SCO Samarkand Summit: एससीओ की समरकंद शिखर बैठक कल से, पश्चिम को चुनौती देंगे चीन और रूस?
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विस्तार
यहां गुरुवार से शुरू हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की दो दिन की शिखर बैठक पर अब दुनिया का ध्यान टिक गया है। अमेरिकी वेबसाइट ब्लूमबर्ग ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि समरकंद शिखर बैठक के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अंतरराष्ट्रीय विश्व व्यवस्था के बारे में अपना वैकल्पिक नजरिया पेश करेंगे। विश्लेषकों ने कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति के कारण समरकंद बैठक को एक खास अहमियत मिल गई है। भारत को अब तक अमेरिकी धुरी के ज्यादा करीब समझा जाता रहा है।
तीन साल पहले कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद शी जिनपिंग पहली बार चीन से बाहर निकल रहे हैं। इस विदेश दौरे में वे उज्बेकिस्तान स्थित समरकंद से पहले बुधवार को कजाखस्तान पहुंच रहे हैं। समरकंद बैठक के दौरान ईरान को एससीओ में शामिल किया जाएगा। वह इस संगठन का नौवां सदस्य होगा। इसके अलावा सदस्यता की बेलारुस और अफगानिस्तान की अर्जी पर यहां विचार होगा। इसके पहले एससीओ का आखिरी विस्तार 2017 में हुआ था, जब भारत और पाकिस्तान को इस संगठन की सदस्यता दी गई थी।
एससीओ की स्थापना चीन के शहर शंघाई में 2001 में हुई थी। तब इसका मकसद मध्य एशिया में चरमपंथी विचारों और आंतकवाद का मुकाबला करना बताया गया था। लेकिन उसके बाद इसके उद्देश्यों में विस्तार होता हो गया है। अब आर्थिक सहयोग से लेकर संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संगठनों के साथ मिल कर काम करना इसके एजेंडे में शामिल हो चुका है। चीन, भारत, और पाकिस्तान के अलावा रूस, कजाखस्तान, किर्गिजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान इसके सदस्य देश हैं। एससीओ का स्थायी दफ्तर बीजिंग में है।
विशेषज्ञों के मुताबिक समरकंद में सबकी निगाहें शी जिनपिंग पर रहेंगी। रिसर्च फर्म त्रिविउम चाइना के सह-संस्थापक ट्रे मैकएवर ने ब्लूमबर्ग से कहा- ‘शी जिनपिंग वैश्विक मामलों को नई दिशा देने की कोशिश में हैं, ताकि पश्चिमी संस्थाओं को केंद्रीय भूमिका से हटा जा सके। वे ऐसे समूहों और संस्थानों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं, जो चीन के हितों और उसकी विश्व दृष्टि के ज्यादा अनुकूल हों।’
चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के स्पीकर ली झानशु ने बीते हफ्ते रूस की यात्रा की थी। रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक वहां उन्होंने कहा था कि रूस और चीन नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) का विस्तार का मुकाबला करेंगे। ली ने कहा- ‘हम उनकी दादागीरी के खिलाफ मिल कर लड़ेंगे।’
एससीओ की बैठक में तुर्किये के राष्ट्रपति रजिब तैयिब एर्दोआन भी आएंगे। बेलारुस और मंगोलिया के राष्ट्रपतियों को भी यहां आमंत्रित किया गया है। उधर पर्यवेक्षकों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति से समरकंद बैठक ये संदेश भेजने में सफल रह सकता है कि दुनिया के प्रमुख उभरते हुए देश मिल कर पश्चिमी एजेंडे को नकार रहे हैं। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि अब एससीओ में शामिल देशों में दुनिया की 42 फीसदी आबादी रहती है, जबकि उनकी साझा जीडीपी वैश्विक जीडीपी के 25 फीसदी के बराबर है।
थिंक टैंक यूरेशिया ग्रुप से जुड़े एक अमेरिकी सलाहकार ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि शी जिनपिंग लगातार अपनी विदेश नीति में गैर-पश्चिमी देशों को तरजीह दे रहे हैं। इसीलिए महामारी के बाद उन्होंने अपनी विदेश यात्रा में पहला मुकाम एससीओ की शिखर बैठक बनाया है।