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ट्रंप के टैरिफ पर घमासान: 12 अमेरिकी राज्यों ने कोर्ट में दी चुनौती, कहा- व्यापार नीति पर हो रही मनमानी

Thu, 22 May 2025 04:13 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 22 May 2025 04:13 AM IST
सार

अमेरिका के 12 राज्यों ने राष्ट्रपति ट्रंप के आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर उनके नीति के खिलाफ संघीय अदालत में चुनौती दी है। राज्यों का आरोप है कि ट्रंप ने अधिकारों से बाहर जाकर फैसले लिए, जिससे व्यापार नीति अस्थिर हुई। 

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Saying Trump exceeded his authority, 12 states ask court to strike down his sweeping tariffs News In Hindi
डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के खिलाफ वहां के राज्य लगातार से अपनी आवाज बुलंद कर रहे है। इसी बीच ट्रंप की तरफ से लगाए गए व्यापक आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर देश के 12 राज्यों ने बुधवार को संघीय अदालत में चुनौती दी। इन राज्यों का कहना है कि ट्रंप ने अपनी सीमाओं से बाहर जाकर एकतरफा फैसले लिए, जिससे अमेरिकी व्यापार नीति उनकी मर्जी पर निर्भर हो गई और आर्थिक अस्थिरता फैल गई।

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बता दें कि पिछले महीने ट्रंप ने अमेरिका के पुराने और बड़े व्यापार घाटे को कम करने के लिए दुनिया के अधिकांश देशों पर 10% तक के आयात शुल्क लगाए थे। कुछ देशों पर यह शुल्क 50% तक भी गया। ट्रंप ने इसे लिबरेशन डे कहा और इसे 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईपीपीए) के तहत लागू किया। इन टैरिफ का असर कनाडा, चीन और मैक्सिको से आयात पर भी पड़ा। मामले में ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया कि यह कदम अवैध आव्रजन और नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के लिए भी जरूरी था।
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ट्रंप के खिलाफ अमेरिकी राज्यों की दलील
न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में बुधवार को इस मामले की सुनवाई हुई। यह अदालत अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े नागरिक मामलों की सुनवाई करती है। इस फैसले को भविष्य में सुप्रीम कोर्ट तक ले जाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। मामले में राज्यों की दलील है कि आईईपीपीए ट्रंप को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता और 49 सालों से चल रहा व्यापार घाटा कोई असामान्य आपात स्थिति नहीं है। ओरेगन राज्य के वकील ब्रायन मार्शल ने कहा कि यह कोई नई या असाधारण समस्या नहीं है।

ट्रंप प्रशासन की ओर से अजीबोगरीब तर्क
वहीं ट्रंप प्रशासन की ओर से सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट शुमेट ने दलील दी कि ऐसे आपात फैसलों की वैधता पर फैसला कांग्रेस को करना चाहिए, न कि अदालत को। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व राष्ट्रपति निक्सन ने 1971 में इसी तरह 1917 के कानून के तहत टैरिफ लगाए थे। इस पर न्यायाधीश जेन रेस्टानी ने सवाल उठाया कि क्या इसका मतलब है कि अदालतें राष्ट्रपति की कितनी भी पागलपन भरी आपात घोषणाओं को नहीं रोक सकतीं?

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कौन-कौन से राज्यों ने दी चुनौती
गौरतलब है कि ट्रंप की टैरिफ नीति के खिलाफ कोर्ट जाने वाले 12 राज्यों में एरिज़ोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट शामिल है।

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