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रूस-यूक्रेन युद्ध : भले जंग फतह कर लें, पर यूक्रेनियों को कैसे जीत पाएंगे पुतिन... सत्ता की अलग-अलग सोच

Wed, 02 Mar 2022 05:57 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च डेस्क, कीव/जिनेवा।
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, कीव/जिनेवा। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 02 Mar 2022 05:57 AM IST
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सार
युद्ध अकसर राष्ट्रीय चेतना के पुनरुद्धार के लिए एक ट्रिगर का काम करता है। ब्रिटिश ऐतिहासिक समाजशास्त्री एंथनी डी स्मिथ ने लिखा था कि युद्ध ‘इतिहास की हर अवधि में राष्ट्रों और जातीय समुदायों, दोनों के निर्माण में सबसे शक्तिशाली कारकों में से एक है। पूर्वी यूक्रेन और क्रीमिया में 2014-15 के रूसी सैन्य टकराव का ठीक यही प्रभाव था।
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Russia Ukraine war Update : Vladimir Putin may win war, but how will He win Ukrainian Peoples Heart, Know Different thinking of power
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की - फोटो : एएनआई-पीटीआई (फाइल)

विस्तार

रूस के हमले के जवाब में यूक्रेन के कड़े प्रतिरोध के बाद अब सवाल उठने लगा है कि अगर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यह जंग फतह कर भी ली तो क्या वह अपने पड़ोसी पर पूरी तरह शासन कर पाएंगे। इस पर जानकारों का जवाब है कि सफल होकर भी पुतिन वह सब हासिल नहीं कर पाएंगे, जो वह चाहते हैं, क्योंकि संबंधित देश की जनता की इच्छा के विरुद्ध उसे कभी 'जीता' नहीं जा सकता। 



कनाडा की न्यूफाउंडलैंड मेमोरियल यूनिवर्सिटी के डॉ एंटोन ओलेनिक के मुताबिक, कोई देश कितनी अच्छी तरह शासित होता है, यह उसकी संस्कृति पर निर्भर करता है। विशेषज्ञ यूक्रेनियन और रूसी सत्ता को अलग-अलग मानते हैं। शिक्षित और संपन्न यूक्रेनी सत्ता के वितरण में असमानता के प्रति विशेष रूप से कम सहनशीलता रखते हैं। यूक्रेन में पुतिन का संभावित शासन इसलिए समस्याग्रस्त है क्योंकि निरंकुश सत्ता पर अस्वीकृति यूक्रेनी संस्कृति में गहरे पैठी हुई है।


पुतिन के लिए सत्ता मतलब बल
युद्ध अकसर राष्ट्रीय चेतना के पुनरुद्धार के लिए एक ट्रिगर का काम करता है। ब्रिटिश ऐतिहासिक समाजशास्त्री एंथनी डी स्मिथ ने लिखा था कि युद्ध ‘इतिहास की हर अवधि में राष्ट्रों और जातीय समुदायों, दोनों के निर्माण में सबसे शक्तिशाली कारकों में से एक है। पूर्वी यूक्रेन और क्रीमिया में 2014-15 के रूसी सैन्य टकराव का ठीक यही प्रभाव था। बहरहाल, यूक्रेन में जंग इस बात की पुष्टि करती है कि रूस के लिए सत्ता का मतलब बल है। पुतिन के लिए उस मानसिकता को यूक्रेनियों के जेहन में डालना असंभव नहीं तो बहुत मुश्किल काम होगा। 

यूरोपीय संसद में जेलेंस्की की मार्मिक अपील...आंसुओं में छलका दर्द और गुस्सा
रूस के खिलाफ समर्थन जुटाने में लगे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की भावनात्मक अपील ने मंगलवार को दुनिया का दिल पिघला दिया। यूरोपीय संसद में उनका भाषण इतना मार्मिक था कि उसे सुनकर आहत हुई जर्मन अनुवादक बीच में ही फूट-फूटकर रोने लगी। जेलेंस्की का शब्द चयन और बोलने का अंदाज इतना जबरदस्त था कि न सिर्फ यूक्रेन की भावनाएं तमाम सरहदों के पार पहुंच गईं बल्कि उन्होंने अपने नागरिकों में भी जोश भर दिया। 

यहां तक कि सोशल मीडिया पर खुद रूसियों के दिलों में भी जेलेंस्की ने जगह बना ली। सामरिक विशेषज्ञों के मुताबिक, जेलेंस्की अपने बयानों में इतने प्रभावी रहे हैं कि जनसंपर्क के मोर्चे पर उन्होंने व्लादिमीर पुतिन को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है। उधर, ब्रिटेन में भी यूक्रेन की त्रासदी आंसुओं के जरिये बह निकली। लंदन में पीएम बोरिस जॉनसन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने देश की रक्षा पर सवाल पूछ रही यूक्रेनी पत्रकार सिसकियां नहीं रोक पाई और रूस द्वारा मचाई गई बर्बादी पर दर्द फूट पड़ा। 

डारिया कालेनियुक ने जॉनसन से कहा कि आज हम रो रहे हैं क्योंकि यह नहीं जानते कि हमें कहां भागना है। मंगलवार को छलका यह दर्द चंद लोगों तक ही सीमित नहीं है। असल में तो पूरा यूक्रेन इस समय खून के आंसू रो रहा है। यह दर्द कभी बमबारी झेल रहे नागरिकों तो कभी यूरोप जा रहे शरणार्थियों के चेहरों पर साफ झलक रहा है।

सवाल में ही छिपा दर्दभरा जवाब
इस बीच, सबसे बड़ा सवाल है कि जिस यूरोप की संसद में जेलेंस्की ने अपनी अपील से सबको लुभाया, क्या वह महज हथियार देकर और रूस पर प्रतिबंध बढ़ाकर इन आंसुओं को रोक पाएगा। इसका जवाब खुद कालेनियुक के सवाल में ही मिल गया, जब उन्होंने कहा कि ब्रिटेन समेत सभी पश्चिमी देश तीसरे विश्व युद्ध के डर से जमीन पर यूक्रेन की मदद करने से हिचक रहे हैं जबकि यह जंग तो शुरू हो चुकी है। इस पर पश्चिम का बचाव करते हुए जॉनसन ने कहा कि संकट को अन्य सैन्य माध्यमों से हल किया जा सकता है।

जेलेंस्की बोले, हम यूक्रेनी हैं हमें कोई नहीं तोड़ सकता
यूरोपीय संसद में ऑनलाइन संबोधन में यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, हम यूक्रेनी बेहद मजबत हैं, कोई हमें तोड़ नहीं सकता। हम अपनी जमीन और आजादी के लिए लड़ रहे हैं। हम रूस से युद्ध नहीं चाहते लेकिन अपने अधिकारों और अस्तित्व के लिए लड़ते रहेंगे। जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों से जोर देते हुए कहा, इस घड़ी में साबित करे कि आप हमारे साथ हैं। साबित करें कि आप वास्तव में यूरोपीय हैं।

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