्यों को शक है कि इसका उद्देश्य प्रवासी विरोधी कार्रवाई को और मजबूत करना है।
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राज्यों ने नहीं दी गोपनीय जानकारी
राज्यों का कहना है कि एसएनएपी लाभार्थियों ने यह जानकारी केवल खाद्य सहायता पाने के लिए दी थी, न कि उन्हें निगरानी सूची में डालने या निर्वासन का लक्ष्य बनाने के लिए। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बॉन्टा ने कहा कि यह धोखे की नीति है। एसएनएपी डेटा को प्रवासी विरोधी एजेंडे में शामिल करना अमानवीय है। इस मामले में राज्यों ने अदालत से तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
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यूएसडीए ने दी चेतावनी
यूएसडीए की ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य यह डेटा नहीं देते हैं, तो उनके फंड रोक दिए जाएंगे। हालांकि यूएसडीए ने अपने आधिकारिक नोटिस में प्रवासी कानून प्रवर्तन का कोई जिक्र नहीं किया, लेकिन इससे पहले प्रशासन ने इसी तरह की सूचनाएं जुटाकर बाद में उन्हें निर्वासन के लिए इस्तेमाल किया है।

फंडिंग में राज्य की भूमिका अहम
एसएनएपी योजना में खाद्य सहायता की पूरी लागत संघीय सरकार उठाती है, लेकिन पात्रता निर्धारण और लाभ वितरण की जिम्मेदारी राज्यों की होती है। कई मामलों में अवैध प्रवासी स्वयं लाभ नहीं ले सकते, लेकिन वे अपने अमेरिकी नागरिक बच्चों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस वजह से, मिश्रित परिवारों का डेटा संवेदनशील माना जा रहा है।


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मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ी
निजता और प्रवासी अधिकार संगठनों ने भी ट्रंप प्रशासन की इस मांग पर गंभीर चिंता जताई है। नेशनल स्टूडेंट लीगल डिफेंस नेटवर्क की वकील मैडलिन वाइजमैन ने कहा कि प्रशासन खुले तौर पर बता चुका है कि वह इस डेटा का इस्तेमाल निर्वासन जैसी गैरकानूनी कार्यवाहियों के लिए करेगा। यह सरासर गलत है।

पहले भी हो चुकी है ऐसी कोशिशें
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने सामाजिक योजनाओं से डेटा मांग कर उसे प्रवासी विरोधी कार्रवाई में इस्तेमाल किया हो। इससे पहले भी मेडिकेड और टैक्स रिकॉर्ड को प्रवासी जांच के लिए इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में एसएनएपी डेटा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।



 
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