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अच्छी खबर: भतीजे से 75 साल बाद पाकिस्तान में मिले 92 साल के सरवन सिंह, दोनों देशों के यूट्यूबर ने की मदद
Mon, 08 Aug 2022 11:20 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लाहौर
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लाहौर
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 08 Aug 2022 11:20 PM IST
सार
भारत के पंजाब के 92 वर्षीय सरवन सिंह ने पाकिस्तान के अपने भतीजे से सोमवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में मुलाकात की। सरवन सिंह यहां अपने भाई के बेटे मोहन सिंह को देखते ही भावुक हो गए। उन्होंने उसे काफी देर तक गले लगाए रखा।
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सरवन सिंह।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आज के समय में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन या दुनियाभर की जानकारी का ही साधन नही है, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए कई बिछड़े भी अपनों से मिल सके हैं। एक ऐसा ही मामला आज सामने आया। सोशल मीडिया की मदद से ही पंजाब के रहने वाले 92 साल के सरवन सिंह करीब 75 साल बाद अपने भतीजे से मिलने में सफल हुए जो आजादी के बाद हुए विभाजन के दौरान उनसे बिछड़ गया था।
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भारत के पंजाब के 92 वर्षीय सरवन सिंह ने पाकिस्तान के अपने भतीजे से सोमवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में मुलाकात की। सरवन सिंह यहां अपने भाई के बेटे मोहन सिंह को देखते ही भावुक हो गए। उन्होंने उसे काफी देर तक गले लगाए रखा। इस मौके पर दोनों परिवारों के कुछ सदस्य भी मौजूद थे।
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छह साल की उम्र में परिवार से बिछड़ गए थे मोहन सिंह
गौरतलब है कि बंटवारे के वक्त हुए हिंसक दंगों के समय मोहन सिंह ने अपने परिवार से बिछड़ गए थे। उस समय उनकी उम्र करीब छह साल थी। विभाजन की उस विभीषिका में उन्हें पाकिस्तान में अपने परिवार के 22 लोगों को खोना पड़ा था। हालांकि वे उस समय दंगों से बच गए थे, जिसके बाद उन्हें पाकिस्तान में ही एक मुस्लिम परिवार ने पाला था। हालांकि पाकिस्तान में रहने वाले मोहन सिंह का नाम अब अब्दुल खालिक है।
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दोनों ने साझा की यादें
खालिक के एक रिश्तेदार मोहम्मद नईम ने करतारपुर कॉरिडोर से लौटने के बाद बताया कि खालिक ने अपने चाचा के पैर छुए और कई मिनट तक उन्हें गले लगाए रखा। उन्होंने कहा कि चाचा और भतीजे दोनों ने एक साथ चार घंटे बिताए और यादें साझा कीं। इस दौरान दोनों ने अपने-अपने देशों में रहने के तरीके साझा किए। दोनों के मिलने पर रिश्तेदारों ने उन्हें माला पहनाई और उन पर गुलाब की पंखुड़ियां भी बरसाईं। खालिक के रिश्तेदार जावेद ने इस मौके पर कहा कि हम अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां नहीं कर सकते, लेकिन यह ईश्वर का आशीर्वाद है कि हम 75 साल बाद फिर से मिले। उन्होंने कहा कि सरवन अपने भतीजे के साथ लंबे समय तक रहने के लिए वीजा प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान आ सकते हैं।
यूट्यूबर्स की मदद से 75 साल बाद मिले चाचा-भतीजे
दरअसल, पंजाब के जंडियाला में रहने वाले यूट्यूबर हरजीत सिंह भारत-पाक विभाजन के दौरान हुई विभीषिका और उससे पीड़ितों की कहानियों को डॉक्यूमेंट कर रहे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने मोहन के चाचा सरवन सिंह का इंटरव्यू लेने के बाद हरजीत सिंह ने लगभग आठ महीने पहले मोहन की तलाश शुरू की थी। उनके वीडियो पोस्ट करने के करीबन पांच महीने बाद पाकिस्तानी यूट्यूबर मोहम्मद जाविद इकबाल ने अब्दुल खालिक की कहानी सुनाई। दोनों की कहानी एक दूसरे से मिलती थी। सरवन ने अपने लापता भतीजे के पहचान चिह्नों का उल्लेख करते हुए कहा था कि उसके एक हाथ पर दो अंगूठे थे और उसकी एक जांघ पर एक प्रमुख तिल था। संयोग से, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले पंजाब मूल के एक व्यक्ति ने दोनों वीडियो देखे और रिश्तेदारों को जुड़ने में मदद की।