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Black Sea: 'मिसाइल-ड्रोन्स से हमला...', काला सागर में रूसी तेल टैंकरों में आग की घटना पर तुर्किये ने जताया शक

Sat, 29 Nov 2025 01:38 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 29 Nov 2025 01:38 PM IST
सार

यूक्रेन ने रूस से संघर्ष शुरू होने के बाद कई रूसी पोतों को समुद्री ड्रोन और विस्फोटक उपकरणों के जरिए निशाना बनाया था। हालांकि, उसके अभियान मुख्य तौर पर काला सागर के उत्तरी हिस्से तक ही सीमित रहे हैं।

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काला सागर में तेल टैंकर में आग। - फोटो : Video Screengrab

विस्तार

काला सागर में रूस की शैडो फ्लीट (गोपनीय बेड़े) का हिस्सा माने जाने वाले दो तेल टैंकरों में लगी आग की घटना पर तुर्किये के अधिकारियों की तरफ से चौंकाने वाली बात सामने आई है। अधिकारियों को अंदेशा है कि यह तेल टैंकर मिसाइल, ड्रोन्स या बारूदी सुरंग की चपेट में आए हैं। 
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बता दें कि तेल टैंकर काइरोस और विराट को शुक्रवार शाम कुछ ही मिनटों के अंतराल में धू-धूकर जल उठे थे। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किए गए। दोनों जहाजों के सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। इस पर तुर्किये के परिवहन और इन्फ्रास्ट्रक्चर मामलों के मंत्री अब्दुलकादिर उरालोग्लु ने बताया कि राहत सेवाओं को पहले सूचना मिली कि काइरोस शायद किसी बारूदी सुरंग से टकराया है, इसके तुरंत बाद विराट पर विस्फोट की खबर मिली।
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Black Sea Tanker Fire: काले सागर में दो टैंकरों पर हमले के बाद लगी आग, सभी क्रू सदस्य सुरक्षित; जांच के आदेश
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उरालोग्लु ने एनटीवी को बताया, “हमारी टीमों ने संकेत दिए कि दूसरे जहाज पर भी विस्फोट हुए और ये बाहरी हस्तक्षेप के कारण हुए।” उन्होंने कहा, “बाहरी हस्तक्षेप के रूप में जो बातें पहले दिमाग में आती हैं, वे हैं बारूदी सुरंग, मिसाइल, समुद्री पोत या ड्रोन। अभी हमारे पास ज्यादा ज्यादा पुख्ता जानकारी नहीं है।”

ओपनसैंक्शंस डेटाबेस, जो कि प्रतिबंधों को चकमा देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं की निगरानी करता है, उसके मुताबिक यह तेल टैंकर रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली शैडो फ्लीट (गोपनीय बेड़े) का हिस्सा हैं। यूक्रेन ने रूस से संघर्ष शुरू होने के बाद कई रूसी पोतों को समुद्री ड्रोन और विस्फोटक उपकरणों के जरिए निशाना बनाया था। हालांकि, उसके अभियान मुख्य तौर पर काला सागर के उत्तरी हिस्से तक ही सीमित रहे हैं।
 

तुर्किये के समुद्री मामलों के महानिदेशालय के मुताबिक, गाम्बिया के झंडे वाला काइरोस तट से लगभग 28 नॉटिकल मील (52 किमी) दूर काला सागर में आग की चपेट में आया। वह रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह की ओर जा रहा था और खाली था। समुद्री प्राधिकरण ने बताया कि इसके करीब एक घंटे बाद दूसरा टैंकर विराट भी तुर्किये के तट से लगभग 35 नॉटिकल मील (64 किमी) दूर हमले का शिकार हुआ। इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई। 

तुर्किये ने बताया कि बचाव दलों को मौके पर भेजा गया। विराट  पर सवार सभी 20 क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया, हालांकि इंजन रूम से घना धुआं उठने की सूचना मिली। वहीं, काइरोस पर सवार 25 क्रू सदस्यों को भी सुरक्षित बचाया गया। वेसलफाइंडर वेबसाइट के मुताबिक, विराट तेल टैंकर 4 नवंबर को बोस्फोरस के उत्तर में लंगर डाले हुए था, जबकि काइरोस की आखिरी ज्ञात लोकेशन 26 नवंबर को दार्डानेल्स जलडमरूमध्य के दक्षिण में दर्ज हुई थी।

अमेरिका ने इस साल जनवरी में विराट टैंकर पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और कनाडा ने भी प्रतिबंध लगाए। इसी तरह, यूरोपीय संघ ने काइरोस को जुलाई में प्रतिबंधित किया था। इसके बाद ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड ने भी कार्रवाई की।

क्या होती है शैडो फ्लीट, काम कैसे करती है?
ओपनसैंक्शंस के मुताबिक, “शैडो टैंकर फ्लीट प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए, तीसरे देशों के झंडों का इस्तेमाल करते हैं और मालिकाना हक छिपाने के लिए काफी जटिल संरचनाएं बुनते हैं, ताकि उनकी पहचान उजागर न हो। वेबसाइट के मुतबिक, पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच यह शैडो फ्लीट उसके लिए अरबों डॉलर की आय का स्रोत बनी हुई है। हालांकि, यह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।”

बताया गया है कि 2018 में बना विराट अनियमित और जोखिमपूर्ण नौवहन तरीकों का इस्तेमाल करता रहा है और पहले बारबाडोस, कोमोरोस, लाइबेरिया और पनामा के झंडों के अंतर्गत चल चुका है। इसी तरह 2002 में बना काइरोस पहले पनामा, ग्रीस और लाइबेरिया के झंडों के तहत पंजीकृत हो चुका है।

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