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धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किए गए सूफी गायक के समर्थन में विरोध तेज
Tue, 14 Jan 2020 09:25 PM IST
देव कश्यप
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 14 Jan 2020 09:25 PM IST
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सूफी लोकगायक के समर्थन में प्रदर्शन
- फोटो : Twitter AFP
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बांग्लादेश में धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में डिजिटल कानून के तहत गिरफ्तार किए गए एक सूफी लोकगायक के समर्थन में देश के तमाम बुद्धिजीवी और मानवाधिकार संगठन सामने आ गए हैं। शरीयत सरकार नाम के इस 40 साल के मशहूर सूफी गायक को डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत मिरजापुर शहर से 11 जनवरी को गिरफ्तार किया गया। अगले दिन अदालत ने उन्हें तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया। इस सूफी गायक को एक मौलवी की शिकायत पर पकड़ा गया है। यह जानकारी स्थानीय पुलिस अधिकारी सइदुर रहमान ने दी है।
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पुलिस का आरोप है कि शरीयत सरकार ने दिसंबर में अपने एक शो के दौरान कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी और उनका वीडियो यू ट्यूब पर वायरल हो रहा था। पुलिस ने यू ट्यूब से 59 मिनट का वह वीडियो भी हटा दिया है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सूफी गायक के खिलाफ जगह जगह प्रदर्शन हो रहे थे और उनकी गिरफ्तारी की मांग हो रही थी। पुलिस के मुताबिक अगर सूफी गायक पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें 10 साल तक की कैद हो सकती है।
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सूफी गायक की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश के पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने नए डिजिटल कानून को जनविरोधी बताया है और इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है। उनका आरोप है कि इस कानून के बहाने सरकार किसी को भी देशविरोधी प्रचार करने, धार्मिक भावनाएं भड़काने या अशांति फैलाने के नाम पर गिरफ्तार कर सकती है। पिछले साल मई में कवि हैनरी स्वपन को भी इसी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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वहां के अधिकार नाम के संगठन के मुताबिक पिछले साल इस कानून के तहत 29 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चरन कल्चरल सेंटर के अध्यक्ष निखिल दास, संगीत विशेषज्ञ सायमन जकारिया समेत कई सूफी गायकों ने इस गिरफ्तारी का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि इससे तमाम संस्कृतिकर्मी और कलाकारों में एक डर का माहौल है। बांग्लादेश में पिछले कुछ सालों में एक दर्जन से ज्यादा सूफी विचार को मानने वाले लोगों को कट्टर इस्लामिक गुटों के दबाव में जान गंवानी पड़ी है।