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दुख को बनाया ताकत: युद्ध में पत्नी-बेटी ने गंवाई जान, अब यूक्रेनी बच्चों को बचाने के मिशन पर सैनिक
Thu, 15 Oct 2026 04:44 AM IST
नितिन गौतम
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 15 Oct 2026 04:44 AM IST
सार
यूक्रेन के एक सैनिक ने युद्ध में अपनी पत्नी और बच्ची को खोने के बाद अपने निजी दुख को ताकत में बदल दिया है और वह सैनिक यूक्रेनी बच्चों को बचाने के मिशन पर है। आइए जानते हैं इस सैनिक की कहानी..
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रूस-यूक्रेन युद्ध (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्रीपिक
विस्तार
यूक्रेनी सैनिक येवहेन ओवचारोव अपने घर से 300 मील दूर पूर्वी मोर्चे पर तैनात थे। 3 जुलाई की रात 9:45 बजे उन्होंने अपने मिलिट्री मैप पर एक 500 पाउंड के रूसी ग्लाइड बम को सुमी शहर की ओर बढ़ते देखा। घबराहट में उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी नतालिया ओवचारोव को फोन किया। नतालिया ने शांत रहने को कहा और बताया कि वह और दोनों बेटियां पार्क से खुशी-खुशी घर लौट रही हैं। उनकी 13 साल की बड़ी बेटी वेरोनिका थोड़ी पीछे थी, जबकि 5 साल की छोटी बेटी मिलानो मां के पास थी।
लेकिन, एक मिनट बाद ही अचानक फोन कट गया। फिर छह मिनट तक कोई संपर्क नहीं हो पाया। जब रात 9:52 बजे फोन की घंटी बजी तो लाइन पर दूसरी तरफ वेरोनिका थी जो बुरी तरह चीख रही थी। उसने बताया कि वह खून से लथपथ है और छोटी बहन मिलानो जमीन पर बिल्कुल बेजान पड़ी है। उसने रोते हुए कहा-कोई मदद नहीं कर रहा है, डैडी। कृपया आकर हमें बचा लीजिए। इतना सुनते ही येवहेन तुरंत कार से चार घंटे का सफर तय कर अपने शहर सुमी पहुंचे। अस्पताल पहुंचकर उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी और छोटी बेटी इस दुनिया में नहीं रहीं।
अकेलापन और दर्द के बीच जीने की जद्दोजहद
इस खौफनाक हादसे के बाद वेरोनिका और उसके पिता को कुछ हफ्तों के लिए कार्पेथियन पहाड़ों में स्थित एक रिकवरी सेंटर भेजा गया, जहां युद्ध से बिखरे परिवारों को मानसिक संबल दिया जाता है। इस दौरान वेरोनिका पैनिक अटैक और सदमे से जूझती रही। येवहेन अपना गम भुलाने के लिए जिम में पसीना बहाते और मनोवैज्ञानिक की मदद से खुद को संभालते। पत्नी और बेटी की मौत के बाद वह सिर्फ यही सोचते रहते थे कि अगर वहां होते, तो शायद अपनों को बचा लेते। धीरे-धीरे उन्होंने अपने इस दर्द को एक नई ताकत में बदलने का फैसला किया। उनका मिशन सिर्फ अपने परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए नहीं, बल्कि अन्य यूक्रेनी बच्चों की जान बचाने की लड़ाई बन चुका है।
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यूक्रेन को आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की जरूरत
पिछले महीने कीव के एक अस्पताल में घायल बच्चों से मिलने के दौरान येवहेन की मुलाकात तत्कालीन रक्षा मंत्री माइखाइलो फेदोरोव से हुई। फेदोरोव ने महसूस किया कि येवहेन की व्यक्तिगत त्रासदी दुनिया को यह बताने का एक बड़ा जरिया बन सकती है कि यूक्रेन को आधुनिक वायु-रक्षा प्रणालियों और जेट विमानों की तुरंत आवश्यकता क्यों है।
दरअसल, रूस ने यूक्रेन की वायु-रक्षा प्रणालियों की कमी का फायदा उठाते हुए मोर्चे से दूर बसे शहरों को निशाना बनाया। अकेले जुलाई के महीने में रूस ने रिकॉर्ड 8,300 ग्लाइड बम दागे, जिनका मुकाबला करने के लिए यूक्रेन के पास पर्याप्त लड़ाकू विमान और एयर-डिफेंस सिस्टम नहीं हैं।
