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Russia-India: पुतिन की भारत के साथ अहम सैन्य समझौते को मंजूरी, बना संघीय कानून; जानें क्या है RELOS एग्रीमेंट?

Mon, 15 Dec 2025 10:22 PM IST
लव गौर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को Published by: लव गौर Updated Mon, 15 Dec 2025 10:22 PM IST
सार

Russia-India Ties: राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के साथ अहम सैन्य समझौते को संघीय कानून बनाया है। ऐसे में जानिए क्या है रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (RELOS) एग्रीमेंट? 

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Russian President Putin has signed a key military agreement with India into federal law
रूस के राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी की फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के साथ इस साल की शुरुआत में किए गए एक अहम सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर कर उसे संघीय कानून का दर्जा दे दिया है। यह जानकारी क्रेमलिन के आधिकारिक कार्यालय (चांसरी) ने दी। भारत और रूस के बीच हुआ रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (RELOS) समझौता रूस की संसद के दोनों सदनों से पहले ही मंजूरी पा चुका था।
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दोनों देशों के बीच रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (RELOS) समझौते को स्टेट ड्यूमा (निचले सदन) ने 2 दिसंबर को और काउंसिल ऑफ फेडरेशन (ऊपरी सदन) ने 8 दिसंबर को मंजूरी दी थी। इस समझौते को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था ताकि इसे संघीय कानून बनाया जा सके।
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क्या है RELOS समझौता?
रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (RELOS) समझौता भारत और रूस के बीच सैन्य टुकड़ियों, युद्धपोतों, और सैन्य विमानों की आवाजाही और आपसी रसद आपूर्ति सहायता की प्रक्रिया तय करता है। रूसी कैबिनेट की ओर से जारी व्याख्यात्मक नोट के अनुसार, यह समझौता केवल सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी लॉजिस्टिक व्यवस्था को भी नियंत्रित करेगा।
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जानें कहां-कहां होगा इस्तेमाल?
इस तय प्रक्रिया का इस्तेमाल संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मानवीय सहायता, आपदा राहत कार्य और आपसी सहमति से अन्य परिस्थितियों में किया जाएगा।


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सैन्य सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
रूसी संसद (ड्यूमा) की वेबसाइट पर जारी नोट में कहा गया है कि इस समझौते के लागू होने से भारत और रूस एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र का उपयोग कर सकेंगे, दोनों देशों के युद्धपोत एक-दूसरे के बंदरगाहों पर ठहर सकेंगे और द्विपक्षीय सैन्य सहयोग और मजबूत होगा। यह महत्वपूर्ण सैन्य समझौता दोनों देशों के बीच अनुमोदन दस्तावेजों के आदान-प्रदान के बाद औपचारिक रूप से लागू होगा। विशेषज्ञों की मानें तो यह समझौता भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा और रक्षा सहयोग को अगले स्तर पर ले जाएगा।

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