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Russia-Ukraine War: यूक्रेन को यूरोप के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र पर हमले की आशंका क्यों, रूस का क्या दावा?
Thu, 06 Jul 2023 06:52 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 06 Jul 2023 06:52 PM IST
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जापोरिझ्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग को एक साल से भी ज्यादा हो गए हैं। दोनों ही देश युद्ध को रोकने के लिए राजी नहीं हैं। इस बीच, यूक्रेन ने दावा किया है रूस जापोरिझ्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र (ZNPP) पर हमला कर सकता है। हालांकि, रूस ने यूक्रेन के आरोपों से इनकार किया है।ZNPP यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इस पर किसी तरह का हमला एक बड़ी परमाणु आपदा का खतरा हो सकता है। इस बीच हमें जानना जरूरी है कि आखिर जापोरिझ्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर यूक्रेन का दावा क्या है? आरोपों पर रूस ने क्या जवाब दिया? जापोरिझ्झिया संयंत्र कहां है? संयंत्र में विस्फोट होने से क्या होगा? क्या जापोरिझ्झिया दूसरा चेरनोबिल बन सकता है? इसका रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या असर हो सकता है?
जापोरिझ्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र
- फोटो :
ANI
जापोरिझ्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर यूक्रेन का दावा क्या है?
रूस-यूक्रेन शुरू होने के बाद से लंबे समय से यूक्रेन परमाणु खतरे से जूझ रहा है। जेलेंस्की ने अब यह दावा किया है कि रूस हथियार दागकर नहीं, बल्कि ZNPP को ही हथियार बनाकर परमाणु घटना को अंजाम दे सकता है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बयान में कहा, 'रूसी सैनिकों ने ZNPP की छतों पर विस्फोटक जैसी वस्तुएं रखी हैं।' जेलेंस्की ने कहा कि पूरी दुनिया को अब यह एहसास होना चाहिए कि लोगों की सुरक्षा पूरी तरह से संयंत्र में कब्जा करने वालों के कार्यों पर निर्भर करती है।
रूस-यूक्रेन शुरू होने के बाद से लंबे समय से यूक्रेन परमाणु खतरे से जूझ रहा है। जेलेंस्की ने अब यह दावा किया है कि रूस हथियार दागकर नहीं, बल्कि ZNPP को ही हथियार बनाकर परमाणु घटना को अंजाम दे सकता है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बयान में कहा, 'रूसी सैनिकों ने ZNPP की छतों पर विस्फोटक जैसी वस्तुएं रखी हैं।' जेलेंस्की ने कहा कि पूरी दुनिया को अब यह एहसास होना चाहिए कि लोगों की सुरक्षा पूरी तरह से संयंत्र में कब्जा करने वालों के कार्यों पर निर्भर करती है।
पुतिन पर पत्रकार का चौंकाने वाला दावा
- फोटो :
Twitter @MissJacque_line
आरोपों पर रूस ने क्या जवाब दिया?
यूक्रेन के इन आरोपों पर रूस की भी प्रतिक्रिया आई है। रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को कहा कि संयंत्र में स्थिति काफी तनावपूर्ण है। यूक्रेन द्वारा यह दावा करके आलोचना से ध्यान हटाने की कोशिश की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि संयंत्र पर कीव शासन द्वारा तोड़फोड़ की आशंका अधिक है। इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
यूरोप के विश्लेषकों का मानना है कि रूस यह दावा कर सकता है कि बिजली संयंत्र में कोई भी विस्फोट उसके अपने विस्फोटकों के बजाय यूक्रेनी गोलाबारी का परिणाम था। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बुधवार को कहा कि ZNPP में खदानों या विस्फोटकों के कोई संकेत नहीं हैं, लेकिन पुष्टि के लिए साइट पर अतिरिक्त पहुंच का अनुरोध किया गया है। आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा, 'रिएक्टर इकाइयों तीन और चार की छतों तक पहुंच आवश्यक है, साथ ही टरबाइन हॉल और संयंत्र की शीतलन प्रणाली के कुछ हिस्सों तक एजेंसी की पहुंच भी जरूरी है।'
यूक्रेन के इन आरोपों पर रूस की भी प्रतिक्रिया आई है। रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को कहा कि संयंत्र में स्थिति काफी तनावपूर्ण है। यूक्रेन द्वारा यह दावा करके आलोचना से ध्यान हटाने की कोशिश की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि संयंत्र पर कीव शासन द्वारा तोड़फोड़ की आशंका अधिक है। इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
यूरोप के विश्लेषकों का मानना है कि रूस यह दावा कर सकता है कि बिजली संयंत्र में कोई भी विस्फोट उसके अपने विस्फोटकों के बजाय यूक्रेनी गोलाबारी का परिणाम था। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बुधवार को कहा कि ZNPP में खदानों या विस्फोटकों के कोई संकेत नहीं हैं, लेकिन पुष्टि के लिए साइट पर अतिरिक्त पहुंच का अनुरोध किया गया है। आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा, 'रिएक्टर इकाइयों तीन और चार की छतों तक पहुंच आवश्यक है, साथ ही टरबाइन हॉल और संयंत्र की शीतलन प्रणाली के कुछ हिस्सों तक एजेंसी की पहुंच भी जरूरी है।'
ZNPP परमाणु संयंत्र
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
संयंत्र कहां है?