युद्ध का सबसे खौफनाक और हिंसक दौर
येवहेन 21 सितंबर को बेटी वेरोनिका के साथ स्वीडिश सरकार और अधिकारियों से मिलने के लिए स्टॉकहोम पहुंचे। वह जानते हैं कि अपनी कहानी बयां करने से उनका बीता कल वापस नहीं आएगा, लेकिन दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि रूस ने उनके परिवार और देश के मासूम बच्चों के साथ क्या किया है। येवहेन ओवचारोव का संघर्ष सिर्फ एक पिता की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है।
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लेकिन, एक मिनट बाद ही अचानक फोन कट गया। फिर छह मिनट तक कोई संपर्क नहीं हो पाया। जब रात 9:52 बजे फोन की घंटी बजी तो लाइन पर दूसरी तरफ वेरोनिका थी जो बुरी तरह चीख रही थी। उसने बताया कि वह खून से लथपथ है और छोटी बहन मिलानो जमीन पर बिल्कुल बेजान पड़ी है। उसने रोते हुए कहा-कोई मदद नहीं कर रहा है, डैडी। कृपया आकर हमें बचा लीजिए। इतना सुनते ही येवहेन तुरंत कार से चार घंटे का सफर तय कर अपने शहर सुमी पहुंचे। अस्पताल पहुंचकर उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी और छोटी बेटी इस दुनिया में नहीं रहीं।
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अकेलापन और दर्द के बीच जीने की जद्दोजहद
इस खौफनाक हादसे के बाद वेरोनिका और उसके पिता को कुछ हफ्तों के लिए कार्पेथियन पहाड़ों में स्थित एक रिकवरी सेंटर भेजा गया, जहां युद्ध से बिखरे परिवारों को मानसिक संबल दिया जाता है। इस दौरान वेरोनिका पैनिक अटैक और सदमे से जूझती रही। येवहेन अपना गम भुलाने के लिए जिम में पसीना बहाते और मनोवैज्ञानिक की मदद से खुद को संभालते। पत्नी और बेटी की मौत के बाद वह सिर्फ यही सोचते रहते थे कि अगर वहां होते, तो शायद अपनों को बचा लेते। धीरे-धीरे उन्होंने अपने इस दर्द को एक नई ताकत में बदलने का फैसला किया। उनका मिशन सिर्फ अपने परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए नहीं, बल्कि अन्य यूक्रेनी बच्चों की जान बचाने की लड़ाई बन चुका है।
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यूक्रेन को आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की जरूरत
पिछले महीने कीव के एक अस्पताल में घायल बच्चों से मिलने के दौरान येवहेन की मुलाकात तत्कालीन रक्षा मंत्री माइखाइलो फेदोरोव से हुई। फेदोरोव ने महसूस किया कि येवहेन की व्यक्तिगत त्रासदी दुनिया को यह बताने का एक बड़ा जरिया बन सकती है कि यूक्रेन को आधुनिक वायु-रक्षा प्रणालियों और जेट विमानों की तुरंत आवश्यकता क्यों है।
दरअसल, रूस ने यूक्रेन की वायु-रक्षा प्रणालियों की कमी का फायदा उठाते हुए मोर्चे से दूर बसे शहरों को निशाना बनाया। अकेले जुलाई के महीने में रूस ने रिकॉर्ड 8,300 ग्लाइड बम दागे, जिनका मुकाबला करने के लिए यूक्रेन के पास पर्याप्त लड़ाकू विमान और एयर-डिफेंस सिस्टम नहीं हैं।
युद्ध का सबसे खौफनाक और हिंसक दौर
येवहेन 21 सितंबर को बेटी वेरोनिका के साथ स्वीडिश सरकार और अधिकारियों से मिलने के लिए स्टॉकहोम पहुंचे। वह जानते हैं कि अपनी कहानी बयां करने से उनका बीता कल वापस नहीं आएगा, लेकिन दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि रूस ने उनके परिवार और देश के मासूम बच्चों के साथ क्या किया है। येवहेन ओवचारोव का संघर्ष सिर्फ एक पिता की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है।