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अफगानिस्तान: तालिबान के हाथ न लग जाए लड़कियों की जानकारी, इसलिए स्कूल संस्थापक ने जला दिए सारे रिकॉर्ड्स
Sun, 22 Aug 2021 02:12 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्रा
Updated Sun, 22 Aug 2021 02:12 PM IST
सार
अफगानिस्तान में लड़कियों का स्कूल चला रहीं शबाना बासिज-रसिख का वीडियो वायरल। इसमें वे छात्राओं के दस्तावेज जलाती दिख रही हैं।
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सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में शबाना अपनी छात्राओं के रिकॉर्ड्स जलाती दिख रही हैं।
- फोटो : Twitter/@sbasijrasikh
विस्तार
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के निकलने और तालिबान का शासन कायम होने के बाद मानवाधिकार संगठन एक बार फिर देश में रहने वाली लड़िकयों-महिलाओं को लेकर चिंता जता रहे हैं। लोगों में डर है कि पहले कि तरह इस बार भी तालिबानी शासन में लड़कियों को सरेआम सजा दी जाएगी। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए बोर्डिंग स्कूल की स्थापना करने वाली शबाना बसिज-रसिख को अपनी छात्राओं के रिकॉर्ड्स जलाते देखा जा सकता है। हालांकि, शबाना का तर्क है कि ऐसा करने की वजह उनकी पहचान मिटाना नहीं, बल्कि बच्चियों और उनके परिवारों को तालिबान से बचाना है।
गौरतलब है कि 20 साल पहले तक जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था, तब शरिया कानून के तहत नियमों के उल्लंघन पर महिलाओं को कोड़े मारने से लेकर सरेआम मौत की सजा भी दी जाती थी। हालांकि, देश में अमेरिकी सेना आने और लोकतांत्रिक सरकार बनने के बाद ऐसी घटनाएं न के बराबर पहुंच गईं। इस बीच तालिबान के सत्ता में वापस आने के डर से अब महिलाओं में डर बैठा है।
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ट्वीट में क्या बोलीं शबाना?: लड़कियों के स्कूल की सह-संस्थापक शबाना बासिज-रसिख ने ट्वीट में कहा, "करीब 20 साल बाद सिर्फ लड़कियों के लिए बनाए गए स्कूल की स्थापक के तौर पर अब मैं अपनी छात्राओं के रिकॉर्ड्स जला रही हूं, उनकी पहचान मिटाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और उनके परिवारों को बचाने के लिए। जैसे अफगानिस्तान पर दुनिया का ध्यान नाटकीय होता जा रहा है और अफगान नागरिक बाहर निकल रहे हैं, ऐसे में वो लड़कियां जिनके पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है, उनके लिए निवेश करने की आग मेरे अंदर और भड़कती जा रही है।"
शबाना ने आगे कहा, "मैं मेरी छात्राएं, साथी सभी सुरक्षित हैं। लेकिन अभी भी यहां कई हैं, जो खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। मैं उनके लिए चिंतित हूं।" छात्राओं के दस्तावेज जलाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "मेरा ध्यान मेरी छात्राओं की सुरक्षा पर है। इसलिए इस बारे में ज्यादा नहीं कहूंगी।"
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गौरतलब है कि 20 साल पहले तक जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था, तब शरिया कानून के तहत नियमों के उल्लंघन पर महिलाओं को कोड़े मारने से लेकर सरेआम मौत की सजा भी दी जाती थी। हालांकि, देश में अमेरिकी सेना आने और लोकतांत्रिक सरकार बनने के बाद ऐसी घटनाएं न के बराबर पहुंच गईं। इस बीच तालिबान के सत्ता में वापस आने के डर से अब महिलाओं में डर बैठा है।
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Nearly 20 years later, as the founder of the only all-girls boarding school in Afghanistan, I’m burning my students’ records not to erase them, but to protect them and their families.
2/6 pic.twitter.com/JErbZCSPuC — Shabana Basij-Rasikh (@sbasijrasikh) August 20, 2021
ट्वीट में क्या बोलीं शबाना?: लड़कियों के स्कूल की सह-संस्थापक शबाना बासिज-रसिख ने ट्वीट में कहा, "करीब 20 साल बाद सिर्फ लड़कियों के लिए बनाए गए स्कूल की स्थापक के तौर पर अब मैं अपनी छात्राओं के रिकॉर्ड्स जला रही हूं, उनकी पहचान मिटाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और उनके परिवारों को बचाने के लिए। जैसे अफगानिस्तान पर दुनिया का ध्यान नाटकीय होता जा रहा है और अफगान नागरिक बाहर निकल रहे हैं, ऐसे में वो लड़कियां जिनके पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है, उनके लिए निवेश करने की आग मेरे अंदर और भड़कती जा रही है।"
शबाना ने आगे कहा, "मैं मेरी छात्राएं, साथी सभी सुरक्षित हैं। लेकिन अभी भी यहां कई हैं, जो खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। मैं उनके लिए चिंतित हूं।" छात्राओं के दस्तावेज जलाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "मेरा ध्यान मेरी छात्राओं की सुरक्षा पर है। इसलिए इस बारे में ज्यादा नहीं कहूंगी।"