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ASEAN: 'ऊर्जा व्यापार लगातार सिकुड़ रहा', ट्रंप के टैरिफ के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने जताई चिंता
Tue, 28 Oct 2025 08:38 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुआलालंपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुआलालंपुर
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 28 Oct 2025 08:38 AM IST
सार
जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा व्यापार पर लगातार रोक लगाई जा रही है, जिससे तेल बाजार में गड़बड़ी हो रही है। सिद्धांतों को चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : एक्स/डॉ.एस जयशंकर
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विस्तार
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को आसियान सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में ऊर्जा क्षेत्र के लगातार सिकुड़ने पर चिंता जाहिर की। एस जयशंकर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और भारत के संबंधों में थोड़ा रूखापन आया हुआ है और अमेरिका द्वारा भारत पर रूस से तेल न खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इस दबाव के तहत अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। बीते हफ्ते ट्रंप ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर बैन लगा दिया, जिससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।
जयशंकर बोले- सिद्धांतों को चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा
आसियान सम्मेलन के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अपने बयान में बाजारों तक पहुंच, सप्लाई चेन की दिक्कतों को लेकर भी चिंता जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया को आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए और गाजा और यूक्रेन जैसे संघर्षों को सुलझाने की कोशिशें तेज करनी चाहिए क्योंकि इन संघर्षों की वजह से खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति खतरे में पड़ गई है। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा व्यापार पर लगातार रोक लगाई जा रही है, जिससे तेल बाजार में गड़बड़ी हो रही है। सिद्धांतों को चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें- Donald Trump: 'तीसरी बार चुनाव लड़ना पसंद करूंगा, मेरे पास बेहतरीन आंकड़े..,' अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बयान
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अमेरिका द्वारा रूस से कच्चा तेल न खरीदने के लिए भारत पर बनाया जा रहा दबाव
अमेरिका की व्यापार नीति का जिक्र किए बिना जयशंकर ने कहा कि सप्लाई चेन की विश्वसनीयता और बाजार पहुंच चिंता बढ़ा रही है। गौरतलब है कि एक तरफ जहां ट्रंप प्रशासन द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिए गए हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंख्ला प्रभावित हुई है। वहीं दूसरी तरफ चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों और भारी मशीनरी के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। साल 2025 में भारत के ऊर्जा आयात का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा रूसी कच्चे तेल का था। हालांकि बीते कुछ समय में अमेरिका ने भारत पर रूस से कच्चा तेल न खरीदने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिका आरोप है कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। हालांकि भारत ने इससे साफ इनकार किया है और भारत का कहना है कि वह अपने लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है।
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जयशंकर बोले- सिद्धांतों को चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा
आसियान सम्मेलन के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अपने बयान में बाजारों तक पहुंच, सप्लाई चेन की दिक्कतों को लेकर भी चिंता जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया को आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए और गाजा और यूक्रेन जैसे संघर्षों को सुलझाने की कोशिशें तेज करनी चाहिए क्योंकि इन संघर्षों की वजह से खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति खतरे में पड़ गई है। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा व्यापार पर लगातार रोक लगाई जा रही है, जिससे तेल बाजार में गड़बड़ी हो रही है। सिद्धांतों को चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा है।
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अमेरिका द्वारा रूस से कच्चा तेल न खरीदने के लिए भारत पर बनाया जा रहा दबाव
अमेरिका की व्यापार नीति का जिक्र किए बिना जयशंकर ने कहा कि सप्लाई चेन की विश्वसनीयता और बाजार पहुंच चिंता बढ़ा रही है। गौरतलब है कि एक तरफ जहां ट्रंप प्रशासन द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिए गए हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंख्ला प्रभावित हुई है। वहीं दूसरी तरफ चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों और भारी मशीनरी के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। साल 2025 में भारत के ऊर्जा आयात का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा रूसी कच्चे तेल का था। हालांकि बीते कुछ समय में अमेरिका ने भारत पर रूस से कच्चा तेल न खरीदने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिका आरोप है कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। हालांकि भारत ने इससे साफ इनकार किया है और भारत का कहना है कि वह अपने लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है।