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सऊदी अरब ने पाकिस्तान को उधार पर तेल की आपूर्ति रोकी, समाप्त हो चुका है दोनों पक्षों के बीच का करार
Sat, 08 Aug 2020 07:55 PM IST
Rohit Ojha
पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद
Published by: Rohit Ojha
Updated Sat, 08 Aug 2020 07:55 PM IST
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter
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पाकिस्तान को सऊदी अरब से उधार पर कच्चा तेल मई से नहीं मिला है। साथ ही उसे आपूर्तिकर्ता की ओर से इस सुविधा को जारी रखने के बारे में अभी कोई जवाब भी नहीं मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच इस बाबत 3.2 अरब डॉलर के समझौते की मियाद दो महीने पहले ही समाप्त हो चुकी है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने नवंबर, 2018 में पाकिस्तान की बाहरी क्षेत्र की चिंता को दूर करने के लिए 6.2 अरब डॉलर के पैकेज की घोषणा की थी।
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सऊदी अरब से 3.2 अरब डॉलर की कच्चे तेल की सुविधा इसी पैकेज का हिस्सा है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब से इस व्यवस्था के विस्तार का आग्रह किया है, लेकिन अभी तक उसे इस पर जवाब नहीं मिला है। पेट्रोलियम विभाग के प्रवक्ता साजिद काजी ने कहा कि यह करार मई में समाप्त हो गया। वित्त विभाग इसके नवीकरण का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सऊदी अरब सरकार से जवाब का इंतजार है।
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यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब उसका अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) कार्यक्रम भी पिछले पांच माह से तकनीकी तौर पर स्थगित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी ऋण को वापस करने तथा तेल सुविधा की मियाद समाप्त होने से केंद्रीय बैंक के आधिकारिक मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। यह भंडार शुद्ध रूप से कर्ज लेकर बनाया गया है। बजट अनुमानों के अनुसार सरकार को वित्त वर्ष 2020-21 में न्यूनतम एक अरब डॉलर का कच्चा तेल मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान का वित्त वर्ष जुलाई से शुरू होता है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने समय से चार महीने पहले एक अरब डॉलर का सऊदी अरब का ऋण चुका दिया है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यदि पाकिस्तान को चीन से इसी तरह की सुविधा मिलती है तो वह दो अरब डॉलर का नकद ऋण भी लौटाने की स्थिति में होगा। सऊदी अरब डॉलर से तीन अरब डॉलर के नकदी समर्थन तथा सालाना 3.2 अरब डॉलर की कच्चे तेल की सुविधा में दो साल के लिए नवीकरण का प्रावधान है।