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Russia-Ukraine Crisis: यूक्रेन को नाटो में शामिल करने का क्यों विरोध कर रहा है रूस? इसकी संभावना क्या है?
Mon, 31 Jan 2022 01:08 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 31 Jan 2022 01:08 PM IST
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
- फोटो :
Agency (File Photo)
विस्तार
रूस ने यूक्रेन को नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) में शामिल नहीं किए जाने की मांग की है। रूस का कहना है नाटो यूक्रेन से नजदीकी बढ़ा रहा है। रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने रविवार को दावा किया कि यूक्रेन के न चाहने के बाद भी नाटो उसे अपने गठबंधन में शामिल करना चाहता है। हालांकि नाटो सदस्य देश यूक्रेन के पक्ष में हैं। ऐसे में रूस और यूक्रेन के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। रूस के आक्रमण की आशंका को देखते हुए ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने यूरोपीय देशों को सीमाओं पर और अधिक नाटो सैनिकों की तैनाती की मांग की है।सवाल यह भी उठ रहे हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के मद्देनजर आपसी रक्षा समझौते के तहत गठित नाटो जिसने लंबे समय तक पश्चिमी हितों का प्रतिनिधित्व किया और यूरोप में रूस के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए काम करता रहा है क्या अब उसे पूर्व की ओर विस्तार करना चाहिए? नाटो के संस्थापक लेखों में घोषणा की गई है कि कोई भी यूरोपीय देश जो सदस्यता के लिए गठबंधन के मानदंडों को पूरा करने में सक्षम है, वह इसमें शामिल हो सकता है। इसमें यूक्रेन भी शामिल है।
रूस-अमेरिका शिखर सम्मेलन : हाथ मिलाते जो बाइडन और व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो)
- फोटो :
PTI
रूस को क्या है आपत्ति?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शब्दों में, नाटो का पूर्व की ओर जाना वादों को तोड़ने जैसा है। बीते साल दिसबंर में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था ‘आपने (नाटो) 1990 के दशक में हमसे वादा किया था कि पूर्व की ओर एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगें। आपने हमें बेशर्मी से धोखा दिया।’
जबकि इस बारे में अमेरिका का कहना है कि नाटो के विस्तार पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं था। लेकिन रूस का कहना है कि यह प्रतिबंध था और इसलिए पुतिन यूक्रेन के नाटो में शामिल होने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।
कहानी यहां से शुरू होती है
जब 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ, तो नाटो के विस्तार को लेकर सवाल तब भी थे। पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य जैसे देश साम्यवादी नियंत्रण से उभर रहे देशों पर अमेरिका अपना प्रभाव मजबूत करने की तलाश में था। दूसरी तरफ ये देश मान रहे थे कि यदि रूस फिर से आक्रामक हो जाए तो अमेरिका उनकी रक्षा कर सकता है। जबकि रूस शुरू से ही नाटो को अपने क्षेत्र की सीमाओं के करीब आने पर आपत्ति जताता रहा। 1997 में, रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने तब के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से यह गारंटी लेने की कोशिश की थी कि नाटो किसी भी पूर्व सोवियत गणराज्य को नहीं जोड़ेगा, लेकिन क्लिंटन ने ऐसा करने से मना कर दिया।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शब्दों में, नाटो का पूर्व की ओर जाना वादों को तोड़ने जैसा है। बीते साल दिसबंर में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था ‘आपने (नाटो) 1990 के दशक में हमसे वादा किया था कि पूर्व की ओर एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगें। आपने हमें बेशर्मी से धोखा दिया।’
जबकि इस बारे में अमेरिका का कहना है कि नाटो के विस्तार पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं था। लेकिन रूस का कहना है कि यह प्रतिबंध था और इसलिए पुतिन यूक्रेन के नाटो में शामिल होने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।
कहानी यहां से शुरू होती है
जब 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ, तो नाटो के विस्तार को लेकर सवाल तब भी थे। पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य जैसे देश साम्यवादी नियंत्रण से उभर रहे देशों पर अमेरिका अपना प्रभाव मजबूत करने की तलाश में था। दूसरी तरफ ये देश मान रहे थे कि यदि रूस फिर से आक्रामक हो जाए तो अमेरिका उनकी रक्षा कर सकता है। जबकि रूस शुरू से ही नाटो को अपने क्षेत्र की सीमाओं के करीब आने पर आपत्ति जताता रहा। 1997 में, रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने तब के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से यह गारंटी लेने की कोशिश की थी कि नाटो किसी भी पूर्व सोवियत गणराज्य को नहीं जोड़ेगा, लेकिन क्लिंटन ने ऐसा करने से मना कर दिया।
nato
नाटो का विस्तार कब-कब हुआ है?
