ईरान में पेट्रोल महंगा: 15% ग्राहकों पर सीधा असर, महंगाई से जूझ रहे लोगों की बढ़ी चिंता; किस पर बढ़ा बोझ?
ईरान ने सबसे ज्यादा पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दीं। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महीनों से जारी तनाव के चलते देश की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है और कीमतों में यह बढ़ोतरी उसी आर्थिक दबाव का एक और संकेत है।
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विस्तार
ईरान ने मंगलवार सुबह तय मासिक कोटे से ज्यादा पेट्रोल खरीदने वालों के लिए कीमत दोगुनी कर दी है। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में यह कदम जरूरी है और अतिरिक्त रकम परिवारों तक पहुंचाई जाएगी। हालांकि, देश पहले ही करीब 67 प्रतिशत की सालाना महंगाई, कमजोर मुद्रा और घटती खरीद क्षमता से जूझ रहा है। जानकारों को डर है कि महंगे पेट्रोल का असर परिवहन और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा, जबकि आम लोगों को आशंका है कि यह बढ़ोतरी आगे और महंगाई का कारण बनेगी। दिसंबर के बाद पेट्रोल की कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है।
पेट्रोल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर
ईरान में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही है और इससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। 2019 में भी पेट्रोल की कीमतों में इसी तरह की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। सरकार की कार्रवाई में कथित तौर पर 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। अमेरिका के साथ तनाव का सीधे तौर पर जिक्र किए बिना सरकार ने अपने ऐलान में "मौजूदा हालात" का हवाला दिया। सरकार ने कहा कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने से मिलने वाली अतिरिक्त रकम परिवारों को दी जाएगी।
110 लीटर के कोटे के बाद दोगुनी कीमत
नई व्यवस्था के तहत जो लोग एक महीने में अपने 110 लीटर (29 गैलन) के तय कोटे से ज्यादा पेट्रोल खरीदेंगे, उन्हें अब प्रति लीटर 100,000 रियाल (लगभग 7 सेंट) चुकाने होंगे। यह कीमत दिसंबर से अब तक चुकाई जा रही दर से दोगुनी है।
दुनिया में सबसे सस्ते पेट्रोल में शामिल, फिर भी बढ़ा दबाव
ईरान में पेट्रोल की कीमतें अभी भी दुनिया में सबसे कम हैं, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी से 9 करोड़ से ज्यादा की आबादी में से बड़ी संख्या में लोगों पर रोजमर्रा के खर्च का दबाव और बढ़ सकता है। देश की मुद्रा पहले ही रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रही है और लोगों की खरीदने की क्षमता लगातार कमजोर हो रही है। सोमवार को अमेरिकी डॉलर 22.2 लाख रियाल पर कारोबार कर रहा था। सरकारी तेल वितरण कंपनी के CEO केरामत वेइस करामी ने सोमवार को कहा कि पेट्रोल की नई दरों का असर करीब 15 प्रतिशत ग्राहकों पर पड़ेगा। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इसकी जानकारी दी।
अगस्त में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची पेट्रोल खपत
CEO ने बताया कि अगस्त में पेट्रोल की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी और यह बढ़कर 145 मिलियन लीटर (38 मिलियन गैलन) प्रतिदिन हो गई थी। इसके मुकाबले देश की घरेलू उत्पादन क्षमता 122 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। मांग और घरेलू उत्पादन के बीच का बाकी अंतर आयात के जरिए पूरा किया जाता है।
पुरानी कारें और कमजोर सार्वजनिक परिवहन बड़ी वजह
पेट्रोल की कीमत बढ़ाने से अत्यधिक खपत को कम करने में मदद मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि ईरान में पेट्रोल की ज्यादा खपत की एक बड़ी वजह पुरानी कारें हैं। इसके अलावा स्पेयर पार्ट्स की स्थिति और अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी ईंधन की खपत बढ़ाने में भूमिका निभाती है।
महंगाई पर और बढ़ सकता है दबाव
हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने से महंगाई का दबाव और बढ़ेगा। देश की सरकारी एजेंसी 'सांख्यिकी केंद्र' के मुताबिक, ईरान पहले से ही करीब 67 प्रतिशत की सालाना महंगाई दर से जूझ रहा है। ईरान में पीढ़ियों से सस्ता पेट्रोल लोगों के लिए लगभग जन्मसिद्ध अधिकार की तरह माना जाता रहा है। यही वजह है कि 1964 में भी पेट्रोल की कीमत बढ़ाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस समय हड़ताल कर रहे टैक्सी ड्राइवरों से निपटने के लिए शाह को सड़कों पर सेना की गाड़ियां उतारनी पड़ी थीं।
पेट्रोल की कीमत बढ़ने पर ईरान के लोगों की प्रतिक्रिया
नई कीमतें लागू होने के करीब एक घंटे बाद 'द एसोसिएटेड प्रेस' ने जिन आठ गैस स्टेशनों का दौरा किया, उनमें से दो स्टेशनों को पंपों पर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बंद कर दिया गया था। बाकी छह स्टेशन खुले हुए थे और हर स्टेशन पर करीब एक दर्जन कारें पेट्रोल भरवाने के लिए कतार में लगी थीं। फिलिंग स्टेशनों के आसपास सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई थी। वहां वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ-साथ सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी मौजूद थे।
लोगों को आगे और कीमत बढ़ने की आशंका
लाइन में खड़े तेहरान के 34 वर्षीय निवासी असगर रहीमी ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी यहीं रुकने वाली नहीं है। रहीमी ने कहा,'इतनी कम रकम से सरकार को गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निपटने में मदद नहीं मिल सकती। यह पहला कदम था। आने वाले महीनों में उन्हें कीमतें फिर बढ़ानी होंगी।'
महंगे पेट्रोल का असर खाने-पीने की चीजों पर पड़ने का डर
तेहरान के एक अन्य निवासी 55 वर्षीय अली सलारी को डर है कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने के बाद ब्रेड और मांस जैसी दूसरी जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। सलारी ने कहा,'जब भी सरकार ने गैस की कीमतों में बदलाव किया है, तब से ऐसा ही होता रहा है।'
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रोजमर्रा का सामान खरीदना भी हुआ मुश्किल
तेहरान के 43 वर्षीय निवासी हामिद मिर्जई ने कहा कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और सिर्फ बीन्स और दाल जैसी जरूरी चीजें खरीदने में भी 100 मिलियन रियाल (73 अमेरिकी डॉलर) तक खर्च हो सकते हैं। मिर्जई ने कहा,'हम सभी के लिए जिंदगी मुश्किल हो गई है। यहां तक कि रोजमर्रा का जरूरी सामान खरीदना भी मुश्किल होता जा रहा है।'उन्होंने आगे कहा,'अगर पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ती हैं, तो हालात और भी खराब हो जाएंगे।'