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China-US Tension: सिंगापुर के PM बोले- चीन-अमेरिका तनाव दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत, जल्दी खत्म नहीं होने वाला

Wed, 19 Apr 2023 06:31 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 19 Apr 2023 06:31 PM IST
सार

हाल ही में बीजिंग की यात्रा करने वाले सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने बुधवार को कहा कि अमेरिका और चीन के बीच गहरा आपसी संदेह और बुनियादी अविश्वास में जल्द सुधार नहीं होगा। ना केवल चीन के नेताओं बल्कि जनता को भी लगता है कि अमेरिका चीन को घेरने में लगा है।  
 

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Singapore PM Lee says US-China mutual suspicion not to end anytime soon; big trouble for rest of the world
शी जिनपिंग, जो बाइडन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व और ताइवान मुद्दे को लेकर चीन और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव बढ़ता ही जा रहा है। ताइवान में चीन के युद्धाभ्यास के बाद अमेरिका ने भी वहां अपने युद्धपोत 'मिलियस' को भेज दिया है। इस बीच सिंगापुर के पीएम ली ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। ली ने कहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव की इस स्थिति के जल्दी खत्म होने के आसार नहीं हैं। ऐसे में इन वैश्विक महाशक्तियों के बीच का गतिरोध दुनिया के अन्य देशों के लिए बड़ा खतरा बन रहा है।  

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हाल ही में बीजिंग की यात्रा करने वाले सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने बुधवार को कहा कि अमेरिका और चीन के बीच गहरा आपसी संदेह और बुनियादी अविश्वास में जल्द सुधार नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के बारे में चीन के आम लोगों की भी धारणा बिगड़ गई है। ना केवल वहां के नेताओं बल्कि जनता को भी लगता है कि अमेरिका चीन को घेरने में लगा है।  
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चीन-अमेरिका के बीच तनाव दुनिया के लिए खतरनाक
इस दौरान उन्होंने हिंद प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व की जंग, ताइवान  मुद्दे संबंधित अन्य प्रमुख भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए ली ने अपनी संसद में कहा कि प्रत्यक्ष तौर पर भले ही दोनों शक्तियां संघर्ष से बचती हैं, लेकिन उनके बीच शत्रुता और खराब संबंध दोनों के लिए तो बहुत महंगे साबित होंगे ही अन्य देशों के लिए भी ये बड़ी परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच के तनाव के कारण पूर्व की अपेक्षा वर्तमान वैश्विक स्थिति अधिक गंभीर हो गई है। अपने देश को लेकर उन्होंने कहा कि सिंगापुरवासियों को इस स्थिति की गंभीरता को समझने की जरूरत है। हम केवल एक तनाव का सामना नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक साथ कई तूफानों का सामना कर रहे हैं। 
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 चीन को लेकर अमेरिका में पक्ष-विपक्ष एकमत  
 ली ने यह भी कहा कि अमेरिका में जहां डेमोक्रेट और रिपब्लिकन लगभग हर बात पर असहमत हैं, वहीं चीन पर वे एकमत हैं। इसी का परिणाम के है कि बीजिंग के साथ सहयोगपूर्ण संबंध बनाने के प्रयास विफल हो गए हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे का हवाला देते हुए ली ने यह भी कहा कि अमेरिका में 80 प्रतिशत से अधिक वयस्कों का चीन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण है। वे एक प्रतियोगी या भागीदार के बजाय चीन को अमेरिका के दुश्मन के रूप में देखते हैं। 


ली ने कहा कि चीन का विचार है कि उसके लिए अब दुनिया में अपना सही स्थान लेने का समय आ गया है। चीन, हांगकांग, झिंजियांग और तिब्बत जैसे मुद्दों को अपना घरेलू मामला मानता हैं। इन मुद्दों पर चर्चा या किसी समझौते के लिए वे तैयार नहीं है। हालांकि इन दोनों देशों के बीच सबसे खतरनाक फ्लैशप्वाइंट ताइवान है। ली ने कहा कि चीन ताइवान को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानता है। वह वन चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान मुद्दे पर अमेरिका के हस्तक्षेप को गलत मानता है। 

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