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रूस का पहला तैरता एटमी रिएक्टर उत्तरी ध्रुव की ओर रवाना
Sat, 24 Aug 2019 02:17 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sat, 24 Aug 2019 02:17 AM IST
सार
- उत्तरी पूर्व साइबेरिया के लिए पांच हजार किलोमीटर के सफर पर रवाना हुआ
- यह अगले साल के अंत तक काम करने लगेगा
- रूस में इसी महीने हुए एक विस्फोट के बाद पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
रूस ने दुनिया का पहला तैरता एटमी रिएक्टर लॉन्च कर दिया है और पर्यावरणविदों की सख्त खतरे वाली चेतावनी के बाद शुक्रवार को इसे उत्तरी ध्रुव की ओर रवाना कर दिया। एटमी ईंधन से लैस एल्काडेमिक लोमोनोसोच नामक तैरता एटमी रिएक्टर मुरमांस्क के आर्कटिक बंदरगाह से उत्तरी पूर्व साइबेरिया के लिए पांच हजार किलोमीटर के सफर पर रवाना हुआ। इसके चार से छह सप्ताह में अपनी यात्रा पूरी करने का अनुमान है।
रूस ने कहा कि यह पूरे वर्ष बर्फ से जमे रहने वाले हिस्से में परंपरागत एटमी संयंत्र स्थापित करने का एक प्रयास है। अगर यह सफल होता है तो भविष्य में इस रिएक्टर को दूसरे देशों को भी बेचा जाएगा। रूस ने इसका निर्माण 2006 में शुरू किया था। यह अगले साल के अंत तक काम करने लगेगा।
- 21000 टन है संयंत्र का वजन
- 35 मेगावाट क्षमता के दो रिएक्टर हैं
- 69 क्रू के सदस्य रिएक्टर पर मौजूद
विशेषज्ञों ने कहा-‘न्यूक्लीयर टाइटेनिक’
पर्यावरण विज्ञानी इसे न्यूक्लीयर टाइटेनिक बता रहे हैं। इनका मानना है कि इस कदम से उत्तरी ध्रुव के क्षेत्र में जलवायु को गंभीर खतरा होगा। इससे रूस में इसी महीने हुए एक विस्फोट के बाद पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
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रूस ने कहा कि यह पूरे वर्ष बर्फ से जमे रहने वाले हिस्से में परंपरागत एटमी संयंत्र स्थापित करने का एक प्रयास है। अगर यह सफल होता है तो भविष्य में इस रिएक्टर को दूसरे देशों को भी बेचा जाएगा। रूस ने इसका निर्माण 2006 में शुरू किया था। यह अगले साल के अंत तक काम करने लगेगा।
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- 21000 टन है संयंत्र का वजन
- 35 मेगावाट क्षमता के दो रिएक्टर हैं
- 69 क्रू के सदस्य रिएक्टर पर मौजूद
विशेषज्ञों ने कहा-‘न्यूक्लीयर टाइटेनिक’
पर्यावरण विज्ञानी इसे न्यूक्लीयर टाइटेनिक बता रहे हैं। इनका मानना है कि इस कदम से उत्तरी ध्रुव के क्षेत्र में जलवायु को गंभीर खतरा होगा। इससे रूस में इसी महीने हुए एक विस्फोट के बाद पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
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रूसी रक्षा शो में दिखेगा ब्रह्मोस मिसाइल का जलवा
रूस में अगले सप्ताह प्रारंभ होने वाले अंतरराष्ट्रीय विमानन और अंतरिक्ष शो मैक्स 2019 में भारत के प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी ब्रह्मोस एयरोस्पेस और हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को मिली है। इस शो में विश्व की मशहूर रक्षा और एयरोस्पेस कंपनियां भाग लेती हैं।
रूस के जुहकोवस्की में होने जा रहे इस कार्यक्र म का मुख्य आकर्षण सुखोई स्टील्थ लड़ाकू विमान की पांचवी पीढ़ी के संस्करण सुखोई एसयू-57ई रहेगा। इस विमान को यहां पहली बार दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है। यह शो 27 अगस्त से एक सितंबर तक चलेगा। नए सुखोई विमान को बहुआयामी विमान प्रणाली से युक्त किया गया है और यह अब वायु, जमीन और सतह संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम है।
इसे किसी भी मौसम, दिन-रात और कठिन पर्यावरण में भी प्रयोग किया जा सकेगा। विश्व के सबसे बड़े एयर शो और प्रदर्शनी में शुमार इस शो में हल्के सैन्य रूसी परिवहन विमान आईएल-113वीई और इसके निर्यात संस्करण आईएल-113वी को पेश किया जायेगा। साथ ही रूसी हेलीकॉप्टरों की क्षमताओं को प्रदर्शन किया जायेगा। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन जैसे देशों की कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।
रूस के जुहकोवस्की में होने जा रहे इस कार्यक्र म का मुख्य आकर्षण सुखोई स्टील्थ लड़ाकू विमान की पांचवी पीढ़ी के संस्करण सुखोई एसयू-57ई रहेगा। इस विमान को यहां पहली बार दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है। यह शो 27 अगस्त से एक सितंबर तक चलेगा। नए सुखोई विमान को बहुआयामी विमान प्रणाली से युक्त किया गया है और यह अब वायु, जमीन और सतह संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम है।
इसे किसी भी मौसम, दिन-रात और कठिन पर्यावरण में भी प्रयोग किया जा सकेगा। विश्व के सबसे बड़े एयर शो और प्रदर्शनी में शुमार इस शो में हल्के सैन्य रूसी परिवहन विमान आईएल-113वीई और इसके निर्यात संस्करण आईएल-113वी को पेश किया जायेगा। साथ ही रूसी हेलीकॉप्टरों की क्षमताओं को प्रदर्शन किया जायेगा। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन जैसे देशों की कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।