ZNPP एनरहोदर शहर के बगल में, निप्रो नदी के किनारे स्थित है। यह संयंत्र इकाइयों और उत्पादन की संख्या के हिसाब से यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। पिछले साल फरवरी में जब यूक्रेन और रूस के बीच जंग शुरू हुई थी तो जापोरिझ्झिया का एक बड़ा क्षेत्र रूसी सेना के कब्जे में चला गया था।
यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा ऑपरेटर एनरगोएटम के प्रमुख पेट्रो कोटिन के अनुसार, संयंत्र ज्यादातर यूक्रेनी कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाता है। युद्ध शुरू हुआ, तो संयंत्र की छह रिएक्टर इकाइयों में से एक को रखरखाव के लिए बंद कर दिया गया था। रूसी सेना द्वारा संयंत्र पर कब्जा करने के बाद, यूक्रेनी श्रमिकों ने बाकी इकाइयों को भी बंद कर दिया। हालांकि, पिछली गर्मियों में संयंत्र के आसपास जंग जारी रही।
ZNPP एनरहोदर शहर के बगल में, निप्रो नदी के किनारे स्थित है। यह संयंत्र इकाइयों और उत्पादन की संख्या के हिसाब से यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। पिछले साल फरवरी में जब यूक्रेन और रूस के बीच जंग शुरू हुई थी तो जापोरिझ्झिया का एक बड़ा क्षेत्र रूसी सेना के कब्जे में चला गया था।
यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा ऑपरेटर एनरगोएटम के प्रमुख पेट्रो कोटिन के अनुसार, संयंत्र ज्यादातर यूक्रेनी कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाता है। युद्ध शुरू हुआ, तो संयंत्र की छह रिएक्टर इकाइयों में से एक को रखरखाव के लिए बंद कर दिया गया था। रूसी सेना द्वारा संयंत्र पर कब्जा करने के बाद, यूक्रेनी श्रमिकों ने बाकी इकाइयों को भी बंद कर दिया। हालांकि, पिछली गर्मियों में संयंत्र के आसपास जंग जारी रही।
चेर्नोबिल परमाणु हादसे का इतिहास
- फोटो :
iStock
क्या यह एक और चेरनोबिल हो सकता है?
फिलहाल संयंत्र के रिएक्टरों को ठंडा कर दिया गया है। यदि दावा किए गए विस्फोटकों में विस्फोट होता है, तो इससे एक ठंडा रिएक्टर खुल जाएगा। इस स्थिति में निकलने वाले ईंधन हवा में घुल जाएगा जिससे कुछ विकिरण फैलेगी।
विशेषज्ञ कहते हैं, 'रिएक्टर से एक गुबार निकलेगा जहां विकिरण एयरोसोलाइज हो जाएगा। यह एक विकिरण क्षेत्र बनाएगा जहां आपको अगले 40 वर्षों में कैंसर की अधिक आशंका होगी। हालांकि, इसका प्रभाव 1986 में घटी चेरनोबिल घटना की तरह नहीं होगा। बता दें कि 26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेर्नोबिल के न्यूक्लियर पावर प्लांट में भयानक विस्फोट हुआ था। यह धमाका इतना विनाशकारी था कि कुछ ही घंटे में यहां काम करने वाले 32 कर्मचारियों की मौत हो गई थी जबकि न्यूक्लियर रेडिएशन से सैकड़ों कर्मचारी बुरी तरह जल गए थे।
लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी के परमाणु विशेषज्ञ चेरिल रोफ़र कहते हैं, 'ZNPP के छह रिएक्टर बिल्कुल भी चेरनोबिल रिएक्टर की तरह नहीं हैं और उनमें एक ही तरह की दुर्घटना नहीं हो सकती है।'
फिलहाल संयंत्र के रिएक्टरों को ठंडा कर दिया गया है। यदि दावा किए गए विस्फोटकों में विस्फोट होता है, तो इससे एक ठंडा रिएक्टर खुल जाएगा। इस स्थिति में निकलने वाले ईंधन हवा में घुल जाएगा जिससे कुछ विकिरण फैलेगी।
विशेषज्ञ कहते हैं, 'रिएक्टर से एक गुबार निकलेगा जहां विकिरण एयरोसोलाइज हो जाएगा। यह एक विकिरण क्षेत्र बनाएगा जहां आपको अगले 40 वर्षों में कैंसर की अधिक आशंका होगी। हालांकि, इसका प्रभाव 1986 में घटी चेरनोबिल घटना की तरह नहीं होगा। बता दें कि 26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेर्नोबिल के न्यूक्लियर पावर प्लांट में भयानक विस्फोट हुआ था। यह धमाका इतना विनाशकारी था कि कुछ ही घंटे में यहां काम करने वाले 32 कर्मचारियों की मौत हो गई थी जबकि न्यूक्लियर रेडिएशन से सैकड़ों कर्मचारी बुरी तरह जल गए थे।
लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी के परमाणु विशेषज्ञ चेरिल रोफ़र कहते हैं, 'ZNPP के छह रिएक्टर बिल्कुल भी चेरनोबिल रिएक्टर की तरह नहीं हैं और उनमें एक ही तरह की दुर्घटना नहीं हो सकती है।'