{"_id":"6aa1d15f47b123ed940516d4","slug":"israel-opens-embassy-in-slovenia-as-small-eu-nation-shifts-policies-2026-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्यों बदला रुख?: फलस्तीन के साथ खड़ा था स्लोवेनिया, अब इस्राइल के लिए खोला पहला दूतावास","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
क्यों बदला रुख?: फलस्तीन के साथ खड़ा था स्लोवेनिया, अब इस्राइल के लिए खोला पहला दूतावास
Thu, 10 Sep 2026 03:10 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ल्यूब्ल्याना (स्लोवेनिया)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ल्यूब्ल्याना (स्लोवेनिया)
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 10 Sep 2026 03:10 AM IST
विज्ञापन
इस्राइली विदेश मंत्री गिदोन सार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/विदेश मंत्रालय,स्लोवेनिया
स्लोवेनिया की राजधानी ल्यूब्ल्याना में इस्राइल ने बुधवार को अपना पहला दूतावास खोला। इससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ पुराने सहयोगी देशों के साथ इस्राइल के संबंध खराब हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों को लेकर उसकी नीति है।
इस्राइल के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार इस मौके पर ल्यूब्ल्याना पहुंचे। उन्होंने स्लोवेनिया के विदेश मंत्री टोने काजेर से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने दूतावास खुलने के दिन को ऐतिहासिक दिन बताया। स्लोवेनिया की समाचार एजेंसी एसटीए के मुताबिक, सार ने इस्राइल को पश्चिम एशिया का एकमात्र लोकतंत्र बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस्राइल सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से यूरोप की सुरक्षा की रक्षा कर रहा है। सार ने कहा कि इस्राइल पश्चिमी सभ्यता के लिए अग्रिम मोर्चे पर एक किला है।
दूतावास के बाहर विरोध क्यों हुआ?
सैकड़ों फलस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी नए दूतावास के बाहर जमा हुए। उन्होंने इस्राइल के विदेश मंत्री की यात्रा का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने दूतावास बंद करने की मांग की।
विज्ञापन
स्लोवेनिया ने क्या उम्मीद जताई?
विदेश मंत्री टोने काजेर ने कहा कि दूतावास खुलने से दोनों देशों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू होना चाहिए। उन्होंने ज्यादा मजबूत सहयोग और ठोस नतीजों की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि इसका फायदा दोनों देशों के लोगों को मिलना चाहिए।
इस्राइल के लिए यह कदम क्यों अहम है?
स्लोवेनिया का यह कदम ऐसे समय आया है, जब इस्राइल के कुछ पुराने सहयोगी उसके खिलाफ कदम उठा रहे हैं।
दूतावास खुलने से एक दिन पहले ब्रिटेन ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक की इस्राइली बस्तियों के साथ व्यापार पर रोक लगा दी थी। फ्रांस और कनाडा ने भी इसी तरह के कदम उठाने का एलान किया है। इन कदमों को इस्राइल के करीबी देशों की नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। गाजा युद्ध के कारण इस्राइल के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अलगाव के बीच स्लोवेनिया का यह कदम उसके लिए अहम माना जा रहा है।
इस्राइल ने ब्रिटेन को क्या जवाब दिया?
इस्राइल ने ब्रिटेन के कदम पर नाराजगी जताई। इस्राइल ने कहा कि वह यरूशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद कर देगा।
स्लोवेनिया की नीति में क्या बदलाव आया?
स्लोवेनिया की पिछली सरकार इस्राइल की सबसे मुखर आलोचकों में शामिल थी। उस समय देश की सरकार का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब कर रहे थे। लेकिन जून की शुरुआत में दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री जानेज यान्सा के सत्ता में आने के बाद नीति बदल गई।
पिछली सरकार ने फलस्तीन को लेकर क्या किया था?
स्लोवेनिया की पिछली सरकार ने 2024 में फलस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता दी थी। इसके बाद 2025 में उसने इस्राइली बस्तियों से होने वाले सामान के आयात पर रोक लगाई थी। सरकार ने हथियारों पर भी रोक लगाई थी। इसके अलावा इस्राइल के कुछ बड़े अधिकारियों के स्लोवेनिया में आने पर रोक लगाई गई थी। इनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल थे।
नई सरकार ने क्या बदला?
