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Health: फोन की नीली रोशनी से त्वचा को नुकसान, ऑस्ट्रेलिया की बॉन्ड यूनिवर्सिटी में किया गया अध्ययन
Fri, 26 Jul 2024 05:21 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोबिना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोबिना
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Fri, 26 Jul 2024 05:21 AM IST
सार
ऑस्ट्रेलिया की बॉन्ड यूनिवर्सिटी में अध्ययन में सामने आया है कि मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी त्वचा के लिए बेहद हानिकारक है।
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मोबाइल( सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
विस्तार
दिन-रात मोबाइल देखते हैं तो सावधान हो जाइए। इससे निकलने वाली नीली रोशनी इतनी खतरनाक है कि यह आपकी त्वचा की रंगत फीकी करने का दम रखती है। इससे त्वचा को अच्छा खासा नुकसान पहुंचता है। ऑस्ट्रेलिया की बॉन्ड यूनिवर्सिटी के त्वचा से जुड़ी स्थितियों के मुख्य अन्वेषक के डॉ. माइकल फ्रीमैन ने एक अध्ययन में यह दावा किया है।
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अध्ययन के मुतािबक, नीली रोशनी आंखों से दिखाई देने वाले स्पेक्ट्रम का हिस्सा है। सूरज की रोशनी इसका सबसे मजबूत जरिया है। यह लाल-पीली रोशनी के मुकाबले अधिक ऊर्जा वाली होती है। हमारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे फोन, लैपटॉप और टीवी भी इसे उत्सर्जित करते हैं। हालांकि, यह 100-1,000 गुना कम स्तर पर होती है। हम इन उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए इतना वक्त बिताते हैं, इसलिए हमारी आंखों और नींद सहित हमारी सेहत पर इस रोशनी का असर पड़ना लाजिमी हैं।
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बढ़ाती है हाइपरपिग्मेंटेशन
अध्ययन के मुताबिक, नीली रोशनी के संपर्क में आने से मेलेनिन का उत्पादन बढ़ सकता है। यह त्वचा को रंग देने वाला उसका प्राकृतिक रंगद्रव्य है। इसलिए बहुत अधिक नीली रोशनी से हाइपरपिग्मेंटेशन का खतरा बढ़ जाता है। मेलेनिन का अधिक उत्पादन त्वचा पर काले धब्बे बना सकता है। खासकर गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में।
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