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बी3डब्ल्यू कैसा और कितना कामयाब होगा, अब इस पर लगाए जा रहे हैं कयास

Mon, 21 Jun 2021 05:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 21 Jun 2021 05:12 PM IST
सार

जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा है कि जी-7 इस साल सर्दियों तक कुछ व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करेगा। 2022 में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में उन प्रस्तावों को पेश किया जाएगा...

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serious discussion started on the possibilities of the proposed Build Back Better World -B3W project of the G-7
बीआरईआई प्रोजेक्ट - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

जी-7 की प्रस्तावित बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड (बी3डब्ल्यू) परियोजना की संभावनाओं पर अब दुनिया में गंभीर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। इस योजना का एलान हाल में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान किया गया। माना गया है कि यह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव योजना का जवाब है। विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि इस योजना की सफलता इस पर निर्भर है कि प्राइवेट सेक्टर से वित्त जुटाने में कितनी कामयाबी मिलेगी। फिलहाल इस बारे में ज्यादा विवरण उपलब्ध नहीं है। लंदन स्थित थिंक टैंक ओवरसीज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट में रिसर्च एसोसिएट क्रिस हम्फ्री ने ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स से जुड़ी वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि ये बहुत निर्णायक मौका है। जहां तक विकासशील देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का सवाल है, तो उसमें 40 ट्रिलियन डॉलर निवेश की जरूरत है।

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हम्फ्री ने कहा कि उन समाजों की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है। उन्होंने कहा- ‘जिस इन्फ्रास्ट्रक्चर की योजना आज सामने रखी जा रही है, उससे अगले 50 साल तक ऊर्जा की जरूरत का स्वरूप तय हो जाएगा। अगर जी-7 उनमें से कुछ परियोजनाओं को पर्यावरण सम्मत ढंग से निर्मित कर पाया, तो मेरी राय में वह जलवायु रक्षा की दिशा में बहुत बड़ी पहल साबित होगा।’
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जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा है कि जी-7 इस साल सर्दियों तक कुछ व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करेगा। 2022 में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में उन प्रस्तावों को पेश किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि इस पहल के पीछे एक मुख्य नजरिया यह है कि धन जुटाने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच समन्वय काम किया जाए। वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मैथ्यू गुडमैन के मुताबिक जी-7 के सदस्य अपने-अपने देशों के अंदर पेंशन और बीमा फंड से दसियों ट्रिलियन डॉलर जुटा सकते हैं। इतनी रकम जुटाना इस परियोजना के लिए निर्णायक महत्त्व का होगा।
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गुडमैन ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘इन देशों की निगाह दीर्घकालिक परिसंपत्तियों (एसेट) और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर है। ये अच्छी प्रकार की परिसंपत्तियां हैं, जिनसे दीर्घकालिक मुनाफा होता है। इसके बावजूद मुश्किल यह है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण एक मुश्किल उद्यम है और खासकर ऐसा विकासशील देशों में करना और भी चुनौती भरा है।’

विशेषज्ञों के मुताबिक जी-7 देशों की निगाह ऐसी परियोजनाओं पर होगी, जिनसे भविष्य में मुनाफा होने का भरोसा रहेगा। प्राइवेट सेक्टर से धन जुटाना तभी संभव होगा, जब सरकारें उस पर मुनाफे की गारंटी लेंगी। इस क्रम में बहुपक्षीय बैंकों और द्विपक्षीय एजेंसियों की बड़ी भूमिका होगी। तभी इसमें संस्थागत निवेश हो पाएगा।

बी3डब्ल्यू परियोजना पर जल्द से जल्द अमल के लिए सबसे ज्यादा उत्साह अमेरिका दिखा रहा है। उसकी चीन से प्रतिस्पर्धा है। वह अब और ज्यादा इस मामले में चीन से नहीं पिछड़ना चाहता है। चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की शुरुआत 2013 में की थी और अब 150 से ज्यादा देश इसका हिस्सा बन चुके हैँ। दसियों अरब डॉलर का खर्च इस पर हो चुका है। जी-7 का कहना है कि वह अपनी परियोजना को ऊंचे मूल्यों और मजबूत प्रतिमानों के साथ लागू करेगा।


ब्रिटिश थिंक टैंक चैटहाम हाउस से जुड़े विशेषज्ञ जैक बैरी और पैट्रिक श्रोडर के मुताबिक जी-7 देश देश अगर निवेश और परियोजना संचालन में पारदर्शिता बरतें, तो वे अपने प्रोजेक्ट को चीन की परियोजना से अलग दिखा सकेंगे। तभी दुनिया में ये संदेश जाएगा कि ऐसे काम को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की तुलना में बेहतर ढंग से किया जा सकता है। बैरी और श्रोडर की राय है कि ये पहल मांग के आधार पर होनी चाहिए और पर्यावरण सम्मत विकास की धारणा से इसे जुड़ा रहना चाहिए।

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