सत्ता संभालते ही यान्सा ने सरकारी इमारत से फलस्तीन का ध्वज हटा दिया। यह ध्वज स्लोवेनिया, यूरोपीय संघ और यूक्रेन के ध्वजों के साथ लगाया गया था। इसके बाद उनकी सरकार ने इस्राइल के खिलाफ उठाए गए सभी कदमों से पीछे हट गई। यान्सा ने कहा कि उनकी सरकार पिछली सरकार से हुए नुकसान को ठीक करने का काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार की 'यहूदी विरोधी नीतियों' से देश को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने नई सरकार पर क्या आरोप लगाया?
पूर्व प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब ने यान्सा पर यूरोपीय संघ को इस्राइली बस्तियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि दूतावास खोलना अंतरराष्ट्रीय कानून से दूर जाने की दिशा में एक और कदम है। गोलोब की फ्रीडम मूवमेंट पार्टी ने बुधवार को कहा कि वह संसद में यान्सा और काजेर को पद से हटाने की कोशिश करेगी।
स्लोवेनिया ने यूरोपीय संघ में क्या किया?
अगस्त में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि स्लोवेनिया ने इस्राइली बस्तियों की निंदा करने वाले यूरोपीय संघ के बयान को कमजोर करवाया। इस पर स्लोवेनिया में सरकार की आलोचना हुई। वहीं, इस्राइल के अधिकारियों ने सरकार की तारीफ की। विदेश मंत्री काजेर ने एपी से कहा कि स्लोवेनिया ने कभी किसी चीज को नहीं रोका। उन्होंने कहा कि उनका देश बातचीत में रचनात्मक तरीके से योगदान दे रहा है।
क्या जनता भी सरकार के साथ है?
स्लोवेनिया के राजनीतिक विश्लेषक आंद्राज जोरको ने कहा कि सरकार की बदली हुई नीति जनता की राय से मेल नहीं खाती। स्लोवेनिया की आबादी करीब 20 लाख है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग या तो इस्राइल के खिलाफ हैं या फिर इस मुद्दे पर तटस्थ रुख रखते हैं।
पहले स्लोवेनिया का काम कौन देखता था?
अब तक ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में मौजूद इस्राइल का दूतावास स्लोवेनिया से जुड़े राजनयिक मामलों को देखता था। अब स्लोवेनिया में इस्राइल का अपना दूतावास खुल गया है। बुधवार को काजेर और गिदोन सार ने कई क्षेत्रों में सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, युवा और खेल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ल्यूब्ल्याना में एक कारोबारी मंच का आयोजन भी किया जा रहा है।
विज्ञापन
इस्राइल के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार इस मौके पर ल्यूब्ल्याना पहुंचे। उन्होंने स्लोवेनिया के विदेश मंत्री टोने काजेर से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने दूतावास खुलने के दिन को ऐतिहासिक दिन बताया। स्लोवेनिया की समाचार एजेंसी एसटीए के मुताबिक, सार ने इस्राइल को पश्चिम एशिया का एकमात्र लोकतंत्र बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस्राइल सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से यूरोप की सुरक्षा की रक्षा कर रहा है। सार ने कहा कि इस्राइल पश्चिमी सभ्यता के लिए अग्रिम मोर्चे पर एक किला है।
विज्ञापन
दूतावास के बाहर विरोध क्यों हुआ?
सैकड़ों फलस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी नए दूतावास के बाहर जमा हुए। उन्होंने इस्राइल के विदेश मंत्री की यात्रा का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने दूतावास बंद करने की मांग की।
विज्ञापन
स्लोवेनिया ने क्या उम्मीद जताई?
विदेश मंत्री टोने काजेर ने कहा कि दूतावास खुलने से दोनों देशों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू होना चाहिए। उन्होंने ज्यादा मजबूत सहयोग और ठोस नतीजों की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि इसका फायदा दोनों देशों के लोगों को मिलना चाहिए।
इस्राइल के लिए यह कदम क्यों अहम है?