1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में नाटो का तीन बार विस्तार हुआ। पहले चेक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड को जोड़ गया। फिर सात और देश इसमें शामिल हुए जिसमें एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे पूर्व सोवियत गणराज्य शामिल हैं। 2009 में आखरी बार अल्बानिया और क्रोएशिया इसके सदस्य देश बने हैं।
नाटो पर विस्तार से लिखने वाले एक अमेरिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेम्स गोल्डगियर के बयान के मुताबिक ‘ अमेरिका ने मध्य और पूर्वी यूरोप में स्थिति को स्थिर करने और उन्हें पश्चिम में लाने के लिए जितना अधिक प्रयास किया, रूस ने उतना ही विरोध किया।’
1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में नाटो का तीन बार विस्तार हुआ। पहले चेक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड को जोड़ गया। फिर सात और देश इसमें शामिल हुए जिसमें एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे पूर्व सोवियत गणराज्य शामिल हैं। 2009 में आखरी बार अल्बानिया और क्रोएशिया इसके सदस्य देश बने हैं।
नाटो पर विस्तार से लिखने वाले एक अमेरिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेम्स गोल्डगियर के बयान के मुताबिक ‘ अमेरिका ने मध्य और पूर्वी यूरोप में स्थिति को स्थिर करने और उन्हें पश्चिम में लाने के लिए जितना अधिक प्रयास किया, रूस ने उतना ही विरोध किया।’
यूक्रेन और रूस के बीच तनाव
- फोटो :
Agency
यूक्रेन क्यों महत्वपूर्ण है?
यूरोप में रूस के बाद यूक्रेन सबसे बड़ा पूर्व सोवियत गणराज्य है। यह देश 1991 में यूएसएसआर से अलग होने के बाद से गठबंधन वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रूस और यूक्रेन के रिश्ते तब खराब हो गए जब 2014 में रूस ने यूक्रेन से क्रीमिया को अलग कर दिया। क्रीमिया में रूसी बोलने वाली आबादी बहुसंख्यक है और इन्होंने जनमत संग्रह में रूस के साथ जाने के लिए वोट किया था। यूक्रेन और पश्चिम के देश क्रीमिया को रूस में शामिल करने को अवैध मानते हैं। तब से यूक्रेनी बलों और रूसी समर्थक सैनिकों के बीच निम्न-स्तरीय लड़ाई जारी है।
इसलिए रूस ने पिछले महीने मांग की थी कि अमेरिका को नाटो को पूर्व की ओर विस्तार से रोकना चाहिए और पूर्व सोवियत राज्यों को गठबंधन में शामिल होने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इसके स्थान को देखते हुए रूस के लिए यूक्रेन का विशेष महत्व है। यह रूस और पूर्वी यूरोपीय संघ के राज्यों के बीच में है। साथ ही इसका प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक महत्व, जिसे अक्सर पूर्व सोवियत साम्राज्य के 'ताज का गहना' के रूप में देखा जाता है। पुतिन लंबे समय से कह रहे हैं कि उनका मानना है कि यूक्रेनियन और रूसी एक ही लोग हैं, जो भाषा, संस्कृति और धर्म से एकजुट हैं। जुलाई 2021 में, उन्होंने दोनों देशों के बीच ‘ऐतिहासिक एकता’ के बारे में एक लंबा निबंध लिखा।
यूरोप में रूस के बाद यूक्रेन सबसे बड़ा पूर्व सोवियत गणराज्य है। यह देश 1991 में यूएसएसआर से अलग होने के बाद से गठबंधन वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रूस और यूक्रेन के रिश्ते तब खराब हो गए जब 2014 में रूस ने यूक्रेन से क्रीमिया को अलग कर दिया। क्रीमिया में रूसी बोलने वाली आबादी बहुसंख्यक है और इन्होंने जनमत संग्रह में रूस के साथ जाने के लिए वोट किया था। यूक्रेन और पश्चिम के देश क्रीमिया को रूस में शामिल करने को अवैध मानते हैं। तब से यूक्रेनी बलों और रूसी समर्थक सैनिकों के बीच निम्न-स्तरीय लड़ाई जारी है।
