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US: जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला अमेरिकी शहर बना सिएटल, सिटी काउंसिल में प्रस्ताव पारित

Wed, 22 Feb 2023 07:40 AM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिएटल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिएटल Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 22 Feb 2023 07:40 AM IST
सार

सिएटल सिटी काउंसिल का यह कदम शहर के दक्षिण एशियाई प्रवासियों, विशेष रूप से भारतीय और हिंदू समुदायों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय-अमेरिकी सिएटल सिटी काउंसिल की सदस्य क्षमा सावंत ने कहा, जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई सभी प्रकार के उत्पीड़न से जुड़ी हुई है।

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Seattle becomes first US city to ban caste discrimination after council vote
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अमेरिका में सिएटल शहर जाति आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित करने वाला पहला शहर बन गया है। भारतीय-अमेरिकी नेता एवं अर्थशास्त्री क्षमा सावंत ने सिएटल सिटी काउंसिल में भेदभाव न करने की नीति में जाति को शामिल करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसे एक के मुकाबले छह मतों से पारित कर दिया गया है। क्षमा सावंत के प्रस्ताव को सिएटल के सदन की मंजूरी मिल गई है। अमेरिका में जाति आधारित भेदभाव के मामले पर इस मत परिणाम के दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

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यह कदम शहर के दक्षिण एशियाई प्रवासियों, विशेष रूप से भारतीय और हिंदू समुदायों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत की जाति व्यवस्था दुनिया में सबसे पुरानी है। भारतीय-अमेरिकी सिएटल सिटी काउंसिल की सदस्य क्षमा सावंत ने कहा, जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई सभी प्रकार के उत्पीड़न से जुड़ी हुई है।
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सावंत ने प्रस्ताव पारित होने के बाद कहा, यह आधिकारिक हो गया है। हमारे आंदोलन के कारण सिएटल में जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो देश में पहली बार हुआ है। इस जीत को देशभर में फैलाने के लिए हमें इस आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें ये समझने की जरूरत है कि भले ही अमेरिका में भेदभाव उस तरह नहीं दिखता, जैसा कि दक्षिण एशिया में हर जगह दिखता है, लेकिन यहां भी भेदभाव एक सच्चाई है।  
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अप्रवासी लोगों को करना पड़ता है जातिगत भेदभाव का सामना
उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था हजारों साल पहले की है और उच्च जातियों को कई विशेषाधिकार देती है, लेकिन निचली जातियों का दमन करती है। दलित समुदाय भारतीय जाति व्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर हैं। सावंत ने कहा, जातिगत भेदभाव केवल अन्य देशों में ही नहीं होता है, बल्कि इसका सामना दक्षिण एशियाई अमेरिकी और अन्य अप्रवासी कामकाजी लोगों को करना पड़ता है, जिसमें सिएटल और अमेरिका के अन्य शहर शामिल हैं।

भारत में जातिगत भेदभाव को गैरकानूनी घोषित करने के बाद भी बना हुआ पूर्वाग्रह
उन्होंने कहा कि 70 साल पहले भारत में जातिगत भेदभाव को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था, फिर भी यह पूर्वाग्रह बना हुआ है। हाल के वर्षों में कई अध्ययनों के अनुसार निम्न जातियों के लोगों को उच्च वेतन वाली नौकरियों में कम प्रतिनिधित्व मिला। भले ही भारत ने छुआछूत पर प्रतिबंध लगा दिया है, फिर भी पूरे देश में दलितों को बड़े पैमाने पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जहां सामाजिक उत्थान के उनके प्रयासों को कई बार हिंसक रूप से दबा दिया गया है।


घृणा पर हुई प्रेम की जीत
सिएटल में जातिगत भेदभाव को प्रतिबंधित करने वाले प्रस्ताव में अहम भूमिका निभाने वाले ‘इक्वैलिटी लैब्स’ ने कहा, सिएटल जाति आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित करने वाला देश का पहला शहर बन गया है और इसी के साथ प्रेम की घृणा पर जीत हो गई।

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