स्लोवेनिया का यह कदम ऐसे समय आया है, जब इस्राइल के कुछ पुराने सहयोगी उसके खिलाफ कदम उठा रहे हैं।
दूतावास खुलने से एक दिन पहले ब्रिटेन ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक की इस्राइली बस्तियों के साथ व्यापार पर रोक लगा दी थी। फ्रांस और कनाडा ने भी इसी तरह के कदम उठाने का एलान किया है। इन कदमों को इस्राइल के करीबी देशों की नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। गाजा युद्ध के कारण इस्राइल के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अलगाव के बीच स्लोवेनिया का यह कदम उसके लिए अहम माना जा रहा है।
इस्राइल ने ब्रिटेन को क्या जवाब दिया?
इस्राइल ने ब्रिटेन के कदम पर नाराजगी जताई। इस्राइल ने कहा कि वह यरूशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद कर देगा।
स्लोवेनिया की नीति में क्या बदलाव आया?
स्लोवेनिया की पिछली सरकार इस्राइल की सबसे मुखर आलोचकों में शामिल थी। उस समय देश की सरकार का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब कर रहे थे। लेकिन जून की शुरुआत में दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री जानेज यान्सा के सत्ता में आने के बाद नीति बदल गई।
पिछली सरकार ने फलस्तीन को लेकर क्या किया था?
स्लोवेनिया की पिछली सरकार ने 2024 में फलस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता दी थी। इसके बाद 2025 में उसने इस्राइली बस्तियों से होने वाले सामान के आयात पर रोक लगाई थी। सरकार ने हथियारों पर भी रोक लगाई थी। इसके अलावा इस्राइल के कुछ बड़े अधिकारियों के स्लोवेनिया में आने पर रोक लगाई गई थी। इनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल थे।
नई सरकार ने क्या बदला?
सत्ता संभालते ही यान्सा ने सरकारी इमारत से फलस्तीन का ध्वज हटा दिया। यह ध्वज स्लोवेनिया, यूरोपीय संघ और यूक्रेन के ध्वजों के साथ लगाया गया था। इसके बाद उनकी सरकार ने इस्राइल के खिलाफ उठाए गए सभी कदमों से पीछे हट गई। यान्सा ने कहा कि उनकी सरकार पिछली सरकार से हुए नुकसान को ठीक करने का काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार की 'यहूदी विरोधी नीतियों' से देश को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने नई सरकार पर क्या आरोप लगाया?
पूर्व प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब ने यान्सा पर यूरोपीय संघ को इस्राइली बस्तियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि दूतावास खोलना अंतरराष्ट्रीय कानून से दूर जाने की दिशा में एक और कदम है। गोलोब की फ्रीडम मूवमेंट पार्टी ने बुधवार को कहा कि वह संसद में यान्सा और काजेर को पद से हटाने की कोशिश करेगी।
स्लोवेनिया ने यूरोपीय संघ में क्या किया?
अगस्त में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि स्लोवेनिया ने इस्राइली बस्तियों की निंदा करने वाले यूरोपीय संघ के बयान को कमजोर करवाया। इस पर स्लोवेनिया में सरकार की आलोचना हुई। वहीं, इस्राइल के अधिकारियों ने सरकार की तारीफ की। विदेश मंत्री काजेर ने एपी से कहा कि स्लोवेनिया ने कभी किसी चीज को नहीं रोका। उन्होंने कहा कि उनका देश बातचीत में रचनात्मक तरीके से योगदान दे रहा है।
क्या जनता भी सरकार के साथ है?
स्लोवेनिया के राजनीतिक विश्लेषक आंद्राज जोरको ने कहा कि सरकार की बदली हुई नीति जनता की राय से मेल नहीं खाती। स्लोवेनिया की आबादी करीब 20 लाख है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग या तो इस्राइल के खिलाफ हैं या फिर इस मुद्दे पर तटस्थ रुख रखते हैं।
पहले स्लोवेनिया का काम कौन देखता था?
अब तक ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में मौजूद इस्राइल का दूतावास स्लोवेनिया से जुड़े राजनयिक मामलों को देखता था। अब स्लोवेनिया में इस्राइल का अपना दूतावास खुल गया है। बुधवार को काजेर और गिदोन सार ने कई क्षेत्रों में सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, युवा और खेल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ल्यूब्ल्याना में एक कारोबारी मंच का आयोजन भी किया जा रहा है।