इसलिए रूस ने पिछले महीने मांग की थी कि अमेरिका को नाटो को पूर्व की ओर विस्तार से रोकना चाहिए और पूर्व सोवियत राज्यों को गठबंधन में शामिल होने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इसके स्थान को देखते हुए रूस के लिए यूक्रेन का विशेष महत्व है। यह रूस और पूर्वी यूरोपीय संघ के राज्यों के बीच में है। साथ ही इसका प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक महत्व, जिसे अक्सर पूर्व सोवियत साम्राज्य के 'ताज का गहना' के रूप में देखा जाता है। पुतिन लंबे समय से कह रहे हैं कि उनका मानना है कि यूक्रेनियन और रूसी एक ही लोग हैं, जो भाषा, संस्कृति और धर्म से एकजुट हैं। जुलाई 2021 में, उन्होंने दोनों देशों के बीच ‘ऐतिहासिक एकता’ के बारे में एक लंबा निबंध लिखा।
व्हाइट हाउस, अमेरिका
- फोटो :
Pixabay
अमेरिका ने पहले भी कोशिश की
दूसरी तरफ अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए यूक्रेन एक संभावित शक्तिशाली प्रतीक है जो रूस से अलग हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2000 के दशक की शुरुआत में, राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनने की कोशिश की लेकिन रूस के साथ तनाव बढ़ने के डर से फ्रांस और जर्मनी ने इसका विरोध किया। जेम्स गोल्डगियर के मुताबिक नाटो के विस्तार को लेकर रूस हमेशा चिंता में रहा। पोलैंड और चेक गणराज्य का जाना एक बात थी, लेकिन यूक्रेन को लेकर रूस को ज्यादा फिक्र रही है।
क्या यूक्रेन जल्दी नाटो में शामिल हो सकता है?
जानकारों का मानना है कि ऐसा करने के लिए यूक्रेन को इंतजार करना पड़ सकता है। नाटो में शामिल होने वाले इच्छुक सदस्य को ‘सदस्यता कार्य योजना’ के माध्यम से शामिल होने की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देने से पहले विभिन्न शर्तों को पूरा करने के लिए कहा जाता है। लेकिन रूस के साथ राजनीतिक जटिलताओं को देखते हुए नाटो सहयोगियों ने अभी तक यूक्रेन को इसकी अनुमति नहीं दी है। कुछ हद तक ऐसी पेशकश करने में अभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई दे रही है। नाटो में यूक्रेन की सदस्यता पर रूस के विरोध के कारण नाटो की ‘ओपन-डोर’ नीति पर अमेरिका और नाटो को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।
दूसरी तरफ अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए यूक्रेन एक संभावित शक्तिशाली प्रतीक है जो रूस से अलग हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2000 के दशक की शुरुआत में, राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनने की कोशिश की लेकिन रूस के साथ तनाव बढ़ने के डर से फ्रांस और जर्मनी ने इसका विरोध किया। जेम्स गोल्डगियर के मुताबिक नाटो के विस्तार को लेकर रूस हमेशा चिंता में रहा। पोलैंड और चेक गणराज्य का जाना एक बात थी, लेकिन यूक्रेन को लेकर रूस को ज्यादा फिक्र रही है।
क्या यूक्रेन जल्दी नाटो में शामिल हो सकता है?
जानकारों का मानना है कि ऐसा करने के लिए यूक्रेन को इंतजार करना पड़ सकता है। नाटो में शामिल होने वाले इच्छुक सदस्य को ‘सदस्यता कार्य योजना’ के माध्यम से शामिल होने की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देने से पहले विभिन्न शर्तों को पूरा करने के लिए कहा जाता है। लेकिन रूस के साथ राजनीतिक जटिलताओं को देखते हुए नाटो सहयोगियों ने अभी तक यूक्रेन को इसकी अनुमति नहीं दी है। कुछ हद तक ऐसी पेशकश करने में अभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई दे रही है। नाटो में यूक्रेन की सदस्यता पर रूस के विरोध के कारण नाटो की ‘ओपन-डोर’ नीति पर अमेरिका और नाटो को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।