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शोध में दावा, जीभ कम मोटी होगी तो नींद संबंधी समस्याएं ठीक हो जाएंगी
Mon, 13 Jan 2020 04:10 AM IST
आसिम खान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 13 Jan 2020 04:10 AM IST
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क्या आपकी जीभ (जुबान) मोटी है? क्या रात को सोते वक्त आप खर्राटे लेते हैं। सोते-सोते सांस रूक जाती है। अगर ऐसा है तो आप दुनियाभर में मौजूद 100 करोड़ लोगों में शामिल हैं जिन्हें स्लीप एप्निया (नींद संबंधी विकार) की समस्या है। अगर आप जीभ के फैट को कम कर लेंगे तो आपकी नींद संबंधी समस्याएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। ये दावा एक शोध में किया गया है जो अमेरिकल हाल ही जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।
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यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया के पेन मेडिसिन स्लीप सेंटर के सह-निदेशक और प्रमुख शोधकर्ता डॉ. रिचर्ड स्कवैब का कहना है कि मोटापा स्लीप एप्निया का प्रमुख कारण है। शोधकर्ताओं ने एमआरआई जांच की मदद 67 मोटे लोगों के मुंह के उपरी हिस्से स्वास नलिका में घटे 10 फीसदी फैट का आकलन किया गया। इसमें पता चला कि जिन लोगों के जीभ का फैट कम हुआ उनमें स्लीप एप्नीया के मामले में 31 फीसदी सुधार देखा गया। डॉ. रिचर्ड का दावा है कि जीभ से जितना फैट कम होगा नींद संबंधी रोगों में उतना अधिक सुधार होगा।
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ओएसए ग्रसित रोगी के दिमाग को खतरा
शोध के अनुसार ओब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया(ओएसए) स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसमें नींद के दौरान सांस लेने में रूकावट आती है। इससे दिमाग के सफेद भाग को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है तनाव की शिकायत हो सकती है। इस रोग से पीड़ित लोगों में हृदय रोग, स्ट्रोक और मधुमेह होने का भी खतरा रहता है।
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आखिर जीभ पर वसा क्यों बढ़ रही ?
डॉ. रिचर्ड का कहना है कि शरीर के अंग जीभ का प्रयोग बात करने, सांस लेने और खाना खाने में होता है। सवाल उठता है कि आखिर क्यों इसपर वसा बढ़ रही है। इसका पता हमें नहीं चल पाया है लेकिन आने वाले समय में इसपर शोध होगा। हालांकि ये स्पष्ट है कि जीभ का मोटापा कम हो तो स्लीप एप्निया जैसी समस्याओं का खतरा कम होगा।
भारत में स्लीन एप्निया के रोगी
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 10 में से एक व्यक्ति किसी न किसी तरह के नींद संबंधी विकार से पीड़ित है। आज के समय में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों में इसके शुरुआती लक्षण दिखने लगते हैं। 35 की उम्र के बाद ये बीमारी गंभीर रूप ले लेती है जिसके बारे में उस व्यक्ति को पता ही नहीं होता है जिसे ये तकलीफ होती है। इसका कारण नींद में होने के दौरान परेशानी का शुरू होना है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
- दिन रात बहुत अधिक नींद आना
- सोते वक्त नाक से तेज आवाज आना
- सोते हुए अचानक नींद खुलना, सीने में दर्द
- सुबह उठने के साथ सिर में दर्द बने रहना
- अपने काम में ध्यान न लगा पाना
- ब्लड प्रेशर का बढ़ना, बेचैनी होना