Serbia Protest: सर्बिया में राष्ट्रपति वूचिच के खिलाफ प्रदर्शन तेज, रेलवे हादसे की बरसी पर भड़का विरोध
सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में राष्ट्रपति अलेक्जांडर वूचिच के समर्थकों और विरोधियों में झड़प के बाद तनाव बढ़ गया। नोवी साद में रेलवे हादसे की पहली बरसी पर हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए न्याय, गिरफ्तार साथियों की रिहाई और जल्द चुनाव की मांग की।
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सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में रविवार को राष्ट्रपति अलेक्जांडर वूचिच के समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखे टकराव की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ने पर सैकड़ों दंगा-रोधी पुलिसकर्मी दोनों समूहों के बीच दीवार बनकर खड़े हो गए। इस दौरान लोगों ने बोतलें और पटाखे एक-दूसरे पर फेंके। यह तनाव उस समय बढ़ा जब एक दिन पहले उत्तरी शहर नोवी साद में रेलवे स्टेशन हादसे की पहली बरसी पर हजारों लोग इकट्ठा हुए। पिछले साल हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी, जिससे शुरू हुआ युवाओं का विरोध आंदोलन अब वूचिच सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक अभियान बन गया है।
बेलग्रेड में प्रदर्शनकारी दिजाना हरका के समर्थन में जुटे, जिनके बेटे स्टेफन हरका की मौत इसी हादसे में हुई थी। उन्होंने रविवार को संसद के पास स्थित वूचिच समर्थकों के टेंट कैंप के बाहर भूख हड़ताल शुरू की। नोवी साद और अन्य छोटे शहरों में भी लोगों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन किए।
क्या है आंदोलनकारियों का आरोप?
मामले में आंदोलनकारियों का आरोप है कि नोवी साद स्टेशन के पुनर्निर्माण में सरकारी भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण ही यह हादसा हुआ, जिसमें स्टेशन की छत गिर गई थी। हरका ने अपने बेटे और बाकी 15 पीड़ितों के लिए न्याय और जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि गिरफ्तार सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए और जल्द चुनाव कराए जाएं, जैसा कि छात्र आंदोलन के नेता मांग रहे हैं।
राष्ट्रपति वूचिच ने लगाया था कैंप
बता दें कि राष्ट्रपति वूचिच ने मार्च में बेलग्रेड में अपने समर्थन में कैसिलैंड नाम का टेंट कैंप लगवाया था, जो अब उनके कार्यालय और संसद के बीच सुरक्षा घेरे की तरह काम कर रहा है। पुलिस लगातार इस इलाके की निगरानी कर रही है, जो आम नागरिकों के लिए बंद है।
इसके बाद हाल के महीनों में सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है। सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है और कई रैलियों को बलपूर्वक खत्म किया गया। वहीं सरकारी मीडिया ने छात्र नेताओं को आतंकवादी बताकर उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।