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Russia Ukraine Crisis: भारत के रुख को लेकर सिंगापुर के PM ली ने कही बड़ी बात, बोले- हमारे हित दूसरों से अलग

Sun, 21 Aug 2022 07:59 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 21 Aug 2022 07:59 PM IST
सार

सिंगापुर के पीएम ने कहा कि सिंगापुर को अपनी स्थिति में दृढ़ रहना होगा और मौलिक सिद्धांतों की मजबूती से रक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए, चाहे वह राष्ट्र बड़ा हो या छोटा।

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Singapore PM says India abstained from UN voting on Russia invasion of Ukraine due to various considerations
सिंगापुर के पीएम ली - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने रविवार को रूस-यूक्रेन जंग में भारत के रूख की निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत ने यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर मतदान से इसलिए परहेज किया क्योंकि वह मास्को से सैन्य उपकरण खरीदता है। उन्होंने सिंगापुर के नागरिकों से मंदारिन में अपने वार्षिक संबोधन के दौरान ये बातें कहीं। 

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हमारे हित दूसरों से अलग
प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने अपने संबोधन में कहा कि आसियान में सबसे छोटा राष्ट्र होने के नाते सिंगापुर के हित और विचार स्वाभाविक रूप से दूसरों से अलग हैं इसीलिए सिंगापुर ने न केवल रूस के आक्रमण की स्पष्ट रूप से निंदा की है, बल्कि रूस पर हम अपने लक्षित प्रतिबंध लगाने के लिए भी आगे बढ़े हैं। उन्होंने आगे कहा कि सिंगापुर यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की निंदा करता है तो इसका यह मतलब नही है कि सिंगापुर, अमेरिका या रूस का पक्ष नहीं ले रहा है। 
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सिंगापुर के पीएम ने कहा कि सिंगापुर को अपनी स्थिति में दृढ़ रहना होगा और मौलिक सिद्धांतों की मजबूती से रक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए, चाहे वह राष्ट्र बड़ा हो या छोटा। उन्होंने आगे कहा कि अगर एक दिन हम पर हमला किया गया तो कोई भी सिंगापुर के लिए नहीं बोलेगा अगर हम दृढ़ता से खड़े नहीं होगे। 
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भारत ने किया था मतदान से परहेज
गौरतलब है कि भारत ने फरवरी में अमेरिका द्वारा लाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया था, इस प्रस्ताव में यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की कड़ी निंदा की गई थी। भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत और कूटनीति पर जोर देते हुए कहा था कि मतभेदों और विवादों को निपटाने का यही एकमात्र रास्ता है। ली ने कहा कि भारत, चीन, वियतनाम और लाओस ने विभिन्न कारणों से यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। जैसे- भारत रूस से सैन्य उपकरण खरीदता है। इसी तरह इन देशों के अपने-अपने स्वार्थ थे। 


मार्च में, भारत ने यूक्रेन में मानवीय संकट पर रूस द्वारा एक मसौदा प्रस्ताव पर एक वोट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से भाग नहीं लिया। रूस और चीन ने रूसी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था, जबकि भारत उन 13 देशों में शामिल था जिन्होंने भाग नहीं लिया था।

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