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US: छह श्वेत पुलिस अधिकारियों को दो अश्वेतों का उत्पीड़न करने का दोषी ठहराया गया, नवंबर में सुनाई जाएगी सजा

Fri, 04 Aug 2023 10:09 AM IST
देव कश्यप व्लर्ड डेस्क, अमर उजाला, लॉस एंजिल्स।
व्लर्ड डेस्क, अमर उजाला, लॉस एंजिल्स। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 04 Aug 2023 10:09 AM IST
सार

मिसिसिपी के रैंकिन काउंटी शेरिफ विभाग के पांच पूर्व सदस्यों और रिचलैंड पुलिस विभाग के एक पूर्व सदस्य को गुरुवार को कई आरोपों में दोषी ठहराया, जिसमें नागरिक अधिकारों की साजिश, कानून के तहत अधिकारों से वंचित करना और न्याय में बाधा डालना शामिल है।

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Six white Mississippi police officers tortured two innocent Black men
यूएस पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अमेरिका में पुलिस अधिकारियों द्वारा अश्वेत पुरुषों को प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने गुरुवार को कहा कि मिसिसिपी के छह श्वेत पुलिस अधिकारियों ने एक घंटे तक चले हमले के दौरान सेक्स टॉय, टेसर और तलवार का उपयोग करके दो निर्दोष अश्वेत पुरुषों को प्रताड़ित किया और अंत में गोली मारकर एक व्यक्ति के मुंह और गर्दन को लहूलुहान कर दिया। यह क्रूर हमला और उसके बाद की लीपापोती अमेरिकी पुलिसिंग पर नस्लभेद का एक नया दाग है। पुलिस ने एक पीड़ित को सिर्फ इसलिए लहूलुहान कर दिया क्योंकि उसने अपने अपराधों के सबूत छिपाए थे।

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अटॉर्नी जनरल मेरिक गारलैंड ने कहा, इस मामले में पुलिस ने पीड़ितों को प्रताड़ित किया और अकथनीय नुकसान पहुंचाया, उनके नागरिक अधिकारों का घोर उल्लंघन किया, जिनकी उन्हें रक्षा करनी चाहिए थी। साथ ही कानून प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में उन्होंने जो शपथ ली थी उसे शर्मनाक तरीके से तोड़ दिया। मिसिसिपी के रैंकिन काउंटी शेरिफ विभाग के पांच पूर्व सदस्यों और रिचलैंड पुलिस विभाग के एक पूर्व सदस्य को गुरुवार को कई आरोपों में दोषी ठहराया, जिसमें नागरिक अधिकारों की साजिश, कानून के तहत अधिकारों से वंचित करना और न्याय में बाधा डालना शामिल है।
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पुलिसकर्मियों ने कबूला अपना जुर्म
सभी छह पुलिसकर्मियों ने स्वीकार किया कि इस साल 24 जनवरी को संदिग्ध गतिविधि की एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया करते समय उन्होंने एक घर में घुसकर वहां दो अश्वेत लोगों पर निरंतर और अकारण हमला किया था। न्याय विभाग ने कहा, उन्होंने लोगों को हथकड़ी लगाई और उनके साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया और उन्हें रैंकिन काउंटी से बाहर रहने की चेतावनी दी। एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, प्रतिवादियों ने अश्वेत लोगों को लात-घूंसे से, उन्हें 17 बार छेड़ा, उन्हें तरल पदार्थ पीने के लिए मजबूर किया और सेक्स टॉय से उन पर हमला किया। न्याय विभाग (डीओजे) ने कहा कि उन्होंने एक व्यक्ति पर धातु की तलवार और लकड़ी के रसोई उपकरण से भी कई बार हमला किया।
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31 वर्षीय डिप्टी हंटर एलवर्ड ने अपनी बंदूक के चैंबर से एक गोली निकाली और ट्रिगर खींचने से पहले अपने हथियार को एक व्यक्ति के मुंह में डाल दिया। डीओजे ने कहा, एलवर्ड ने दूसरी बार ड्राई-फायर करने के इरादे से स्लाइड को रैक किया। जब एल्वर्ड ने ट्रिगर खींचा, तो बंदूक छूट गई और गोली पीड़ित की जीभ को चीरती हुई, उसके जबड़े को तोड़ती हुई उसकी गर्दन से बाहर निकल गई। एक तरफ गंभीर रूप से घायल पीड़ित का खून बह रहा था, वहीं दूसरी तरफ उन लोगों ने अपने कार्यों को सही ठहराने के लिए सबूत प्लांट करना शुरू कर दिया।

अभियोजक क्रिस्टन क्लार्क ने संवाददाताओं से कहा, गौर करने वाली बात यह है कि पीड़ित गोलीबारी में बच गया, भले ही इन प्रतिवादियों ने उसे काफी समय तक खून से लथपथ फर्श पर पड़ा छोड़ दिया था... क्योंकि वे अपने दुर्व्यवहार को छिपाने के लिए झूठी कहानी बनाने में काफी व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि इन प्रतिवादियों के कार्यों ने न केवल पीड़ितों को महत्वपूर्ण शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि पूरे समुदाय को भी नुकसान पहुंचाया, जिन्हें लगता है कि वे उन पुलिस अधिकारियों पर भरोसा नहीं कर सकते जिनसे उनकी सेवा करने की अपेक्षा की जाती है।

14 नवंबर को सुनाई जाएगी सजा
क्लार्क ने कहा, यह आघात बढ़ गया है क्योंकि यह घटना नस्लीय पूर्वाग्रह और घृणा से प्रेरित था। एल्वर्ड, ब्रेट मैकअल्पिन (52), क्रिश्चियन डेडमन (28), जेफरी मिडलटन (46), डैनियल ओपडाइक (27) और जोशुआ हार्टफील्ड (31) ने अपने खिलाफ सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया। डेडमन, एलवर्ड और ओपडाइक को दिसंबर में एक श्वेत व्यक्ति के खिलाफ क्रूरता के एक अन्य प्रकरण से जुड़े तीन अन्य गंभीर आरोपों में भी दोषी ठहराया गया। सभी छह आरोपियों को 14 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी।


अमेरिका में अल्पसंख्यकों के खिलाफ पुलिस दुर्व्यवहार की भयावह घटनाएं अवांछित बारंबारता के साथ सार्वजनिक चेतना में उभरीं हैं। जॉर्ज फ्लॉयड और ब्रायो टेलर जैसे पीड़ितों के साथ यह घटना इस बात का प्रतीक है कि आलोचक कानून प्रवर्तन के अमेरिकी मॉडल को गलत बताते हैं।

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